Marine Insurance: ईरान को टोल देने पर खत्म हो सकता है जहाज का बीमा, जानें क्या है LMA 5708
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के मरीन इंश्योरेंस पर LMA 5708 शर्त का असर पड़ सकता है. जुलाई 2026 में पेश की गई इस शर्त के तहत, बीमित जहाज के ईरान को टोल या किसी अन्य तरह का पेमेंट करने पर बीमा कवर प्रभावित हो सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए मरीन इंश्योरेंस लेना अब एक नई शर्त के चलते ज्यादा पेचीदा हो सकता है. लंदन मार्केट ने जुलाई 2026 में LMA 5708 नाम की शर्त पेश की है. इसके तहत, अगर बीमित जहाज होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को टोल, शुल्क या किसी अन्य तरह का पेमेंट करता है, तो उसका मरीन इंश्योरेंस कवर खत्म होने का रिस्क है. इसका असर जहाज मालिकों के साथ-साथ उन कारोबारियों पर भी पड़ सकता है, जो इस समुद्री रास्ते से अपना माल भेजते हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर LMA 5708 क्या है और यह मरीन इंश्योरेंस को कैसे प्रभावित करती है?
क्या है LMA 5708 की शर्त?
LMA 5708 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रांजिट फीस कंडीशन कहा जाता है. इसे जहाजों की हल इंश्योरेंस और वॉर इंश्योरेंस पॉलिसी में शामिल किया जा सकता है. इस शर्त के मुताबिक, बीमित जहाज को होर्मुज स्ट्रेट या ईरान के क्षेत्रीय जल से गुजरने के बदले ईरान को सीधे या परोक्ष रूप से कोई टोल, शुल्क या अन्य आर्थिक अथवा गैर-आर्थिक पेमेंट नहीं करना चाहिए.
यानी मामला सिर्फ नकद टोल देने तक सीमित नहीं है. शर्त में किसी भी तरह के आर्थिक या गैर-आर्थिक पेमेंट का जिक्र है. अगर पॉलिसी में LMA 5708 लागू है और इस तरह के पेमेंट की पुष्टि होती है, तो बीमा कंपनी संबंधित जहाज के लिए अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो सकती है.
कैसे खत्म हो सकता है बीमा कवर?
Policybazaar for Business में मरीन इंश्योरेंस के प्रमुख बालासुंदरम आर के मुताबिक, इस शर्त का उल्लंघन होने पर दो बड़े असर हो सकते हैं. पहला, ईरान को दिए गए शुल्क की रकम का दावा बीमा के तहत नहीं किया जा सकेगा. दूसरा, बीमाकर्ता और पुनर्बीमाकर्ता संबंधित जहाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त हो सकते हैं.
बालासुंदरम ने कहा, “अगर यह पता चलता है कि इस तरह का कोई शुल्क या पेमेंट किया गया है, तो उसका दावा बीमा के तहत नहीं किया जा सकेगा. साथ ही, बीमाकर्ता और पुनर्बीमाकर्ता संबंधित जहाज के संबंध में अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त हो सकते हैं.”
इसका मतलब है कि अगर किसी जहाज की पॉलिसी में यह शर्त लागू है, तो ईरान को पेमेंट करने का फैसला केवल टोल खर्च तक सीमित नहीं रहेगा. इससे जहाज के बीमा कवर पर भी गंभीर असर पड़ सकता है. हालांकि, वास्तविक कवरेज पॉलिसी में शामिल शर्तों और उनके शब्दों पर निर्भर करेगा.
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क्या यह समुद्री रिस्क से ज्यादा प्रतिबंधों का मामला है?
एक्सपर्ट के मुताबिक, LMA 5708 सीधे तौर पर समुद्री रिस्क बढ़ने से संबंधित शर्त नहीं है. इसे प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने जैसी व्यवस्था के तौर पर देखा जा सकता है. यानी जहाज के लिए समुद्र में खतरा कितना है, इसके अलावा यह भी अहम हो जाता है कि होर्मुज से गुजरने के दौरान ईरान को किसी तरह का पेमेंट किया गया है या नहीं.
यही वजह है कि जहाज मालिकों और बीमा कंपनियों के लिए पॉलिसी की शर्तों को समझना जरूरी है. सिर्फ मरीन या वॉर-रिस्क इंश्योरेंस खरीद लेना पर्याप्त नहीं हो सकता, यदि पॉलिसी में शामिल शर्तों का उल्लंघन होने पर कवरेज प्रभावित हो जाए.
भारतीय आयातकों और निर्यातकों पर क्या होगा असर?
होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी मात्रा में समुद्री व्यापार गुजरता है. इस रास्ते से माल भेजने वाले भारतीय आयातकों और निर्यातकों के लिए भी LMA 5708 चिंता का विषय हो सकती है. अगर माल ले जाने वाले जहाज की बीमा पॉलिसी में यह शर्त लागू है और उसका उल्लंघन होता है, तो जहाज से जुड़े बीमा कवर को लेकर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.
कार्गो इंश्योरेंस पर असर को लेकर भी सवाल हैं. बालासुंदरम के मुताबिक, अगर माल ले जाने वाले जहाज से जुड़ी पॉलिसी में LMA 5708 लागू होती है, तो कार्गो कवर पर भी असर पड़ने की आशंका हो सकती है. हालांकि, यह असर अपने आप लागू नहीं माना जा सकता. कार्गो पॉलिसी की अलग शर्तें देखना जरूरी होगा.