Jio IPO को SEBI की मंजूरी, 37,700 करोड़ का इश्यू लाएगी कंपनी; निवेशकों को इन 7 जोखिमों का रखना होगा ध्यान

रिलायंस जियो के 37,700 करोड़ रुपये के IPO को SEBI की मंजूरी मिल गई है. इश्यू भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है. हालांकि, निवेशकों को स्पेक्ट्रम, प्रतिस्पर्धा, भारी खर्च और साइबर सुरक्षा समेत 7 जोखिमों पर ध्यान देना होगा.

Jio Image Credit:

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms के बहुप्रतीक्षित IPO को बाजार नियामक SEBI से मंजूरी मिल गई है. कंपनी करीब 37,700 करोड़ रुपये का आईपीओ ला सकती है. इस इश्यू के बाद Jio Platforms की संभावित वैल्यू करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है.

देश के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है Jio

Jio का प्रस्तावित आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है. इस आईपीओ के जरिए जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा Reliance Jio Infocomm के कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 27,500 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की योजना है.

यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए भी करीब दो दशक बाद एक बड़ा आईपीओ होगा. Jio Platforms की लिस्टिंग से निवेशकों को रिलायंस के इस बड़े डिजिटल कारोबार में सीधे निवेश करने का मौका मिल सकता है.

निवेशकों को इन 7 जोखिमों पर देना होगा ध्यान

हालांकि Jio का नाम और कारोबार का आकार निवेशकों को आकर्षित कर सकता है, लेकिन कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में कई जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है. इनमें स्पेक्ट्रम से जुड़ी चुनौतियां, कड़ी प्रतिस्पर्धा, ज्यादा पूंजीगत खर्च, वेंडरों पर निर्भरता, इंफ्रास्ट्रक्चर का एक जगह केंद्रित होना और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे शामिल हैं.

  1. टेलीकॉम सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा

Jio को टेलीकॉम बाजार में अन्य बड़ी कंपनियों से लगातार मुकाबला करना पड़ता है. टैरिफ, ग्राहक संख्या और नेटवर्क विस्तार को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कंपनी के मार्जिन पर दबाव आ सकता है.

  1. स्पेक्ट्रम की लागत बड़ा खर्च

टेलीकॉम कारोबार के लिए स्पेक्ट्रम बेहद जरूरी है. स्पेक्ट्रम की खरीद और उससे जुड़े खर्च कंपनी के कैश फ्लो पर असर डाल सकते हैं. भविष्य में स्पेक्ट्रम पर ज्यादा खर्च की जरूरत भी पड़ सकती है.

  1. लगातार बढ़ता कैपेक्स

5G नेटवर्क, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए Jio को लगातार भारी निवेश करना पड़ता है. ज्यादा पूंजीगत खर्च से कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव बन सकता है.

साइबर सुरक्षा भी बड़ी चुनौती

Jio का कारोबार बड़ी संख्या में ग्राहकों और डिजिटल डेटा पर निर्भर है. किसी बड़े साइबर हमले, डेटा लीक या तकनीकी समस्या का कंपनी के कारोबार और प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कुछ हिस्सों पर ज्यादा निर्भरता भी जोखिम बढ़ा सकती है.

IPO में पैसा लगाने से पहले क्या देखें?

Jio IPO को लेकर बाजार में उत्साह जरूर है, लेकिन निवेशकों को सिर्फ कंपनी के बड़े ब्रांड नाम और संभावित वैल्यूएशन को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. IPO का प्राइस बैंड, कंपनी की कमाई, कर्ज, वैल्यूएशन और भविष्य की विकास योजनाओं को देखना जरूरी होगा.

SEBI की मंजूरी मिलने के बाद Jio की शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में बड़ा कदम आगे बढ़ गया है. हालांकि, निवेशकों के लिए अंतिम फैसला IPO की कीमत और कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को देखने के बाद लेना ज्यादा बेहतर होगा.

यह भी पढ़ें- इस IPO ने पहले ही दिन दिया 110 फीसदी का मुनाफा, निवेशक मालामाल; ₹300 के शेयर की कीमत ₹600 पार