फिर बढ़ सकता है क्रूड ऑयल का दाम? ईरान पर अमेरिका के नए हमले से बढ़ी टेंशन

अमेरिका के ईरान पर ताजा सैन्य हमलों और डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस तनाव का असर फिर से क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ेगा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और ऑयल सप्लाई पर संभावित जोखिम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो सकता है.

ईरान-अमेरिका Image Credit: Money9live

Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है. अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. इसके बाद ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने सीजफायर समझौते का उल्लंघन जारी रखा, तो उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है. इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक बार फिर क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी देखने को मिलेगी?

क्यों बढ़ी क्रूड ऑयल को लेकर चिंता

अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य कम्युनिकेशन नेटवर्क और तटीय रडार ठिकानों पर हमला किया है. यह कार्रवाई एक मर्चेंट वेसल पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई है. हालांकि, बाजार की सबसे बड़ी चिंता सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है. यह दुनिया का सबसे अहम ऑयल शिपिंग रूट माना जाता है, जहां से वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल और एलएनजी की सप्लाई होती है.

होर्मुज में तनाव बढ़ा, तो महंगा हो सकता है क्रूड ऑयल

हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कई जहाजों पर हमले हुए हैं. अमेरिका का आरोप है कि ईरान समर्थित तत्वों ने एक ऑयल टैंकर पर ड्रोन हमला किया, जबकि ईरान ने सीधे तौर पर इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. अगर इस जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है या सुरक्षा जोखिम बढ़ता है, तो ऑयल सप्लाई पर दबाव आ सकता है.

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह तनाव सीमित रहता है या फिर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और तेज होती है.

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी अनिश्चितता

हमलों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता, तो अमेरिका और सख्त सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इस बयान ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. दूसरी ओर, ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की आशंका बनी हुई है. यदि तनाव और बढ़ता है, तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है.

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