अब हर ब्रांड के कपड़ों की साइज होगी एक जैसी, सरकार ला रही है नया नियम; आसान होगी ऑनलाइन शॉपिंग
केंद्र सरकार देशभर में कपड़ों की साइजिंग को एक समान बनाने के लिए स्टैंडर्डाइज्ड अपैरल साइजिंग फ्रेमवर्क तैयार कर रही है. इसके लागू होने के बाद अलग-अलग ब्रांड में S, M और L साइज का मतलब लगभग एक जैसा होगा. यह व्यवस्था NIFT के 25,000 से अधिक भारतीयों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है. नए मानक से ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान गलत साइज मिलने की समस्या कम होगी.
Standardised Apparel Sizing: अगर आप किसी ब्रांड में मीडियम (M) साइज की शर्ट पहनते हैं, लेकिन दूसरे ब्रांड में वही मीडियम साइज आपको फिट नहीं आती, तो जल्द ही यह परेशानी खत्म हो सकती है. केंद्र सरकार देशभर में कपड़ों की साइजिंग को एक समान बनाने की तैयारी में है. टेक्सटाइल मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर स्टैंडर्डाइज्ड अपैरल साइजिंग फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने में जुटा है. इसके लागू होने के बाद अलग-अलग ब्रांड में S, M और L जैसी साइज का मतलब लगभग एक जैसा होगा.
ऑनलाइन खरीदारों को होती है परेशानी
दरअसल, अभी भारत में अधिकांश कपड़ा कंपनियां अमेरिका और ब्रिटेन के साइज चार्ट का इस्तेमाल करती हैं. जबकि भारतीय लोगों की शारीरिक बनावट पश्चिमी देशों के लोगों से काफी अलग होती है. यही वजह है कि एक ही साइज अलग-अलग ब्रांड में अलग फिटिंग देती है. कई बार किसी ब्रांड का मीडियम दूसरे ब्रांड के स्मॉल या लार्ज के बराबर निकलता है. इससे खासकर ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को काफी परेशानी होती है.
S, M और L पर रहेगा जोर
ET की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय साइजिंग फ्रेमवर्क में S (स्मॉल), M (मीडियम) और L (लार्ज) जैसी अक्षर आधारित साइजिंग प्रणाली अपनाई जा सकती है. सरकार का मानना है कि भारतीय उपभोक्ता इन साइजों से पहले से परिचित हैं और इन्हें समझना आसान है. फिलहाल प्रत्येक साइज के भीतर कितनी माप में अंतर स्वीकार्य होगा, इस पर अंतिम चर्चा चल रही है. एक बार मानक अधिसूचित होने के बाद उसमें बदलाव करना आसान नहीं होगा. इसलिए सरकार सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान से तय कर रही है.
25,000 भारतीयों पर हुआ अध्ययन
इस नए साइजिंग सिस्टम की नींव नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) द्वारा किए गए एक बड़े अध्ययन पर आधारित है. इस अध्ययन में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के 25,000 से अधिक भारतीय पुरुषों और महिलाओं के शरीर के विभिन्न माप लिए गए. इसका उद्देश्य भारतीय लोगों की वास्तविक शारीरिक बनावट के आधार पर साइज तय करना था, ताकि कपड़ों की फिटिंग बेहतर हो सके.
टास्क फोर्स तय कर रही है मानक
टेक्सटाइल मंत्रालय ने उद्योग जगत, रिटेल कंपनियों और विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक टास्क ग्रुप बनाया है. यह समूह कंधे, छाती, कमर, लंबाई और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक मापों के लिए राष्ट्रीय मानक तैयार कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश तकनीकी काम पूरा हो चुका है और अब अंतिम मानकों को तय किया जा रहा है.
ग्राहकों और कंपनियों दोनों को होगा फायदा
सरकार का मानना है कि एक समान साइजिंग प्रणाली लागू होने से ग्राहकों को सही साइज चुनने में आसानी होगी. ऑनलाइन खरीदारी के दौरान गलत साइज के कारण होने वाले रिटर्न और एक्सचेंज भी कम होंगे. वहीं, कपड़ा कंपनियां भारतीय शरीर की बनावट के अनुसार बेहतर फिटिंग वाले परिधान तैयार कर सकेंगी. इससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ेगा.
यूरोप और अमेरिका की तरह बनेगा राष्ट्रीय मानक
यह पहल टेक्सटाइल मंत्रालय के व्यापक स्टैंडर्डाइजेशन अभियान का हिस्सा है. सरकार का लक्ष्य भारत में कपड़ों की साइजिंग को यूरोप और अमेरिका की तरह एक समान बनाना है, ताकि किसी भी ब्रांड का S, M या L साइज पूरे देश में लगभग एक जैसा हो. इससे उपभोक्ताओं की खरीदारी आसान होगी, उद्योग को लाभ मिलेगा और भारतीय परिधान बाजार अधिक व्यवस्थित बन सकेगा.
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