टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर फिर गरमाया विवाद, SP ग्रुप ने बढ़ाया दबाव; बताया पब्लिक होना क्यों है जरूरी

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. SP ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी मिस्त्री ने इसे पारदर्शिता और बेहतर गवर्नेंस के लिए जरूरी बताया, जबकि टाटा समूह के भीतर ही इस मुद्दे पर मतभेद गहराते नजर आ रहे हैं. जानें पूरा मामला.

टाटा सन्स लिस्टिंग Image Credit: @AI

Tata Sons Listing and SP Group: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. शुक्रवार को शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा कि यह केवल नियमों का पालन करने का मामला नहीं है, बल्कि कॉरपोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम है.

मिस्त्री ने क्या कहा?

मिस्त्री ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस और तथ्यों पर आधारित तर्क सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि टाटा संस की लिस्टिंग से टाटा ट्रस्ट्स के हितों को नुकसान होगा या उनके सामाजिक कार्यों पर कोई नकारात्मक असर पड़ेगा. उनके मुताबिक, समय के साथ संस्थागत बदलाव जरूरी होते हैं और टाटा संस की लिस्टिंग उसी दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है, जो समूह के मूल मूल्यों को और मजबूत करेगी.

लिस्टिंग को लेकर क्या है अंदरूनी राय?

यह बयान ऐसे समय आया है, जब टाटा समूह के भीतर ही इस मुद्दे पर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं. जहां टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा लिस्टिंग के सख्त खिलाफ बताए जा रहे हैं, वहीं ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इसके समर्थन में खड़े हैं. इससे साफ है कि समूह के अंदर इस मुद्दे पर एकमत नहीं है. इस पूरे विवाद का एक अहम पहलू टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल से भी जुड़ गया है. 24 फरवरी को हुई बोर्ड मीटिंग में नोएल टाटा ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अगर टाटा संस को लिस्ट नहीं किया जाता, तभी चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है. इससे यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है.

आम जनता के लिए भी फायदेमंद होगी लिस्टिंग!

मिस्त्री ने लिस्टिंग को आम जनता और निवेशकों के हित से भी जोड़ा. उनका कहना है कि अगर टाटा संस पब्लिक कंपनी बनती है, तो इससे बोर्ड की जवाबदेही बढ़ेगी, निवेशकों का दायरा विस्तृत होगा और लंबे समय में सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए बेहतर वैल्यू तैयार होगी. साथ ही, इससे रिटेल निवेशकों को भी अवसर मिलेगा और टाटा ट्रस्ट्स के लिए डिविडेंड का एक अधिक स्पष्ट और स्थिर स्रोत बनेगा, जिससे उनके सामाजिक और परोपकारी कार्यों को और बल मिल सकता है.

उन्होंने यह भी बताया कि SP ग्रुप इस मुद्दे पर टाटा संस के नेतृत्व के साथ बातचीत जारी रखे हुए है, ताकि किसी सहमति पर पहुंचा जा सके. हालांकि, उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अब इस मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत है. मिस्त्री ने केंद्र सरकार और आरबीआई पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे इस मामले में संतुलित और उचित फैसला लेंगे.

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