कंपनी की हेल्थ पॉलिसी छोड़कर लेना है पर्सनल प्लान , तो ऐसे करें बदलाव; जानें IRDAI के नियम

हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी की मदद से पॉलिसीधारक अपनी बीमा कंपनी बदल सकते हैं और नो क्लेम बोनस तथा वेटिंग पीरियड जैसे लाभ बरकरार रख सकते हैं. आईआरडीएआई के नियमों के अनुसार ग्रुप हेल्थ पॉलिसीधारक भी अंततः पर्सनल हेल्थ पॉलिसी में जा सकते हैं.

हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी. Image Credit: money9live

Health Insurance Portability: हेल्थ इंश्योरेंस आज हर परिवार की जरूरत बन चुका है. ऐसे में बेहतर सुविधाओं और कवरेज के लिए लोग अपनी बीमा कंपनी बदलने का विकल्प भी तलाशते हैं. हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी की सुविधा पॉलिसीधारकों को बिना पुराने लाभ गंवाए नई कंपनी में जाने का अवसर देती है. कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस को पर्सनल हेल्थ पॉलिसी में बदला जा सकता है. बीमा रेगुलेटर के नियम इस संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश देते हैं.

क्या होती है हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी

हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी का मतलब है कि कोई व्यक्ति अपनी मौजूदा बीमा कंपनी को बदलकर दूसरी कंपनी की पॉलिसी ले सकता है. इस प्रक्रिया में उसे नो क्लेम बोनस, फ्री हेल्थ चेकअप और वेटिंग पीरियड जैसे कई लाभों का फायदा मिलता रहता है. इससे बेहतर कवरेज और सुविधाओं वाली योजना चुनना आसान हो जाता है.

कौन कर सकता है पोर्टेबिलिटी का उपयोग

बीमा रेगुलेटर के नियमों के अनुसार पर्सनल, फैमिली फ्लोटर और ग्रुप हेल्थ पॉलिसीधारक पोर्टेबिलिटी के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए मौजूदा पॉलिसी का बिना किसी रुकावट के नवीनीकरण होना जरूरी है. साथ ही पॉलिसीधारक को कम से कम एक साल तक मौजूदा बीमा कंपनी के साथ रहना अनिवार्य है.

पोर्टेबिलिटी के लिए समय सीमा का रखें ध्यान

पोर्टेबिलिटी केवल पॉलिसी के रिन्यूअल के समय ही की जा सकती है. पॉलिसीधारक को नई बीमा कंपनी के पास कम से कम 45 दिन पहले आवेदन देना होता है. नई कंपनी को 15 दिन के भीतर आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करना होता है. यदि तय समय में जवाब नहीं दिया जाता तो आवेदन स्वतः स्वीकार माना जाता है.

क्या ग्रुप पॉलिसी को पर्सनल योजना में बदल सकते हैं

नियमों के अनुसार ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस रखने वाला व्यक्ति सीधे दूसरी कंपनी की पर्सनल पॉलिसी में नहीं जा सकता. सबसे पहले उसे अपनी मौजूदा बीमा कंपनी के साथ ग्रुप पॉलिसी को पर्सनल या फैमिली पॉलिसी में बदलना होगा. इसके बाद कम से कम एक वर्ष तक पर्सनल पॉलिसी जारी रखने पर दूसरी कंपनी में पोर्ट कराया जा सकता है.

ग्रुप पॉलिसी से पर्सनल योजना में बदलाव की प्रक्रिया

पॉलिसीधारक को ग्रुप पॉलिसी समाप्त होने से 30 से 45 दिन पहले बीमा कंपनी को सूचित करना होगा. इसके बाद पर्सनल प्लान का चयन कर आवेदन फॉर्म भरना होगा. कंपनी आवश्यक डॉक्यूमेंट और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मांग सकती है. आवेदन समय पर जमा करने के बाद पर्सनल पॉलिसी जारी की जाती है.

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पोर्टेबिलिटी के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट

पोर्टेबिलिटी आवेदन के लिए पिछले वर्षों के पॉलिसी प्रमाण पत्र, लेटेस्ट रिन्यूएबल डॉक्यूमेंट, नो क्लेम की सेल्फ डिक्लेरेशन और यदि कोई क्लेम किया गया हो तो उससे जुड़े मेडिकल डॉक्यूमेंट जमा करने होते हैं. सही और पूर्ण डॉक्यूमेंट देने से आवेदन की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सकती है.