सरकार ने IPO के बदले नियम, अब बड़ी कंपनियां कम शेयर के साथ भी हो सकेंगी लिस्ट
केंद्र सरकार ने मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों में बदलाव कर बड़े और मेगा IPO के लिए नई टियर प्रणाली लागू कर दी है. नए नियमों के तहत बड़ी कंपनियां लिस्टिंग के समय कम प्रतिशत शेयर पब्लिक को ऑफर कर सकेंगी, लेकिन समय के साथ हिस्सेदारी को 25% तक बढ़ाना जरूरी होगा.
IPO rules changed: शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों के IPO को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय ने सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन अमेंडमेंट नियम 2026 जारी कर नए नियम लागू किए हैं. इस बदलाव के तहत अब बड़ी कंपनियां कम शेयर बेचकर भी आसानी से शेयर बाजार में लिस्ट हो सकेंगी. हालांकि इस दौरान एक और अहम चीज यह होगी कि समय के साथ उनकी पब्लिक शेयरहोल्डिंग को 25 प्रतिशत तक बढ़ाना अनिवार्य रहेगा.
क्या हैं नए नियम?
- नए नियमों के तहत अब कंपनियों के पोस्ट-इश्यू कैपिटल के आधार पर पब्लिक शेयर ऑफर करने का एक नया टियर सिस्टम लागू किया गया है.
- 1600 करोड़ रुपये तक की पोस्ट-इश्यू कैपिटल वाली कंपनियों को पहले की तरह कम से कम 25 प्रतिशत शेयर पब्लिक को ऑफर करने होंगे.
- 1600 करोड़ से 4000 करोड़ रुपये तक की कंपनियों को कम से कम 400 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर पब्लिक को ऑफर करने होंगे.
- 4000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये तक की कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 10 प्रतिशत शेयर पब्लिक को देने होंगे और 3 साल में इसे 25 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा.
बड़ी कंपनियों को मिली राहत
IPO को लेकर सबसे ज्यादा राहत बड़ी कंपनियों को दी गई है. 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक की कंपनियों को कम से कम 1000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर और कम से कम 8 प्रतिशत हिस्सेदारी पब्लिक को देनी होगी. इन कंपनियों को 5 साल के भीतर पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25 प्रतिशत तक बढ़ानी होगी.
मेगा कंपनियों के लिए अलग नियम
- बहुत बड़ी कंपनियों के लिए और भी ज्यादा लचीलापन अपनाया गया है. इसके तहत 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये तक की कंपनियों को कम से कम 6,250 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर करने होंगे और 2.75 प्रतिशत पब्लिक हिस्सेदारी रखनी होगी.
- 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पोस्ट-इश्यू कैपिटल वाली कंपनियों को 15,000 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर करने होंगे और कम से कम 1 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग रखनी होगी.
- अगर लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 प्रतिशत से कम रहती है तो कंपनियों को 5 साल में 15 प्रतिशत और 10 साल में 25 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा.
SVR शेयरों पर भी नया नियम
जिन कंपनियों ने प्रमोटर्स या फाउंडर्स को सुपीरियर वोटिंग राइट्स (SVR) वाले शेयर दिए हैं, उन्हें भी IPO के समय सामान्य शेयरों के साथ उसी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करना होगा.
पुरानी कंपनियों को भी मिलेगा फायदा
सरकार ने साफ किया है कि ये समयसीमा उन कंपनियों पर भी लागू होगी जो इस संशोधन से पहले लिस्ट हो चुकी हैं. हालांकि यदि किसी कंपनी ने पहले पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का उल्लंघन किया है तो स्टॉक एक्सचेंज जुर्माना या पेनल्टी लगा सकते हैं.
