India China Trade: चीन की पाबंदियों से भारतीय निर्यात पर असर, 100 अरब डॉलर के पार हुआ ट्रेड डेफिसिट
भारत और चीन के बीच व्यापारिक असंतुलन बढ़ता जा रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, इस साल अब तक चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. उन्होंने चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच में बाधा डालने वाली गैर-टैरिफ पाबंदियों को व्यापार की बड़ी चुनौती बताया. जेनेरिक दवाओं, बीफ और सब्जियों के निर्यात में मुश्किलों के साथ भारत ASEAN व्यापार समझौते में बदलाव भी चाहता है.
Highlights
- चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा इस साल अब तक 100 अरब डॉलर से अधिक हुआ.
- निर्मला सीतारमण ने गैर-टैरिफ बाधाओं को व्यापार की बड़ी रुकावट बताया.
- भारत ASEAN व्यापार समझौते की शर्तों में बदलाव चाहता है.
भारत और चीन के बीच ट्रेड बैलैंस लगातार बढ़ रहा है. भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा इस साल अब तक 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चीन की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाई जाने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दोनों देशों के बीच व्यापार की सबसे बड़ी रुकावट बताया है. उन्होंने कहा कि जेनेरिक दवाओं, बीफ और सब्जियों जैसे भारतीय उत्पादों में चीनी बाजार में बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन कई तरह के नियमों और पाबंदियों के कारण भारतीय निर्यातकों को बाजार तक पहुंच बनाने में मुश्किल हो रही है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और चीन कूटनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत के लिए बड़ी चुनौती
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की बैठक से इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत के दौरान भारत-चीन व्यापार का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार संतुलन लगातार बिगड़ रहा है और व्यापार घाटा तेजी से बढ़ रहा है.
सीतारमण के मुताबिक, चीन गैर-टैरिफ बाधाओं का व्यापक इस्तेमाल करता है. उनके अनुसार, ये पाबंदियां दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में सबसे बड़ी रुकावट हैं. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने चीनी वस्तुओं पर जवाबी गैर-टैरिफ प्रतिबंध या काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने से परहेज किया है.
100 अरब डॉलर के व्यापार घाटा
भारत का चीन से आयात उसकी तुलना में चीन को होने वाले निर्यात से काफी ज्यादा है. वित्त मंत्री के मुताबिक, इस साल अब तक चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. यह अंतर भारत और चीन के बीच व्यापार में बढ़ते असंतुलन को दिखाता है.
व्यापार घाटा तब होता है, जब कोई देश दूसरे देश से जितने मूल्य का सामान आयात करता है, उससे कम मूल्य का सामान निर्यात करता है. भारत के मामले में चीन से बड़े पैमाने पर आयात और भारतीय उत्पादों को चीनी बाजार में पहुंचने में आने वाली बाधाएं इस असंतुलन की अहम वजहों में शामिल हैं.
दवाओं और सब्जियों के निर्यात में भी अड़चन
सीतारमण ने कहा कि भारतीय उत्पादों के लिए चीन में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन कई तरह की व्यापारिक बाधाओं के कारण उनका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने जेनेरिक दवाओं, बीफ और सब्जियों का उदाहरण दिया.
वित्त मंत्री ने खास तौर पर फाइटोसैनिटरी नियमों का जिक्र किया. इन नियमों का उद्देश्य पौधों और कृषि उत्पादों के जरिए फैलने वाले कीटों और बीमारियों को रोकना है. हालांकि, इन नियमों और अन्य गैर-टैरिफ शर्तों के कारण भारतीय निर्यातकों के लिए चीनी बाजार में पहुंच बनाना मुश्किल हो सकता है.
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भारत को चीन में नहीं मिल रहा समान अवसर
भारत-चीन व्यापार को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इसी सप्ताह चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि चीन में भारत को समान अवसर नहीं मिल रहे हैं. वित्त मंत्री की टिप्पणी भी इसी मुद्दे को आगे बढ़ाती है कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए बाजार तक पहुंच से जुड़ी बाधाओं को दूर करना जरूरी है.
दोनों देशों के संबंध 2020 में सीमा पर हुई हिंसक झड़प के बाद तनावपूर्ण हो गए थे. इसके बाद चीन के निवेश और कारोबारी गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियां भी लगाई गईं. हाल के समय में भारत और चीन ने सीमा पर तनाव कम करने और उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत बहाल करने की दिशा में कदम उठाए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं.
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