निवेशकों के लिए अलर्ट! बिना इन पांच बातों को जानें NSE IPO में लगाया दांव तो हो सकती है बड़ी चूक
करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपना DRHP दाखिल कर IPO की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. 14.89 करोड़ शेयरों के इस पूरी तरह OFS आधारित इश्यू में SBI समेत कई बड़े शेयरधारक हिस्सेदारी बेचेंगे.

NSE IPO DRHP: भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का अहम पल आखिरकार आ गया है. सालों के इंतजार, कानूनी अड़चनों और कयासों के बाद देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने आईपीओ के लिए सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर दिया है. 17 जून को की गई इस फाइलिंग ने एनएसई की पब्लिक लिस्टिंग का रास्ता साफ कर दिया है, जिसका बाजार को पिछले 10 साल से इंतजार था. हालांकि निवेशकों को अभी सेबी की मंजूरी और फाइनल तारीखों का इंतजार करना होगा, लेकिन डीआरएचपी से इस मेगा-आईपीओ से जुड़ी 5 बेहद महत्वपूर्ण बातें सामने आ चुकी हैं:
- पूरा आईपीओ सिर्फ ओएफएस (OFS) होगा
इस आईपीओ की सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी कोई भी नया शेयर (Fresh Issue) जारी नहीं कर रही है. यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, यानी एनएसई के मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. इस इश्यू के तहत ₹1 फेस वैल्यू वाले करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की जाएगी. चूंकि कोई नया शेयर जारी नहीं हो रहा है, इसलिए आईपीओ से मिलने वाला पूरा पैसा बेचने वाले शेयरधारकों के पास जाएगा, एनएसई को इसमें से कोई फंड नहीं मिलेगा.
- बड़े सरकारी और विदेशी संस्थान बेच रहे हैं हिस्सा
ओएफएस के जरिए देश के कई बड़े सरकारी बैंक, बीमा कंपनियां और विदेशी निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम करने जा रहे हैं. शेयर बेचने वाले प्रमुख दिग्गजों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे आगे है, जो 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा. इसके अलावा एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) 1.60 करोड़ शेयर, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया 1.09 करोड़ शेयर, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (GIC) 1.07 करोड़ शेयर और न्यू इंडिया एश्योरेंस 1.05 करोड़ शेयर बेचने की तैयारी में हैं. नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस भी 60-60 लाख शेयर बेचेंगे.
- रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों के लिए कोटा रिजर्व
आईपीओ में अलग-अलग कैटेगरी के निवेशकों के लिए हिस्सा तय कर दिया गया है. एनएसई के योग्य कर्मचारियों के लिए पोस्ट-ऑफर पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 5% हिस्सा रिजर्व रखा गया है. इसके अलावा:
- क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): अधिकतम 50% हिस्सा
- नॉन-इन्स्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII): न्यूनतम 15% हिस्सा
- रिटेल इनवेस्टर्स (आम निवेशक): न्यूनतम 35% हिस्सा
- 20 बड़े इन्वेस्टमेंट बैंकों की फौज संभालेगी कमान
इतने बड़े आईपीओ को मैनेज करने के लिए एनएसई ने देश-विदेश के 20 दिग्गज बुक रनिंग लीड मैनेजर्स (BRLMs) का एक बड़ा सिंडिकेट नियुक्त किया है. इसमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली, सिटीग्रुप, एचएसबीसी (HSBC), जेपी मॉर्गन, एसबीआई कैप्स, एक्सिस कैपिटल, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज जैसे बड़े नाम शामिल हैं. वहीं, ‘MUFG इनटाइम इंडिया प्राइवेट’ को इस इश्यू का रजिस्ट्रार बनाया गया है.
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- BSE पर होगी लिस्टिंग
इस आईपीओ का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि एनएसई के शेयरों की ट्रेडिंग उसके खुद के प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी. नियमों के मुताबिक, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता. इसलिए एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग उसके प्रतिद्वंदी एक्सचेंज यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर होगी. बीएसई ने इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही दे दी है.
DRHP फाइल होने के बाद अब बाजार की नजरें सेबी के रिव्यू प्रोसेस और मंजूरी पर टिकी हैं, जिसके बाद इस ऐतिहासिक आईपीओ की अंतिम तारीखें सामने आएंगी.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.