क्रिटिकल मिनरल्स की ऑक्शन फिर फेल! सरकार ने रद्द की 9 खनिज ब्लॉकों की नीलामी; ये है वजह
निवेशकों की कमजोर दिलचस्पी के चलते केंद्र सरकार ने क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स के 9 खनिज ब्लॉकों की ऑक्शन रद्द कर दी है. दो ब्लॉकों के लिए एक भी बिड नहीं मिली, जबकि सात ब्लॉकों को पर्याप्त योग्य बिडर नहीं मिले.
Critical Minerals Auction: देश में क्रिटिकल मिनरल्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की सरकार की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. निवेशकों की कमजोर दिलचस्पी के चलते केंद्र सरकार ने क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स के 9 ब्लॉकों की ऑक्शन रद्द कर दी है. इनमें दो ब्लॉकों के लिए एक भी बिड नहीं मिली, जबकि सात ब्लॉकों के लिए तीन से कम तकनीकी रूप से योग्य बिडर सामने आए. ऐसे में सरकार को पूरी ऑक्शन प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी.
क्यों रद्द करनी पड़ी ऑक्शन
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सातवें चरण की ऑक्शन के तहत कुल 19 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स पेश किए गए थे. लेकिन दो ब्लॉकों पर एक भी बोली नहीं आई, जबकि सात अन्य ब्लॉकों के लिए न्यूनतम तीन तकनीकी रूप से योग्य बिडर भी नहीं मिले. नियमों के अनुसार, इतनी कम भागीदारी होने पर ऑक्शन को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता.
किन खनिज ब्लॉकों की ऑक्शन हुई रद्द
जिन दो ब्लॉकों पर एक भी बिड नहीं मिली, उनमें मध्य प्रदेश का मझौली टाइटेनियम, वेनेडियम एंड एल्यूमिनस लेटराइट ब्लॉक और राजस्थान का आरएएमबी डेगाना टंगस्टन, लिथियम एंड एसोसिएटेड मिनरल ब्लॉक शामिल हैं. वहीं, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सात अन्य ग्लॉकोनाइट, वेनेडियम और ग्रेफाइट ब्लॉक्स की ऑक्शन भी पर्याप्त योग्य बिडर नहीं मिलने के कारण रद्द कर दी गई.
सरकार के लिए क्यों अहम हैं क्रिटिकल मिनरल्स
क्रिटिकल मिनरल्स देश की एनर्जी सिक्योरिटी और भविष्य की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में होता है. यही वजह है कि सरकार आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इन खनिजों के घरेलू एक्सप्लोरेशन और माइनिंग को बढ़ावा दे रही है.
पहले भी कई बार रद्द हो चुकी है ऑक्शन
यह पहला मौका नहीं है, जब सरकार को क्रिटिकल मिनरल्स की ऑक्शन रद्द करनी पड़ी हो. इससे पहले भी पहले से लेकर छठे चरण तक कई खनिज ब्लॉकों की ऑक्शन रद्द की जा चुकी है. छठे चरण में 11, पांचवें में 5, चौथे में 11, तीसरे में 3, दूसरे में 14 और पहले चरण में 13 ब्लॉकों की ऑक्शन निरस्त करनी पड़ी थी. इससे साफ है कि इस क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करना सरकार के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है.
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