गोल्ड या सिल्वर, 53% करेक्शन के बाद बदली तस्वीर; किसमें लगाएं दांव?

Gold और Silver में हालिया 53% करेक्शन के बाद निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि मौजूदा स्तरों से किस मेटल में ज्यादा अपसाइड की संभावना है. Monarch PMS के मुताबिक, Gold का स्ट्रक्चरल केस मजबूत बना हुआ है, लेकिन Silver का रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल ज्यादा अट्रैक्टिव दिखाई दे रहा है. Silver में लगातार छठे साल सप्लाई डेफिसिट, टाइट इन्वेंट्रीज और बढ़ती फिजिकल इन्वेस्टमेंट डिमांड इसके पक्ष में प्रमुख फैक्टर्स हैं.

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Highlights

  • सिल्वर में लगातार छठे साल सप्लाई डेफिसिट, 2026 में 46.3 मिलियन आउंसेज का अनुमान.
  • 5.6 गुना पेपर लीवरेज से तेजी आने पर सिल्वर में तेज अपसाइड की संभावना.
  • गोल्ड के मुकाबले सिल्वर का रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल ज्यादा अट्रैक्टिव.

Gold vs Silver: गोल्ड और सिल्वर में हालिया तेज करेक्शन के बाद अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि आगे किसमें ज्यादा तेजी की संभावना बन रही है. Monarch PMS के मुताबिक, गोल्ड का स्ट्रक्चरल केस मजबूत बना हुआ है, लेकिन सिल्वर में मौजूदा स्तरों से ज्यादा अपसाइड की संभावना दिखाई दे रही है. सिल्वर में लंबे समय से बना फिजिकल सप्लाई डेफिसिट, टाइट इन्वेंट्रीज और बढ़ती इन्वेस्टमेंट डिमांड इसके पक्ष में प्रमुख फैक्टर्स हैं. इसके अलावा, मार्केट में मौजूद हाई पेपर लीवरेज तेजी आने पर सिल्वर की कीमत में तेज उछाल को और बढ़ा सकता है.

सिल्वर में लगातार छठे साल सप्लाई डेफिसिट

सिल्वर के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर इसका लगातार बना हुआ सप्लाई डेफिसिट है. 2026 में सिल्वर का फिजिकल डेफिसिट करीब 46.3 मिलियन आउंसेज रहने का अनुमान है. यह 2025 के 40.3 मिलियन आउंसेज के डेफिसिट से ज्यादा है. 2021 से अब तक अबव-ग्राउंड स्टॉक्स से करीब 762 मिलियन आउंसेज सिल्वर निकल चुका है. इससे उपलब्ध फिजिकल इन्वेंट्री पर दबाव बढ़ा है.

सिल्वर की सप्लाई को तेजी से बढ़ाना भी आसान नहीं है. ग्लोबल माइन प्रोडक्शन 2015 से अब तक लगभग 830-850 मिलियन आउंसेज प्रति वर्ष के आसपास रही है. इसके अलावा, सिल्वर का बड़ा हिस्सा कॉपर, लेड और जिंक माइनिंग के बाय-प्रोडक्ट के तौर पर निकलता है. ऐसे में सिल्वर की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रोडक्शन को तुरंत बढ़ाना मुश्किल है. नई माइंस को परमिटिंग से लेकर प्रोडक्शन शुरू करने तक करीब एक दशक का समय लग सकता है. यही वजह है कि बढ़ती डिमांड के मुकाबले सप्लाई तेजी से नहीं बढ़ पा रही है.

सोलर डिमांड में गिरावट के बावजूद डेफिसिट बरकरार

सिल्वर की डिमांड को लेकर सबसे बड़ी चिंता सोलर सेक्टर से जुड़ी है. फोटोवोल्टिक में सिल्वर कंजम्पशन 2026 में 19% घटकर करीब 151 मिलियन आउंसेज रहने का अनुमान है. इससे पहले 2025 में भी इसमें 6% की गिरावट आई थी. हालांकि, Monarch PMS के मुताबिक, सोलर सेक्टर में सिल्वर की खपत में कमी मुख्य रूप से थ्रिफ्टिंग की वजह से है.

इसका मतलब है कि सोलर सेल्स में सिल्वर की मात्रा कम की जा रही है, न कि पूरी तरह किसी दूसरे मेटल से इसे रिप्लेस किया जा रहा है. सिल्वर लोडिंग को बहुत ज्यादा कम करने की भी सीमा है, क्योंकि इससे सोलर सेल्स की एफिशिएंसी और रिलायबिलिटी प्रभावित हो सकती है.

वहीं, डॉमिनेंट TOPCon टेक्नोलॉजी में कॉपर सब्स्टिट्यूशन के बड़े पैमाने पर कमर्शियल होने की संभावना 2028-30 से पहले कम मानी जा रही है. खास बात यह है कि फोटोवोल्टिक डिमांड में सबसे बड़ी दर्ज गिरावट के बावजूद सिल्वर का सप्लाई डेफिसिट बढ़ रहा है. इससे सप्लाई कंस्ट्रेंट की मजबूती का संकेत मिलता है.

5.6 गुना पेपर लीवरेज से बढ़ सकती है तेजी

सिल्वर मार्केट की स्ट्रक्चर भी इसे गोल्ड से अलग बनाती है. COMEX में रजिस्टर्ड सिल्वर इन्वेंट्रीज करीब 96 मिलियन आउंसेज हैं. यह आउटस्टैंडिंग पेपर क्लेम्स के मुकाबले केवल करीब 17.8% कवरेज देता है. इस आधार पर सिल्वर मार्केट में पेपर लीवरेज करीब 5.6 गुना आंका गया है. यह लीवरेज सिल्वर की कीमत में गिरावट को भी तेज कर सकता है और तेजी को भी.

इसी मार्केट स्ट्रक्चर ने सिल्वर की जनवरी की पीक से जून तक करीब 53% की गिरावट को बढ़ाने में भूमिका निभाई. सिल्वर जनवरी में 121.64 डॉलर प्रति आउंस के पीक पर पहुंचा था, जबकि जून में यह करीब 57.6 डॉलर तक आ गया. हालांकि, फिजिकल अवेलेबिलिटी में कमी और इन्वेस्टमेंट डिमांड में दोबारा तेजी आने पर यही लीवरेज सिल्वर की कीमत में तेज अपसाइड मूव को भी बढ़ा सकता है.

इन्वेस्टमेंट डिमांड में बढ़ोतरी का अनुमान

सिल्वर की फिजिकल इन्वेस्टमेंट डिमांड को लेकर भी आउटलुक सकारात्मक है. 2026 में फिजिकल इन्वेस्टमेंट डिमांड 20% बढ़कर करीब 227 मिलियन आउंसेज रहने का अनुमान है. वहीं, US रिटेल डिमांड में करीब 57% की तेजी आने का अनुमान लगाया गया है. इससे सिल्वर के लिए इंडस्ट्रियल डिमांड के साथ इन्वेस्टमेंट डिमांड का भी सपोर्ट मिल सकता है. यही कॉम्बिनेशन आने वाले समय में सिल्वर की कीमत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

गोल्ड के मुकाबले सिल्वर ज्यादा अट्रैक्टिव?

Monarch PMS के वैल्यूएशन फ्रेमवर्क के मुताबिक, सिल्वर का मॉडल्ड रेंज 54-77 डॉलर प्रति आउंस है, जबकि इसका मिडपॉइंट 65 डॉलर है. 6 अगस्त को सिल्वर करीब 61.7 डॉलर पर था, यानी मॉडल्ड मिडपॉइंट से लगभग 6% नीचे. इसके मुकाबले गोल्ड करीब 4,242 डॉलर पर था, जो उसके 3,922 डॉलर के मॉडल्ड मिडपॉइंट से करीब 8% ऊपर था.

इस आधार पर सिल्वर का रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल गोल्ड की तुलना में ज्यादा अट्रैक्टिव दिखाई देता है. हालांकि, सिल्वर में वोलैटिलिटी गोल्ड के मुकाबले काफी ज्यादा रहती है. इसलिए इसमें गिरावट भी तेज हो सकती है. लेकिन 53% के करेक्शन के बाद गोल्ड-सिल्वर रेशियो भी करीब 46 गुना से बढ़कर लगभग 69 गुना हो गया है.

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