E20 पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने जारी किया FAQ, माइलेज से लेकर इंजन पर दिया जवाब, एक लाख करोड़ की दी दुहाई
E20 पेट्रोल को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि E10 पर लौटना देश के हित में नहीं होगा. सरकार के अनुसार एथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है. E20 से कच्चे तेल का आयात घटा है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों की इनकम बढ़ी है.
E20 Petrol: E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने अपना पक्ष साफ किया है. सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और कुछ ग्रुप अपने फायदे के लिए लोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि E20 पर लौटने का फैसला कई साल की मेहनत और करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश को प्रभावित करेगा. सरकार ने यह भी कहा कि यह प्लान देश की एनर्जी सिक्यूरिटी और किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए जरूरी है.
E20 पर पीछे लौटने के खिलाफ सरकार
पेट्रोलियम और नेचुलर गैस मंत्रालय ने FAQ जारी करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में एथेनॉल प्रोडक्शन और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हर साल करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. इसमें एथेनॉल प्लांट, डिस्टिलरी, स्टोरेज और लॉजिस्टिक नेटवर्क शामिल हैं. सरकार का कहना है कि अगर अब E10 पर वापस लौटा गया तो यह निवेश बेकार हो सकता है. इससे किसानों, सहकारी संस्थाओं, इंटरप्रेन्योर और वित्तीय संस्थानों पर भी असर पडे़गा.
E20 पर क्या बोली सरकार
सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल को लेकर इंजन खराब होने, रबर पाइप खराब होने और पुराने वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. मंत्रालय के मुताबिक ऑटोमोबाइल कंपनियों, ARAI, SIAM और तकनीकी संस्थानों ने E20 की पूरी जांच की है. Maruti Suzuki के सर्विस डाटा में भी करोड़ों पुराने वाहनों में E20 से जुड़ी किसी बड़ी समस्या की जानकारी नहीं मिली.
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माइलेज और कीमत पर भी दिया जवाब
सरकार ने माना कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल से 3 से 5 फीसदी तक माइलेज कम हो सकता है. हालांकि इसके बदले बेहतर ऑक्टेन, कम प्रदूषण और साफ इंजन जैसे फायदे मिलते हैं. सरकार ने यह भी कहा कि E20 का मकसद पेट्रोल सस्ता करना नहीं बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक तेल कीमतों के असर से देश को बचाना है.
सामान्य पेट्रोल का विकल्प क्यों नहीं
सरकार के अनुसार देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर एक साथ सामान्य पेट्रोल, E10 और E20 उपलब्ध कराना आसान नहीं है. इससे रिफाइनरी, डिपो, पाइपलाइन और सप्लाई चेन का खर्च काफी बढ़ जाएगा. सरकार का कहना है कि E20 योजना से अब तक करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. इसके अलावा 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिला है.
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