PNB के करेंसी चेस्ट में कैसे पहुंचे ₹17.29 करोड़ के नकली नोट? NIA जांच में नेपाल कनेक्शन, अब उठे कई सवाल

PNB के करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने के मामले में NIA ने जगाधरी करेंसी चेस्ट के मैनेजर अमित कुमार को गिरफ्तार किया है. 14 बैंकों के कंसोर्टियम से जुड़े इस मामले में तीन PNB अधिकारी जांच के घेरे में हैं. जांच एजेंसियां नकली नोटों के बैंकिंग सिस्टम में पहुंचने की कड़ी और संभावित नेपाल कनेक्शन की जांच कर रही हैं.

पंजाब नेशनल बैंक Image Credit: Canva/ Money9

पंजाब नेशनल बैंक यानी PNB के करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने के मामले में जांच अब और गंभीर हो गई है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने सोमवार को जगाधरी करेंसी चेस्ट के मैनेजर अमित कुमार को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट बैंकिंग सिस्टम के अंदर तक कैसे पहुंचे और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था.

मामले में तीन PNB अधिकारियों पर जांच की आंच है. इनमें सीनियर डिविजनल मैनेजर रवि कुमार कांसे, सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट मैनेजर सुशील कुमार और जगाधरी करेंसी चेस्ट मैनेजर अमित कुमार शामिल हैं. शुरुआती जांच में कथित भूमिका सामने आने के बाद बैंक ने तीनों को निलंबित कर दिया था.

बैंक के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों ने बढ़ाए सवाल

इस मामले की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नकली नोट किसी व्यक्ति के पास, किसी ठिकाने या सीमा पार से बरामद नहीं हुए, बल्कि बैंक के करेंसी चेस्ट के अंदर मिले. इसी वजह से जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोट बैंकिंग सिस्टम में किस स्तर पर दाखिल हुए.

NIA का कहना है कि मामला PNB के करेंसी चेस्ट में नकली करेंसी से जुड़ी साजिश का है. एजेंसी अब पूरी साजिश का पता लगाने और मामले में शामिल दूसरे आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है.

तीन PNB अधिकारी जांच के घेरे में

जांच में सामने आए तीनों अधिकारियों के खिलाफ पुलिस ने लुकआउट नोटिस भी जारी किए थे. आशंका थी कि वे नेपाल भाग सकते हैं. इसके बाद SIT और क्राइम ब्रांच ने तीनों अधिकारियों के घरों की तलाशी ली और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तथा दस्तावेज जब्त किए.

जांच एजेंसियां अब इन सामानों के जरिए तीनों के संपर्क, उनकी गतिविधियों और दूसरे लोगों के साथ संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं.

3 सितंबर को NIA ने संभाली जांच

NIA ने 3 सितंबर को मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद इसे दोबारा दर्ज किया. इससे पहले 29 अगस्त को सहारनपुर के सदर बाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 178 के तहत FIR दर्ज की गई थी.

अब जांच एजेंसियां नकली नोट मिलने से पहले करेंसी की पूरी आवाजाही को दोबारा जोड़ने की कोशिश कर रही हैं. खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि करेंसी चेस्ट से नोट कहां-कहां भेजे गए और नकली नोट किस चरण में करेंसी की खेप में शामिल हुए.

₹111 करोड़ की करेंसी RBI जयपुर भेजी गई थी

जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, 6 जुलाई को सहारनपुर से करेंसी हैंडलिंग नेटवर्क के जरिए ₹111 करोड़ की करेंसी RBI के जयपुर ऑफिस भेजी गई थी. इस खेप में ₹500 के 1,900 बंडल और ₹200 के 800 बंडल शामिल थे.

जांच एजेंसियां इस खेप की पैकिंग और डिस्पैच प्रक्रिया की जांच कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस खेप की जिम्मेदारी एक पार्ट टाइम हाउसकीपर को सौंपी गई थी. अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि नकली नोट इस करेंसी चेन में आखिर किस स्तर पर पहुंचे.

क्या नकली नोट बैंक शाखाओं और ATM तक भी पहुंचे?

जांच एजेंसियां इस संभावना को भी देख रही हैं कि करेंसी चेस्ट से कुछ नकली नोट बैंक शाखाओं और ATM तक भेजे गए हों और गड़बड़ी सामने आने से पहले वे सिस्टम से बाहर निकल गए हों.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि करेंसी चेस्ट से बाहर कितनी नकली करेंसी गई. इसलिए जांच एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल यह है कि क्या नकली नोट पहले ही आम लोगों के बीच चलन में पहुंच चुके हैं.

नेपाल कनेक्शन की भी जांच

मामले में अब संभावित सीमा पार कनेक्शन का एंगल भी सामने आया है. पुलिस तीनों आरोपियों के संपर्क और आवाजाही की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका नेपाल सीमा के आसपास या सीमा पार सक्रिय किसी व्यक्ति या समूह से कोई संबंध था या नहीं. हालांकि, अभी तक नेपाल कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है. जांच एजेंसियां इसे फिलहाल जांच के एक एंगल के तौर पर देख रही हैं. लुकआउट नोटिस भी इस आशंका के बीच जारी किए गए थे कि आरोपी देश छोड़कर नेपाल जा सकते हैं.

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