जॉब चेंज करने वाले सावधान! नौकरी बदलते ही खत्म हो सकता है हेल्थ इंश्योरेंस; इन 5 बातों का रखें ध्यान

नौकरी बदलते समय सैलरी और पद के साथ ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पर भी ध्यान देना जरूरी है. कंपनी की नौकरी खत्म होने के साथ ग्रुप हेल्थ कवर भी आमतौर पर समाप्त हो जाता है. नई कंपनी का इंश्योरेंस तुरंत शुरू होगा यह जरूरी नहीं है. इसलिए नौकरी बदलने से पहले पुरानी पॉलिसी की एंड डेट, पोर्टेबिलिटी, कंटिन्युटी और पेंडिंग क्लेम की जानकारी लें.

नौकरी बदलते समय सैलरी और पद के साथ ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पर भी ध्यान देना जरूरी है. Image Credit: money9live

नौकरी बदलना करियर ग्रोथ का सामान्य हिस्सा है, लेकिन इस दौरान हेल्थ इंश्योरेंस को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. ज्यादातर कंपनियां कर्मचारियों को ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा देती हैं. यह कवर कर्मचारी के साथ उसके परिवार के मेडिकल खर्च में भी मदद करता है. लेकिन नौकरी खत्म होने के साथ यह इंश्योरेंस भी आमतौर पर समाप्त हो जाता है. नई कंपनी में इंश्योरेंस शुरू होने में समय लग सकता है. ऐसे में कर्मचारी और उसका परिवार कुछ समय के लिए बिना हेल्थ कवर के रह सकता है.

क्यों खत्म हो जाता है हेल्थ कवर

Policybazaar for Business में एम्प्लॉई हेल्थ एंड बेनिफिट्स के बिजनेस हेड वैभव गंगराडे के मुताबिक, ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस कर्मचारी की नौकरी से जुड़ा होता है. यह कवर कर्मचारी के कंपनी में काम करने तक ही लागू रहता है. इस्तीफा स्वीकार होने या नोटिस पीरियड खत्म होने के बाद पॉलिसी बंद हो सकती है. ऐसे में नौकरी छोड़ने से पहले पॉलिसी की सही एंड डेट पता करना जरूरी है. HR से इसकी जानकारी पहले ही लेनी चाहिए. इससे नए और पुराने कवर के बीच गैप को समझने में मदद मिलेगी.

हेल्थ इंश्योरेंस तुरंत शुरू होगा या नहीं

नई कंपनी में ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा पिछली कंपनी जैसी हो, यह जरूरी नहीं है. कुछ कंपनियों में नया कवर जॉइन करने के तुरंत बाद शुरू हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में प्रक्रिया या तय नियम लागू हो सकते हैं. इसलिए नई कंपनी की हेल्थ पॉलिसी को जॉइन करने से पहले समझना बेहतर है. खासकर यह देखना चाहिए कि कवर कब से लागू होगा. अगर पुराने और नए कवर के बीच गैप है, तो उसकी पहले से योजना बनानी चाहिए.

पहले से मौजूद बीमारी का कवरेज देखें

नई कंपनी की हेल्थ पॉलिसी में कुछ बीमारियों और इलाज के लिए वेटिंग पीरियड हो सकता है. पहले से मौजूद बीमारी यानी प्री एग्जिस्टिंग कंडीशन के लिए भी अलग नियम हो सकते हैं. इसलिए नई पॉलिसी के नियमों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है. कर्मचारी को यह पता करना चाहिए कि परिवार के सदस्यों के लिए क्या कवरेज उपलब्ध है. इससे भविष्य में मेडिकल इमरजेंसी के समय क्लेम को लेकर परेशानी से बचा जा सकता है.

कंटिन्युटी का ऑप्शन जरूर पूछें

नौकरी बदलने से पहले कर्मचारी को यह जानकारी लेनी चाहिए कि मौजूदा ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस में पोर्टेबिलिटी या कंटिन्युटी का कोई विकल्प उपलब्ध है या नहीं. कुछ मामलों में एक्स एम्प्लॉई के लिए शॉर्ट टर्म कंटिन्युटी का विकल्प मिल सकता है. हालांकि यह सुविधा पॉलिसी और कंपनी के नियमों पर निर्भर करती है. इसलिए HR या इंश्योरेंस प्रोवाइडर से इसकी पुष्टि करना जरूरी है. केवल यह मान लेना सही नहीं है कि पुराना कवर अपने आप जारी रहेगा.

पेंडिंग क्लेम की जानकारी लें

अगर कर्मचारी का कोई हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम पहले से प्रोसेस में है, तो नौकरी छोड़ने से पहले उसकी स्थिति जरूर पता करनी चाहिए. HR या इंश्योरेंस टीम से पूछकर यह समझें कि नौकरी खत्म होने के बाद पेंडिंग क्लेम की प्रक्रिया पर क्या असर पडे़गा. जरूरी डॉक्यूमेंट और क्लेम से जुड़ी जानकारी अपने पास रखना भी फायदेमंद हो सकता है. इससे बाद में क्लेम को लेकर किसी तरह की परेशानी होने की संभावना कम होगी.

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परिवार और मैटरनिटी कवर भी देखें

नई कंपनी जॉइन करने से पहले केवल अपना कवर देखना पर्याप्त नहीं है. कर्मचारी को यह भी जांचना चाहिए कि पति या पत्नी, बच्चों और अन्य डिपेंडेंट के लिए कितना कवरेज उपलब्ध है. अगर परिवार की योजना के लिए मैटरनिटी बेनिफिट जरूरी है, तो उसके नियम और वेटिंग पीरियड जरूर देखें. पॉलिसी की कवरेज लिमिट और जरूरी शर्तों को समझना भी महत्वपूर्ण है. एक्सपर्ट की सलाह है कि नौकरी बदलते समय हेल्थ इंश्योरेंस को सैलरी और डेजिगनेशन जितना ही महत्व दिया जाए.