पेट्रोल-डीजल की बढ़ेगी सप्लाई, USA ने रूस से तेल खरीदने की दी मंजूरी, सभी देश 11 अप्रैल तक खरीद सकेंगे कच्चा तेल
अमेरिका ने वैश्विक तेल कीमतों में तेजी को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की कि समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अस्थायी अनुमति दी जाएगी. यह कदम अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने और वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाया गया है.
Russian oil purchase allowed: दुनिया को युद्ध के मुहाने पर ले जाने वाला अमेरिका अब तेल बाजार को शांत करने के लिए कुछ राहत देने की कोशिश करता नजर आ रहा है. ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उछाल आया है. 13 मार्च सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल और WTI 95 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा था.
बेलगाम होती तेल कीमतों पर काबू पाने के लिए अमेरिका ने नई रणनीति अपनाई है. पेट्रोल, डीजल की संभावित किल्लत को देखते हुए अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अस्थायी अनुमति दे दी है. इसके तहत सभी देश 11 अप्रैल तक रूस से कच्चा तेल खरीद सकेंगे.
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाने और अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है.
समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद की अनुमति
स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह अनुमति केवल उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लदा हुआ है और समुद्र में फंसा हुआ है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाना है ताकि कीमतों को काबू में रखा जा सके. यह फैसला अस्थायी है और केवल सीमित समय के लिए लागू रहेगा.
क्या रूस सरकार को नहीं होगा बड़ा फायदा?
अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ इसलिए लगाया था क्योंकि भारत रूस से तेल का व्यापार करता था. ट्रंप प्रशासन का मानना था कि इस व्यापार से रूस की सरकार को जो मुनाफा हो रहा है, उसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में किया जा रहा है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या अमेरिका के हालिया फैसले से रूसी सरकार को मुनाफा नहीं होगा?
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के अनुसार इस कदम से रूस सरकार को ज्यादा आर्थिक फायदा नहीं होगा. उनका कहना है कि रूस को ऊर्जा क्षेत्र से सबसे ज्यादा कमाई तेल के उत्पादन पर लगने वाले टैक्स से होती है. चूंकि यह तेल पहले से निकाला जा चुका है और समुद्र में है, इसलिए इससे रूस को अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा.
तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए और कदम
अमेरिकी सरकार ने तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है. अमेरिका अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करेगा. इसके अलावा 32 देशों के समूह इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भी कुल 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने का फैसला किया है, ताकि वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़े और कीमतें कम हो सकें.
