5 जून को खुल रहा Hexagon Nutrition IPO, निवेशकों को इन बातों से रहना चाहिए सावधान? जानें डिटेल

Hexagon Nutrition का 139 करोड़ रुपये का IPO 5 जून को खुलेगा. कंपनी हेल्थकेयर सेक्टर में काम करती है, लेकिन निवेश से पहले इससे जुडे़ जोखिमों को समझना जरूरी है. कंपनी की इनकम का बड़ा हिस्सा प्रीमिक्स बिजनेस से आता है और इसका कारोबार 70 से अधिक देशों में फैला है.

Hexagon Nutrition का IPO 5 जून को खुलेगा. Image Credit: money9live

Hexagon Nutrition का IPO 5 जून को निवेशकों के लिए खुलेगा और 9 जून को बंद होगा. 139 करोड़ रुपये के इस IPO का प्राइस बैंड 42 से 45 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. कंपनी हेल्थकेयर सेक्टर में काम करती है और 70 से अधिक देशों में कारोबार करती है. हालांकि किसी भी IPO में निवेश से पहले उससे जुड़े रिस्क को समझना बेहद जरूरी होता है. Hexagon Nutrition के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में भी कई ऐसे जोखिम बताए गए हैं जो भविष्य में कंपनी के कारोबार और मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं. आइए जानते हैं पांच सबसे बड़े जोखिम.

एक ही कारोबार पर ज्यादा निर्भरता

Groww की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की इनकम का सबसे बडा हिस्सा प्रीमिक्स फॉर्मुलेशन बिजनेस से आता है. दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में इस सेगमेंट का योगदान टोटल रेवेन्यू का 51 फीसदी से अधिक रहा. यदि इस कारोबार में मांग घटती है, कंपटीशन बढ़ती है या कीमतों पर दबाव आता है तो कंपनी की कमाई प्रभावित हो सकती है. किसी एक बिजनेस पर अत्यधिक निर्भरता निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क मानी जाती है.

विदेशी कारोबार और करेंसी उतार- चढाव

Hexagon Nutrition का कारोबार 70 से अधिक देशों में फैला हुआ है. ऐसे में फॉरेन करेंसी एक्सचेंज रेट में बदलाव का सीधा असर कंपनी की इनकम और लागत पर पड़ सकता है. रुपये के मजबूत होने से निर्यात इनकम कम हो सकती है जबकि रुपये के कमजोर होने पर इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ सकती है. इससे कंपनी के मार्जिन और मुनाफे पर दबाव बन सकता है.

घाटे में चल रही विदेशी सब्सिडियरी कंपनियां

कंपनी की कुछ विदेशी सब्सिडियरी यूनिट लगातार घाटे में चल रही हैं. यदि इनका प्रदर्शन नहीं सुधरता तो मुख्य कंपनी को अतिरिक्त कैपिटल लगानी पड़ सकती है. इससे कैश फ्लो प्रभावित हो सकता है और रिसोर्सेस पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है. निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण रिस्क माना जा रहा है.

कच्चे माल की कीमतों पर निर्भरता

कंपनी विटामिन, व्हे प्रोटीन, लैक्टोज और अन्य न्यूट्रिशन प्रोडक्ट सामग पर निर्भर है. यदि इन कच्चे माल की कीमतों में तेजी आती है या सप्लाई चेन में कोई बाधा आती है तो प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में कंपनी के लिए मुनाफा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. ग्लोबल कमोडिटी बाजार में उतार -चढ़ाव भी इस जोखिम को बढ़ाता है.

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कानूनी मामले और मुनाफे की स्थिरता

कंपनी, उसके प्रमोटर और मैनेजमेंट से जुड़े कुछ कानूनी मामले चल रहे हैं. यदि इनका फैसला प्रतिकूल आता है तो वित्तीय और प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान हो सकता है. इसके अलावा हाल के वर्षों में कंपनी के मुनाफे में तेज सुधार देखने को मिला है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह रफ्तार आगे भी जारी रहे.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.