ऑयल प्राइस में बड़ी तेजी! $100 के करीब ब्रेंट क्रूड, US-ईरान तनाव के बीच $120 तक जाने का खतरा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते यू.एस.-ईरान तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 95 डॉलर के स्तर के करीब है. यू.एस. की ओर से ईरान के पांच क्रूड ऑयल टैंकरों को डिस्ट्रॉय किए जाने के बाद शिपिंग रूट्स और ऑयल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
Highlights
- ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब, यू.एस.-ईरान तनाव से बढ़ी Oil सप्लाई की चिंता.
- यू.एस. ने ईरान के 5 क्रूड ऑयल टैंकर्स को किया डिस्ट्रॉय, शिपिंग रूट्स पर बढ़ा जोखिम.
- Goldman Sachs ने दी चेतावनी, सप्लाई डिसरप्शन बढ़ने पर ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर पार कर सकता है.
Oil Price: मिडिल ईस्ट में बढ़ते यू.एस.-ईरान तनाव का असर अब ग्लोबल ऑयल मार्केट पर साफ दिखाई देने लगा है. यू.एस. और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई फिर तेज होने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है. निवेशकों को आशंका है कि अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष और बढ़ता है और मिडिल ईस्ट से ऑयल सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है. ब्रेंट क्रूड अब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है.
ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के करीब
बुधवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में करीब 1.55% की तेजी आई और इसकी कीमत 99.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, यू.एस. बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स भी 1.75% चढ़कर 94.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
क्रूड ऑयल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब यू.एस.-ईरान कॉन्फ्लिक्ट के कारण मिडिल ईस्ट से ऑयल सप्लाई और शिपिंग रूट्स को लेकर चिंता बढ़ रही है. खास तौर पर ऑयल टैंकरों पर बढ़ते हमलों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन के लिए जोखिम बढ़ा दिया है.
यू.एस. ने ईरान के 5 क्रूड टैंकरों को किया डिस्ट्रॉय
तनाव बढ़ने की बड़ी वजह मंगलवार को हुई सैन्य कार्रवाई है. यू.एस. मिलिट्री ने एक अमेरिकन वॉरशिप पर हुए कथित ईरानी हमले के प्रयास के जवाब में ईरान के पांच क्रूड ऑयल टैंकरों को डिस्ट्रॉय कर दिया. यू.एस. सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के मुताबिक, अमेरिकन वॉरशिप ईरानी हमले से बच गया और इस घटना में किसी भी अमेरिकन पर्सनेल को नुकसान नहीं पहुंचा. इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. इससे ऑयल ट्रेडर्स को आशंका है कि अगर शिपिंग पर हमले जारी रहे, तो पर्शियन गल्फ से क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
गोल्डमैन सैक्स ने जताई 120 डॉलर तक पहुंचने की संभावना
गोल्डमैन सैक्स के ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड डैन स्ट्रूवेन के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में ब्रेंट क्रूड का 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना संभव है. उन्होंने सीएनबीसी के स्क्वॉक बॉक्स एशिया से बातचीत में कहा कि शिपिंग अटैक्स के बढ़ने और उनके व्यापक होने से ऑयल एक्सपोर्ट के आने वाले महीनों में सामान्य स्तर पर लौटने की संभावना को लेकर जोखिम बढ़ गया है.
हालांकि, गोल्डमैन सैक्स का बेस केस अभी भी यही है कि पर्शियन गल्फ से ऑयल एक्सपोर्ट्स धीरे-धीरे रिकवर हो सकते हैं. ऑयल प्रोड्यूसर्स अल्टरनेटिव शिपिंग रूट्स का इस्तेमाल करके सप्लाई डिसरप्शन को कम करने की कोशिश कर सकते हैं. इसके अलावा, आने वाले समय में एडिशनल पाइपलाइन कैपेसिटी भी उपलब्ध हो सकती है.
लेकिन अगर पर्शियन गल्फ से ऑयल एक्सपोर्ट्स आने वाले महीनों में रिकवर नहीं कर पाए और मौजूदा स्तर पर ही स्टैगनेट रहे, तो ऑयल मार्केट में तेजी का एक बड़ा सिनेरियो बन सकता है. इसी स्थिति में ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की संभावना बढ़ सकती है.
शिपिंग रूट्स पर सबसे बड़ा खतरा
मिडिल ईस्ट ग्लोबल ऑयल सप्लाई का बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है. ऐसे में इस क्षेत्र में शिपिंग डिसरप्शन का सीधा असर इंटरनेशनल ऑयल प्राइसेज पर पड़ सकता है. खास तौर पर पर्शियन गल्फ और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण एनर्जी शिपिंग रूट्स पर किसी भी तरह का गंभीर व्यवधान ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई शॉक पैदा कर सकता है. ऑयल मार्केट में पहले से ही जियोपॉलिटिकल रिस्क को लेकर सतर्कता बनी हुई है.
यू.एस.-ईरान कॉन्फ्लिक्ट अब सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है. करीब एक महीने तक यू.एस. की मिलिट्री एक्शन में ठहराव रहा था और वॉशिंगटन ने ईरान पर इकोनॉमिक प्रेशर बढ़ाने की रणनीति अपनाई थी. लेकिन पिछले महीने के अंत में मिलिट्री स्ट्राइक्स दोबारा शुरू हो गईं. अब शिपिंग अटैक्स के बढ़ने से मार्केट में यह चिंता बढ़ रही है कि संघर्ष केवल दोनों देशों के बीच मिलिट्री टारगेट्स तक सीमित न रहकर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क तक फैल सकता है.
भारत पर भी पड़ सकता है असर
अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है या गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक 120 डॉलर के स्तर को पार करता है, तो इसका असर ऑयल इंपोर्टिंग कंट्रीज पर पड़ सकता है. भारत भी अपनी क्रूड ऑयल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए इंपोर्ट्स पर निर्भर है. इसलिए इंटरनेशनल क्रूड प्राइसेज में तेज बढ़ोतरी से देश के इंपोर्ट बिल, फ्यूल प्राइसिंग, इंफ्लेशन और करंट अकाउंट पर दबाव बढ़ सकता है.
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