सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस काफी नहीं! Bandhan Life CEO ने बताया क्यों जरूरी है क्रिटिकल इलनेस कवर और टर्म प्लान

भारत में लाइफ इंश्योरेंस को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन अब भी बड़ी आबादी के पास पर्याप्त सुरक्षा कवर नहीं है. बंधन लाइफ के एमडी और सीईओ सतीश्वर बी ने Money9 से खास बातचीत में बताया कि क्यों टर्म प्लान हर परिवार की जरूरत है, कितना लाइफ कवर होना चाहिए, हेल्थ और क्रिटिकल इलनेस कवर में क्या फर्क है और कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म बीमा सेक्टर को बदल रहे हैं.

हेल्थ इंश्योरेंश Image Credit: canva

कोविड महामारी के बाद भारत में जीवन बीमा को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदली है. अब बीमा को सिर्फ टैक्स बचाने या निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जाने लगा है. बावजूद इसके, देश में अब भी बड़ी आबादी ऐसी है जिसके पास पर्याप्त लाइफ कवर नहीं है. दूसरी तरफ, युवा ग्राहक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं और बीमा कंपनियां भी टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक और इंश्योरटेक साझेदारियों के जरिए अपने मॉडल को बदल रही हैं.

ऐसे समय में जीवन बीमा उद्योग किन बदलावों से गुजर रहा है, ग्राहक क्या गलतियां करते हैं, कितना लाइफ कवर होना चाहिए और आने वाले समय में इस सेक्टर की दिशा क्या रहने वाली है, इन सभी मुद्दों पर Money9 Live ने बंधन लाइफ के एमडी और सीईओ सतीश्वर बी से खास बातचीत की. बातचीत में उन्होंने बीमा उत्पादों के बदलते ट्रेंड, हेल्थ और क्रिटिकल इलनेस कवर के फर्क, डिजिटल इंश्योरेंस, मार्केट रणनीति और निवेशकों-ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह साझा की.

  1. जीवन बीमा उत्पादों को लेकर मौजूदा उपभोक्ताओं का रुझान कैसा है? क्या यह साल-दर-साल बढ़ रहा है? और बंधन लाइफ में प्योर प्रोटेक्शन, यूलिप और अन्य उत्पादों की हिस्सेदारी कितनी है?

जीवन बीमा को लेकर उपभोक्ताओं का रुझान धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है, खासकर महामारी के बाद, जिसने वित्तीय सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाई. हालांकि, जागरूकता और खरीद के बीच अब भी बड़ा अंतर है.
भारत में यूलिप और पारंपरिक एंडोमेंट प्लान जैसे बचत और निवेश वाले उत्पादों की ओर झुकाव बना हुआ है, जबकि प्योर प्रोटेक्शन उत्पादों की हिस्सेदारी अभी भी कम है. मेरे विचार से यह बदलना चाहिए. किसी भी बीमा योजना की नींव सुरक्षा होनी चाहिए.

बंधन लाइफ में एपीई के आधार पर यूलिप की हिस्सेदारी करीब 30% है. बेची गई पॉलिसियों की संख्या के आधार पर करीब 20% प्योर प्रोटेक्शन प्लान हैं.

  1. हेल्थ और क्रिटिकल इलनेस कवर कई बीमा कंपनियां देती हैं. इनमें मुख्य फर्क क्या है, और उपभोक्ताओं को क्या चुनना चाहिए?

जीवन बीमा कंपनियां आम तौर पर क्रिटिकल इलनेस राइडर या अलग से मिलने वाला लाभ देती हैं, जिसमें किसी गंभीर बीमारी के निदान पर एकमुश्त रकम दी जाती है. दूसरी तरफ, जनरल या स्टैंडअलोन हेल्थ बीमा कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां अस्पताल में भर्ती होने और इलाज के खर्च को कवर करती हैं.

दोनों का उद्देश्य अलग है और इन्हें एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. आदर्श रूप से, ग्राहक के पास चिकित्सा खर्चों को कवर करने के लिए एक व्यापक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होनी चाहिए, और गंभीर बीमारी के बाद आय में कमी और जीवनशैली में बदलाव को संभालने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहारा के रूप में क्रिटिकल इलनेस कवर पर भी विचार करना चाहिए.

  1. जीवन बीमा पॉलिसी खरीदते समय किसी व्यक्ति को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आमतौर पर कोई व्यक्ति किसी जीवन-घटना के कारण जीवन बीमा पॉलिसी देखना शुरू करता है, जैसे बच्चे का जन्म, बड़ा कर्ज लेना, परिवार में किसी की या किसी दोस्त की मृत्यु आदि. ऐसे हर मामले में व्यक्ति को अपना उद्देश्य साफ रखना चाहिए. जैसे बच्चे के लिए वह बच्चे के वित्तीय भविष्य की सुरक्षा चाहता है, और लोन के लिए यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अगर उस व्यक्ति को कुछ हो जाए तो वह लोन परिवार पर बोझ न बन जाए.

जब उद्देश्य साफ हो जाता है, तो उस उद्देश्य को पूरा करने वाला सही उत्पाद चुनना आसान हो जाता है. जीवन बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर हर उत्पाद के लिए केएफडी यानी की फीचर डॉक्‍यूमेंट होता है, जिसे देखकर उत्पाद की संक्षिप्त जानकारी ली जा सकती है.
उतना ही जरूरी यह है कि आवेदन फॉर्म भरते समय पूरी ईमानदारी बरती जाए. स्वास्थ्य से जुड़ी बातों या जीवनशैली की आदतों की जानकारी छिपाने से बाद में परिवार के दावे में दिक्कत आ सकती है.

  1. बाजार में 26 खिलाड़ी हैं, ऐसे में बंधन लाइफ की स्थिति क्या है, और आप मार्केट शेयर कैसे बढ़ा रहे हैं?

जीवन बीमा उद्योग बहुत प्रतिस्पर्धी है, लेकिन अभी भी इसकी पहुंच कम है. इसका मतलब है कि सभी खिलाड़ियों के लिए बढ़ने का काफी मौका है.
बंधन लाइफ में हमारा ध्यान एक अलग पहचान वाली, भरोसे पर आधारित फ्रेंचाइज़ी बनाने पर है. हम बंधन इकोसिस्टम के मज़बूत नेटवर्क का इस्तेमाल करके अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं. हमारा तरीका जिम्मेदारी के साथ बढ़ने का है, जिसमें ग्राहक की ज़रूरतें, सरल उत्पाद और लगातार सेवा पर ध्यान रहता है, न कि गुणवत्ता को नज़रअंदाज़ करके सिर्फ बड़ा होने पर.
 

  1. किसी व्यक्ति के पास जीवन बीमा कवर कितना होना चाहिए? आप किन राइडर्स की सलाह देंगे?

सही जीवन बीमा कवर निकालने के कई तरीके हैं. एक सामान्य नियम है आपकी सालाना आय का 10-15 गुना. लेकिन एक ज्यादा व्यावहारिक तरीका है कि आपकी मौजूदा आय को उन सालों की संख्या से गुणा करें, जितने साल आप काम करने की योजना बना रहे हैं.

उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र 35 साल है, सालाना कमाई 10 लाख रुपये है, और आप 60 साल की उम्र में रिटायर होने की योजना बना रहे हैं, तो आपके पास करीब 25 कामकाजी साल बचे हैं. ऐसे में करीब 2.5 करोड़ रुपये के जीवन बीमा कवर का सुझाव मिलता है. फिर आप अपनी संपत्तियों और कर्ज़ के आधार पर इसे समायोजित कर सकते हैं. बाजार में कई जटिल कैलकुलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन यह सरल तरीका एक साफ और यथार्थवादी शुरुआती बिंदु देता है, खासकर पहली बार खरीदने वालों और युवा कमाने वालों के लिए. बाजार में बंधन लाइफ समेत अधिकतर टर्म प्लान इसी स्तर का कवर देते हैं.

राइडर्स में तीन मुख्य सुझाव हैं: एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट, क्रिटिकल इलनेस और वेवर ऑफ प्रीमियम. ये अपेक्षाकृत कम लागत पर अतिरिक्त सुरक्षा देते हैं.

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  1. युवा उपभोक्ता डिजिटल प्लेटफॉर्म पसंद करते हैं. कौन से उत्पाद ऑनलाइन खरीदे जा सकते हैं? क्या आपके पास इंश्‍योरटेक साझेदारियां हैं?

डिजिटल एक लगातार महत्वपूर्ण चैनल बनता जा रहा है, खासकर उन युवा उपभोक्ताओं के लिए जो सुविधा और पारदर्शिता को महत्व देते हैं. हम अपनी डिजिटल सुविधाओं को लगातार मजबूत कर रहे हैं, ताकि ग्राहक आसानी से ऑनलाइन पॉलिसी देख और खरीद सकें.

डिजिटल अंडरराइटिंग, प्लग-एंड-प्ले टेक स्टैक और जीरो पेपरवर्क जैसी सुविधाओं के साथ हमारी डिजिटल सुविधाओं ने हमें हमेशा अलग दिखाया है. हमारा लक्ष्य बीमा को सरल बनाना, समग्र ग्राहक अनुभव को बेहतर करना और इसे ज्यादा सुलभ तथा समझने में आसान बनाना है.

इस विज़न को आगे बढ़ाने के लिए हम इंश्‍योरटेक, हेल्थटेक, ई-कॉमर्स और एडटेक कंपनियों के साथ सहयोग जारी रखते हैं, जैसा हम पहले भी करते आए हैं, ताकि अपने ग्राहकों के लिए और ज्यादा नवाचार और सुविधा ला सकें.