Strait of Hormuz: ईरान और ओमान तय करेंगे सुरक्षित शिपिंग रूट, तेहरान को मिलेगा अधिक कंट्रोल! अंतिम चरण में बातचीत
संभावित समझौते की खबर से तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी कुछ समय के लिए कम हो गई. ईरान और ओमान, दोनों की सीमाएं 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से लगती हैं, और वे इस जलमार्ग से होने वाले ट्रैफिक को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं.

ईरान और ओमान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज‘ से शिपिंग को मैनेज करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं. इससे तेहरान को इस अहम एनर्जी रूट पर अधिक कंट्रोल मिल सकता है और यह सवाल भी उठ सकता है कि अमेरिका इस पर क्या प्रतिक्रिया देगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि ओमान के साथ बातचीत में ‘बहुत अच्छी प्रगति’ हुई है और यह अपने अंतिम चरण में है.
अस्थायी सुरक्षित शिपिंग रूट
ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर गुजरने वाले एक अस्थायी सुरक्षित शिपिंग रूट का विवरण शामिल होगा, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट है. बघाई ने कहा कि इस व्यवस्था को इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के साथ दर्ज किया जाएगा. उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि कोई तीसरा पक्ष (जिसका नाम नहीं लिया गया) बातचीत में दखल नहीं देगा.
शिपिंग डील से उम्मीदें बढ़ीं, तेल की कीमतों में नरमी
संभावित समझौते की खबर से तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी कुछ समय के लिए कम हो गई, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि एक सुरक्षित रूट से ज्यादा टैंकर और कमर्शियल जहाज इस जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से गुजर सकेंगे और शिपिंग पर और हमलों का जोखिम कम हो जाएगा.
लंदन में दोपहर तक ब्रेंट क्रूड $97 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि इससे पहले यह $97.93 तक पहुंच गया था.
मैक्वेरी के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि होर्मुज से अभी रोजाना लगभग 7 मिलियन बैरल क्रूड और रिफाइंड फ्यूल गुजर रहा है, जबकि युद्ध से पहले यह आंकड़ा लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन था.
ईरान होर्मुज पर अधिक कंट्रोल चाहता है
ईरान और ओमान, दोनों की सीमाएं ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से लगती हैं, और वे इस जलमार्ग से होने वाले ट्रैफिक को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं. दोनों देशों के इस रूट का इस्तेमाल करने वाले जहाजों से सर्विस फीस लेने की भी संभावना है.
अमेरिका कर रहा नाकेबंदी
वहीं अमेरिका, ईरान के तेल निर्यात को सीमित करने के लिए ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रहा है और चाहता है कि होर्मुज युद्ध से पहले की स्थिति में लौट आए. तब यह बिना किसी रोक-टोक वाला जलमार्ग था. फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल के हमले शुरू होने के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य को असल में बंद कर दिया था और इस रुकावट के कारण शिपिंग गतिविधियों में भारी कमी आई है.
टैंकरों पर हमलों से शिपिंग का जोखिम बढ़ा
यह प्रस्तावित समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान ने वीकेंड पर दावा किया कि उसने एक अनधिकृत रूट का इस्तेमाल करने वाले तीन जहाजों और दूसरी जगहों पर अमेरिका से जुड़े तीन जहाजों पर हमला किया.
अमेरिकी सेना ने पहले कहा था कि उसने ईरान के तीन क्रूड टैंकरों पर हमला किया और उनमें से एक को नष्ट कर दिया, क्योंकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी नौसेना के दो युद्धपोतों को निशाना बनाया था.
दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बढ़ीं
सातवें महीने में चल रहे इस टकराव ने तेल, ईंधन और प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ा दी हैं और दुनिया भर में महंगाई की एक नई लहर को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं.
लंबे समय से चल रहे इस युद्ध के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर भी टकराव खत्म करने का रास्ता खोजने का दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि ईंधन की बढ़ती कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बोझ डाल रही हैं और नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले यह एक राजनीतिक मुद्दा बन सकता है.
नाकाम रही हैं तमाम कोशिशें
इस टकराव को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की बार-बार की गई कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं, जिससे यह इलाका एक तनावपूर्ण गतिरोध की स्थिति में फंसा हुआ है, जहां समय-समय पर हमले होते रहते हैं.