भारत में नेचुरल गैस को लेकर बड़ा फैसला, केंद्र ने खत्म किया इमरजेंसी कंट्रोल, जानें क्या बदला
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण एलएनजी (LNG) की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस पर लागू आपातकालीन नियंत्रण हटा दिए हैं. सरकार ने यह फैसला युद्धविराम लागू होने, होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री यातायात दोबारा शुरू होने और गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने के बाद लिया है. इससे देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता अब पहले से अधिक स्थिर मानी जा रही है.
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण एलएनजी (LNG) की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद केंद्र सरकार ने इस साल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर जो आपातकालीन नियंत्रण लागू किए थे, उन्हें अब वापस ले लिया है. सरकार का कहना है कि युद्धविराम, जारी शांति वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही फिर शुरू होने के बाद गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य हो गई है.
युद्ध के कारण लागू किए गए थे विशेष नियंत्रण
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी (Liquified Natural Gas) की खेप प्रभावित हो गई थी. कई अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) का हवाला देते हुए आपूर्ति में रुकावट की घोषणा की थी. इसके चलते देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था.
जरूरी क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराने के लिए जारी हुआ था आदेश
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 लागू किया था. इसके तहत प्राकृतिक गैस, एलएनजी और री-गैसीफाइड एलएनजी के उत्पादन, आवंटन, वितरण, उपयोग और खपत को नियंत्रित किया गया था. साथ ही आवश्यक और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गैस का पुनर्वितरण भी किया गया था.
युद्धविराम और समुद्री मार्ग खुलने से सामान्य हुई स्थिति
ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अपनी नई अधिसूचना में कहा है कि अब पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू हो चुका है और स्थायी समाधान के लिए बातचीत जारी है. इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही भी फिर से शुरू हो गई है. इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर लगाए गए आपातकालीन रोक को समाप्त करने का फैसला लिया है, जिससे संकेत मिलता है कि देश में गैस आपूर्ति की स्थिति अब पहले की तुलना में काफी स्थिर हो गई है.
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