रुपये में गिरावट, डॉलर के मुकाबले पहली बार 95.28 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा; ट्रंप के फैसले से बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच भारतीय रुपया सोमवार को 79 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.28 पर बंद हुआ. मजबूत डॉलर और वैश्विक अनिश्चितताओं ने रुपये पर दबाव बढ़ाया.

Rupee Fall: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपये में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली. रुपया 79 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.28 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, मजबूत डॉलर और तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया. शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखने को मिली और निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ.
रुपये ने बनाया नया रिकॉर्ड निचला स्तर
पीटीई के रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.97 पर खुला और कारोबार के दौरान 95.34 तक फिसल गया. आखिर में यह 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर है. इससे पहले 4 मई को रुपया 95.23 के स्तर तक पहुंचा था. लगातार गिरते रुपये ने आयात लागत और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है.
ईरान और अमेरिका तनाव का असर
रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने युद्ध समाप्त करने को लेकर अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे अस्वीकार्य बताया. इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई. ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. वैश्विक बाजार में तनाव बढ़ने से निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है.
पीएम मोदी की अपील का भी दिखा असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन का सीमित उपयोग करने, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्राओं में कमी लाने की अपील की थी. सरकार का कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव
सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से भारी बिकवाली की. एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने 8437 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इससे शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स 1312 अंक टूटकर 76015 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23815 के स्तर तक गिर गया. विदेशी पूंजी निकासी का असर रुपये पर भी साफ दिखाई दिया.
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डॉलर और कच्चे तेल की तेजी बनी चुनौती
डॉलर इंडेक्स 98 के ऊपर बना हुआ है, जिससे अमेरिकी मुद्रा मजबूत बनी हुई है. वहीं कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है.