RBI ने जुटाए $32 अरब, फिर भी रुपये और Forex Reserves पर क्यों नहीं दिखा बड़ा असर? जानें क्या है वजह
RBI की विभिन्न योजनाओं के तहत बैंकों ने 32 अरब डॉलर जुटा लिए हैं, लेकिन इसका पूरा असर अभी रुपये, Forex Reserves और बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर नहीं दिखा है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में अब तक केवल 7.6 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि रुपये की मजबूती भी सीमित रही. हालांकि, इन उपायों से बैंकों की फंडिंग कॉस्ट में कमी आई है और आने वाले महीनों में बैंकिंग लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

RBI Forex Reserves: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा देश में विदेशी मुद्रा (Forex) का फ्लो बढ़ाने के लिए हाल ही में कई कदम उठाए गए हैं. इन कदमों का शुरुआती असर सकारात्मक जरूर दिखा है, लेकिन इसका पूरा फायदा अभी तक रुपये, विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर नजर नहीं आया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, हाल में घोषित विभिन्न योजनाओं के तहत बैंकों ने अब तक 32 अरब डॉलर जुटा लिए हैं. हालांकि, इसके बावजूद रुपये को अपेक्षित मजबूती नहीं मिली है और बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति भी अभी बहुत अधिक नहीं सुधरी है.
रुपये में सीमित रही मजबूती
वर्ष 2013 में जब भारत ने विदेशी मुद्रा जमा योजनाएं शुरू की थीं, तब शुरुआती 37 दिनों में रुपया 10 फीसदी से अधिक मजबूत हुआ था. लेकिन इस बार स्थिति अलग है. मई में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद रुपया करीब 3 फीसदी तक संभला, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव के कारण यह बढ़त टिक नहीं सकी. बाजार के जानकारों के अनुसार, रुपये को स्थिर बनाए रखने के लिए RBI को हाल के दिनों में डॉलर की बिक्री भी करनी पड़ी. यही वजह है कि विदेशी मुद्रा के फ्लो का पूरा असर अभी रुपये पर दिखाई नहीं दे रहा है.
Forex Reserves में भी सीमित बढ़ोतरी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की योजनाओं के तहत 32 अरब डॉलर जुटाए जाने के बावजूद केंद्रीय बैंक के Forex Reserves में अब तक केवल 7.6 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह आंकड़ा 5 जून से 17 जुलाई के बीच का है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतर की एक वजह रिपोर्टिंग में समय का अंतर हो सकता है.
बैंक सप्ताह के तय दिन पर ही इन जमाओं को RBI के साथ स्वैप करते हैं, जबकि केंद्रीय बैंक Forex Reserves का आंकड़ा हर सप्ताह अपडेट करता है. इसके अलावा RBI अपनी पहले से मौजूद फॉरवर्ड डॉलर पोजिशन को भी कम कर सकता है, जिससे Forex Reserves में बढ़ोतरी फिलहाल कम दिखाई दे रही है.
बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति अभी भी कड़ी
विदेशी मुद्रा के फ्लो के बावजूद बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति अभी पूरी तरह सहज नहीं हुई है. इसकी बड़ी वजह यह है कि रुपये को समर्थन देने के लिए RBI लगातार डॉलर बेच रहा है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक Repo Operations के जरिए बैंकिंग सिस्टम में नकदी भी उपलब्ध करा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि FCNR जमा से आई राशि का लिक्विडिटी पर अब तक सीमित असर पड़ा है. हालांकि, आने वाले महीनों में बैंकिंग सिस्टम में नकदी का सरप्लस तेजी से बढ़ सकता है. कुछ अनुमान बताते हैं कि जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा RBI की शॉर्ट डॉलर फॉरवर्ड पोजिशन को कम करने में इस्तेमाल होगा, जबकि शेष राशि बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी बढ़ाने में मदद करेगी.
बैंकों की उधारी की लागत घटी
इन उपायों का सबसे बड़ा सकारात्मक असर बैंकों की फंडिंग कॉस्ट पर देखने को मिला है. पिछले कुछ समय से बैंकों में जमा की बढ़ोतरी, लोन वितरण की तुलना में धीमी रही है, जिसके कारण उन्हें अल्पकालिक बाजार से ऊंची ब्याज दरों पर उधार लेना पड़ रहा था.
रिपोर्ट के मुताबिक, अब स्थिति में सुधार आया है. आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष की Certificate of Deposit (CD) पर ब्याज दर मई में 7.96 फीसदी के दो साल के उच्च स्तर से घटकर करीब 7 फीसदी पर आ गई है. इससे बैंकों के लिए धन जुटाना पहले की तुलना में सस्ता हो गया है.
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