Premier Energies का ₹6,000 करोड़ का मेगा प्लान, 2028 तक बनेगी पूरी तरह इंटीग्रेटेड सोलर कंपनी
भारत में सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में प्रीमियर एनर्जीज ने बड़ा निवेश करने का फैसला किया है. कंपनी अगले तीन वर्षों में करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च कर इंगट और वेफर निर्माण क्षमता विकसित करेगी. यह कदम कंपनी को सोलर वैल्यू चेन में पूरी तरह इंटीग्रेटेड बनाएगा और सरकार की घरेलू विनिर्माण और आत्मनिर्भरता की नीति को भी मजबूती देगा.

Premier Energies : भारत में सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाने की दिशा में प्रीमियर एनर्जीज बड़ा कदम उठाने जा रही है. कंपनी अगले तीन वर्षों में करीब 6,000 करोड़ रुपये का निवेश कर इंगट (Ingot) और वेफर (Wafer) बनाने की क्षमता विकसित करेगी. इससे कंपनी सोलर पैनल निर्माण की पूरी वैल्यू चेन में अपनी मौजूदगी मजबूत करेगी और आयात पर निर्भरता भी कम होगी. इस ऐलान के बाद सोमवार को कंपनी के स्टॉक में हलचल दिख सकती है.
6,000 करोड़ रुपये से तैयार होगी इंगट और वेफर यूनिट
कंपनी के मुख्य व्यवसाय अधिकारी (सीबीओ) विनय रुस्तगी के अनुसार, यह निवेश 2028 तक पूरा किया जाएगा. इस परियोजना के तहत कंपनी 10 गीगावाट इंगट और 10 गीगावाट वेफर उत्पादन क्षमता स्थापित करेगी. यह निवेश कंपनी की कुल 12,500 करोड़ रुपये की पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) योजना का हिस्सा है.
आंध्र प्रदेश में मिलेगा नया मैन्युफैक्चरिंग हब
नई उत्पादन इकाई आंध्र प्रदेश के नायडुपेटा में स्थापित होगी. राज्य सरकार ने इसके लिए कंपनी को 200 एकड़ जमीन आवंटित की है. यह स्थान तिरुपति से करीब 45 मिनट की दूरी पर है. कंपनी का कहना है कि परियोजना पर काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है.
सरकार की नीति से मिला निवेश को बढ़ावा
कंपनी का कहना है कि यह निवेश केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत और घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप है. हाल ही में Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) ने एएलएमएम (Approved List of Models and Manufacturers) के दायरे में इंगट और वेफर को भी शामिल करने का फैसला किया है. यह नियम 1 जून 2028 से लागू होगा, जिसके बाद भारत में इस्तेमाल होने वाले इंगट और वेफर का घरेलू उत्पादन जरूरी होगा.
बढ़ेगी उत्पादन क्षमता, नए कारोबार में भी करेगी प्रवेश
फिलहाल प्रीमियर एनर्जीज हैदराबाद के आसपास स्थित अपने संयंत्रों में 3.6 गीगावाट सोलर सेल और 11.1 गीगावाट सोलर मॉड्यूल का उत्पादन करती है. कंपनी अपनी कुल 12,500 करोड़ रुपये की निवेश योजना के तहत सेल और मॉड्यूल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ इनवर्टर, बैटरी और ट्रांसफॉर्मर जैसे नए कारोबार में भी प्रवेश करेगी. कंपनी का कहना है कि नई इंगट और वेफर क्षमता पहले उसकी अपनी जरूरतों को पूरा करेगी, जबकि अतिरिक्त उत्पादन खुले बाजार में भी बेचा जाएगा.