टाटा की कंपनी सेना के लिए बनाएगी टैंक, ₹20000 करोड़ के प्रोजेक्ट जोरावर का मिला काम; महिंद्रा बनाएगी प्रोटोटाइप
Project Zorawar Light Tank: आर्मी का 'प्रोजेक्ट जोरावर' पहली बार ऐसा मौका है, जब कोई बैटल टैंक पूरी तरह से प्राइवेट सेक्टर बनाएगा. यह प्रोजेक्ट रक्षा मंत्रालय की 'मेक 1' पॉलिसी के तहत लागू किया जा रहा है, जो प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के लिए 70 फीसदी सरकारी फंडिंग की इजाजत देती है.

Project Zorawar Light Tank: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने नेक्स्ट जेनरेशन के हल्के युद्धक टैंक (लाइट बैटल टैंक) को डेवलप करने के लिए रक्षा मंत्रालय की एक कड़ी प्रतियोगिता में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर जगह बनाई है. इस अहम प्रोजेक्ट की कीमत लगभग 20,000 करोड़ रुपये है और इसके लिए चार अन्य कंपनियां भी होड़ में थीं.
प्रोजेक्ट जोरावर
ईटी के अनुसार, आर्मी का ‘प्रोजेक्ट जोरावर’ पहली बार ऐसा मौका है, जब कोई बैटल टैंक पूरी तरह से प्राइवेट सेक्टर बनाएगा. इसमें एक नया ‘आर्म्ड फाइटिंग व्हीकल-इंडियन लाइट टैंक’ (AFV-ILT) बनाना शामिल है, जो दलदली इलाकों और रेगिस्तान के अलावा बहुत ऊंचाई वाले इलाकों में भी काम करने में सक्षम होगा.
प्रोटोटाइप टैंक बनाने की अवधि
जानकारों के मुताबिक, मंत्रालय ने टेक्निकल और कमर्शियल बोलियों के मूल्यांकन वाली तीन साल की सिलेक्शन प्रोसेस के बाद TASL को शॉर्टलिस्ट किया है. अगले चरण में टाटा ग्रुप की इस कंपनी को 130 हफ्तों के अंदर दो प्रोटोटाइप टैंक बनाने और उनका प्रदर्शन करने का काम सौंपा जाएगा.
महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स बनाएगी प्रोटोटाइप
यह प्रोजेक्ट रक्षा मंत्रालय की ‘मेक 1’ पॉलिसी के तहत लागू किया जा रहा है, जो प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के लिए 70 फीसदी सरकारी फंडिंग की इजाजत देती है. दूसरे सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी, महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स को भी प्रोटोटाइप बनाने के लिए बुलाया जाएगा.
सिलेक्शन प्रोसेस पर जताई गई थी आपत्ति
हालांकि, पिछले साल TASL इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आई थी, लेकिन पता चला है कि एक कॉम्पिटिटर ने सिलेक्शन प्रोसेस पर आपत्ति जताई थी. सेना और रक्षा मंत्रालय की विस्तृत जांच के बाद, आपत्तियों को सही नहीं पाया गया और अब यह प्रोसेस प्रोडक्शन ऑर्डर (PO) जारी करने के चरण तक पहुंच गया है.
टाटा के लिए अहम पड़ाव
यह कदम टाटा के लिए एक अहम पड़ाव है, जिसने पहले सेना को टैक्टिकल ट्रक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल सप्लाई किए हैं. यह ट्रैक्ड, आर्मर्ड सिस्टम की ओर एक स्वाभाविक प्रगति भी है, क्योंकि टाटा ने स्वदेशी टरेट सिस्टम और खुद विकसित किए गए लॉइटरिंग म्यूनिशन के साथ टैंक की पेशकश की है.