IPO बूम में इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की बल्ले-बल्ले, 9 महीने में कमाए ₹2274 करोड़, NSE से मिला सबसे ज्यादा फीस

IPO बाजार में जारी तेजी का फायदा इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को भी मिल रहा है. जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान 81 Mainboard IPO को मैनेज करके इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ने करीब ₹2,274 करोड़ की फीस कमाई. इन IPO के जरिए कंपनियों ने ₹1.05 लाख करोड़ जुटाए. पिछले साल इसी अवधि में 74 IPO से करीब ₹2,238 करोड़ फीस मिली थी.

इन IPO के जरिए कंपनियों ने कुल ₹1.05 लाख करोड़ जुटाए. Image Credit: money9live

IPO बाजार में आई तेजी का फायदा सिर्फ कंपनियों और निवेशकों को ही नहीं मिल रहा है, बल्कि इन्वेस्टमेंट बैंकर्स भी इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बैंक ने 81 मेनबोर्ड IPO को संभाला. इन IPO के जरिए कंपनियों ने कुल ₹1.05 लाख करोड़ जुटाए. इस दौरान इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ने फीस के तौर पर करीब ₹2274 करोड़ कमाए.

पिछले साल की इसी अवधि से तुलना करें तो इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की कमाई में ज्यादा बड़ा बदलाव नहीं आया है. जनवरी-सितंबर 2025 में उन्होंने 74 IPO को संभालकर करीब ₹2238 करोड़ की फीस कमाई थी. हालांकि, इस दौरान IPO की संख्या और जुटाई गई रकम दोनों 2025 के मुकाबले ज्यादा रही.

9 महीने में 81 IPO से ₹2274 करोड़ की फीस

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान 81 मेनबोर्ड IPO आए. इन इश्यू के जरिए कंपनियों ने करीब ₹1.05 लाख करोड़ जुटाए. इन IPO को संभालने वाले इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को कुल ₹2274 करोड़ की फीस मिली.

वहीं, जनवरी-सितंबर 2025 में 74 IPO के जरिए ₹85256 करोड़ जुटाए गए थे. इन IPO से इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ने करीब ₹2238 करोड़ की फीस कमाई थी. यानी इस साल IPO की संख्या और कुल इश्यू साइज बढ़ने के बावजूद फीस में सीमित बढ़ोतरी हुई है.

IPO से बैंकर्स को सबसे ज्यादा फीस

कुल रकम के हिसाब से NSE के IPO से इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को सबसे ज्यादा फीस मिली. NSE के मामले में यह फीस करीब ₹186 करोड़ रही, जो उसके IPO के इश्यू आकार का 0.82 फीसदी थी.

इसके बाद Manipal Health Enterprises का नंबर रहा. कंपनी के IPO से इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को करीब ₹165.94 करोड़ की फीस मिली. यह उसके इश्यू आकार का करीब 1.8 फीसदी थी.

Dhoot Transmission ने करीब ₹86 करोड़ और Fractal Analytics ने करीब ₹71.1 करोड़ की फीस दी. यह उनके इश्यू आकार का क्रमश 2.8 फीसदी और 2.5 फीसदी था.

कुछ IPO में फीस 15 फीसदी से ज्यादा

इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की फीस हर IPO में एक जैसी नहीं रही. 2026 में अब तक यह फीस इश्यू साइज के 0.05 फीसदी से लेकर 15.6 फीसदी तक रही है.

SBI Funds Management के ₹9,796 करोड़ के IPO में इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की फीस इश्यू साइज का सिर्फ 0.05 फीसदी रही. वहीं Innovision के ₹319.25 करोड़ के IPO में यह फीस 15.6 फीसदी तक पहुंच गई.

2026 में अब तक इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की औसत फीस करीब 3 से 4 फीसदी रही है. इससे पता चलता है कि IPO का आकार बढ़ने या घटने के साथ फीस का फीसदी काफी बदल सकता है.

छोटे IPO में फीस परसेंटेज ज्यादा क्यों?

इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फीस को सिर्फ IPO से जुटाई गई रकम के आधार पर नहीं देखा जा सकता. फीस की स्ट्रक्चर में तय फीस और जीएसटी जैसे कई हिस्से शामिल होते हैं.

जानकारों के मुताबिक, IPO का साइज कम होने पर तय फीस वाली स्ट्रक्चर की वजह से फीस का परसेंटेज ज्यादा दिखाई दे सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इन फीस में 18 फीसदी जीएसटी शामिल है, इसलिए कुल फीस से जीएसटी को अलग करके देखना चाहिए.

जुलाई-सितंबर में बढ़ी IPO एक्टिविटी

2026 में इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की सबसे ज्यादा कमाई जुलाई-सितंबर तिमाही में हुई. इस दौरान करीब ₹1,600 करोड़ की फीस मिली. यह दिसंबर 2025 के बाद किसी तिमाही में इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को मिला सबसे बड़ा फीस पेमेंट रहा.

जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान 54 कंपनियों ने IPO पूरा किया. इन IPO के जरिए करीब ₹83,200 करोड़ जुटाए गए. इससे पता चलता है कि इस अवधि में प्राइमरी मार्केट की एक्टिविटी काफी बढ़ी.

यह भी पढ़ें- ₹1.05 लाख करोड़ जुटाने वाले 7 मेगा IPOs का हाल बेहाल! अब ₹88,979 करोड़ रह गई वैल्यू; निवेशकों को किया मायूस

कई कंपनियों ने इश्यू साइज के मुकाबले ज्यादा फीस दी

कुछ कंपनियों के IPO में इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की फीस इश्यू साइज के मुकाबले काफी ज्यादा रही. MV Electrosystems ने करीब ₹290 करोड़ के IPO के लिए इन्वेस्टमेंट बैंकर्स को करीब ₹24 करोड़ फीस दी. यह उसके कुल इश्यू साइज का करीब 8.3 फीसदी था.

Skyways Air Services ने ₹583 करोड़ के IPO के लिए करीब ₹39 करोड़ फीस दी, जो इश्यू साइज का करीब 6.7 फीसदी थी. वहीं Jindal Supreme India के ₹125 करोड़ के IPO में करीब ₹7.34 करोड़ फीस दी गई. यह उसके इश्यू आकार का करीब 5.9 फीसदी था.