VB-G RAM G: ग्रामीण कमाई तो बढ़ेगी, लेकिन सरकार पर बढ़ेगा बोझ; कैश-ट्रांसफर स्कीम्स पर पड़ सकता है असर
VB-G RAM G: सिस्टमैटिक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका लंबे समय में क्या असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या राज्य सरकारें इस पर आने वाले भारी वित्तीय बोझ को उठा पाती हैं या नहीं.

‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM G) को हाल ही में लॉन्च किया गया है. यह ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) की जगह लेगा. इस मिशन के तहत 125 दिनों की रोजगार गारंटी और बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण आय में बढ़ोतरी का वादा किया गया है.
हालांकि, सिस्टमैटिक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका लंबे समय में क्या असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या राज्य सरकारें इस पर आने वाले भारी वित्तीय बोझ को उठा पाती हैं या नहीं.
10 फीसदी बढ़ी मजदूरी
न्यूज एजेंसी एएनआई ने सिस्टमैटिक्स रिसर्च के हवाले से बताया है कि बदली हुई स्कीम के तहत सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है और औसत रोजाना मजदूरी को लगभग 10 फीसदी बढ़ाकर 299 रुपये से 327 रुपये कर दिया गया है. उम्मीद है कि इन उपायों से लोगों की खरीदने की क्षमता मजबूत होगी और ग्रामीण इलाकों में मांग को सहारा मिलेगा, खासकर ऐसे समय में जब ग्रामीण मजदूरी और आय पर दबाव बना हुआ है.
स्ट्रक्चरल बदलाव
हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि स्कीम में किए गए स्ट्रक्चरल बदलाव इसकी कुल असर को कम कर सकते हैं. इसमें कहा गया है, ‘भारत की प्रमुख ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को नए सिरे से तैयार किया गया है. इसमें एक बड़ा वादा किया गया है – 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के काम की गारंटी, लेकिन इसके पीछे का ढांचा मूल रूप से अलग है, जो खुली मांग के बजाय केंद्र द्वारा तय की गई फंडिंग की लिमिट है.
राज्यों को उठाना होगा अधिक खर्च
रिपोर्ट में एक बड़ी चिंता यह बताई गई है कि फंडिंग की जिम्मेदारी केंद्र से राज्यों पर आ गई है. नए सिस्टम के तहत, अब ज्यादातर राज्यों को 60:40 के अनुपात (केंद्र-राज्य) में खर्च उठाना होगा, जबकि पहले की व्यवस्था में खर्च का ज्यादातर हिस्सा केंद्र उठाता था.
कितना अधिक पैसा करना पड़ सकता है खर्च?
रिपोर्ट के अनुमानों के मुताबिक, राज्य सरकारों को FY26 में लगभग 8,690 करोड़ रुपये के मुकाबले FY27 में करीब 35,300 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं, जिसका मतलब है कि उनके योगदान में चार गुना से अधिक की बढ़ोतरी होगी.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘FY27 के लिए अंतरिम आवंटन का अनुमान और FY14-FY26 का काउंटरफैक्चुअल विश्लेषण, दोनों एक ही बात की ओर इशारा करते हैं. VB-G RAM G को फंड देने के लिए राज्यों पर कुल बोझ, मौजूदा MGNREGA स्कीम के तहत उनके योगदान की तुलना में चार से पांच गुना तक बढ़ सकता है.
लेने पड़ सकते हैं मुश्किल फैसले
इसमें चेतावनी दी गई है कि जिन राज्यों के पास बजट की कमी है, उन्हें इस स्कीम के लिए पैसे जुटाने के लिए मुश्किल बजट फैसले लेने पड़ सकते हैं. इसके लिए उन्हें या तो रेवेन्यू खर्च बढ़ाना पड़ सकता है, कैपिटल खर्च कम करना पड़ सकता है या फिर दूसरे कल्याणकारी कार्यक्रमों में कटौती करनी पड़ सकती है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भले ही तय मजदूरी ज्यादा हो और रोजगार की गारंटी अधिक समय के लिए हो, लेकिन अगर फंड की कमी और रोजगार के घटते ट्रेंड की वजह से इसे लागू करने में दिक्कतें आती रहीं, तो ग्रामीण इलाकों में असल मांग में कोई खास सुधार नहीं हो पाएगा.
योजनाओं पर पड़ सकता है असर
इसमें आगे कहा गया कि ज्यादातर राज्यों की तंग आर्थिक स्थिति को देखते हुए, VB-G RAM G के लिए फंडिंग करने में बड़े समझौते करने पड़ सकते हैं. जैसे कि अतिरिक्त रेवेन्यू खर्च के लिए कैपिटल खर्च में कटौती करना या दूसरी कैश-ट्रांसफर योजनाओं को काफी कम करना.
हालांकि, रिपोर्ट में माना गया है कि इस स्कीम का मकसद मजबूत ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना और जवाबदेही बढ़ाना है, लेकिन इसमें यह भी कहा गया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करने में इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले सालों में फंडिंग मॉडल, राज्यों की आर्थिक स्थिति और इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियां कैसे बदलती हैं.