SGB का सबसे बड़ा फायदा खत्म? सरकार ने बदला नियम, अब मैच्योरिटी पर भी लग सकता है टैक्स

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) निवेशकों के लिए बजट 2026 एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। अब मैच्योरिटी पर मिलने वाली टैक्स-फ्री कैपिटल गेन की सुविधा केवल उन निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने SGB सीधे RBI के ओरिजिनल इश्यू में खरीदा था

SGB पर टैक्स Image Credit: AI Generated

अगर आप भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को टैक्स बचाने का सबसे अचूक हथियार मानते थे, तो बजट 2026 ने आपके इस भरोसे को एक बड़ा झटका दिया है. बरसों से SGB की पहचान एक ऐसे निवेश के रूप में रही है, जिसे मैच्योरिटी (8 साल) तक रखने पर मिलने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री हो जाता था. चाहे आपने बॉन्ड सीधे सरकार से खरीदा हो या शेयर बाजार से, मैच्योरिटी पर एक रुपये भी टैक्स नहीं देना पड़ता था. लेकिन अब इस सुनहरे नियम की कहानी बदल चुकी है. बजट 2026 ने इस टैक्स छूट के दायरे को समेट दिया है, जिससे कई निवेशकों का गणित बिगड़ने वाला है.

क्या हुआ है बदलाव?

1 अप्रैल 2026 से, मैच्योरिटी पर मिलने वाली कैपिटल गेन टैक्स छूट केवल उन निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने यह बॉन्ड सीधे आरबीआई (RBI) के ओरिजिनल इश्यू के दौरान खरीदा था और मैच्योरिटी तक अपने पास रखा.

अगर आपने NSE या बीएसई BSE जैसे सेकेंडरी मार्केट से या किसी अन्य निवेशक से SGB खरीदा है, तो अब मैच्योरिटी पर आपको कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी. इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 70(1)(x) में संशोधन किया गया है, जो आरबीआई द्वारा जारी सभी पुरानी और नई ट्रेंच पर समान रूप से लागू होगा.

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

पुराने नियमों की वजह से बाजार में एक खास तरह का फायदा (आर्बिट्राज) उठाया जा रहा था. कई बार पुराने SGB सीरीज शेयर बाजार पर सोने की वास्तविक कीमत से कम दाम पर ट्रेड कर रहे होते थे. निवेशक इन्हें सस्ते में खरीद लेते थे और मैच्योरिटी तक रोककर पूरा मुनाफा बिना कोई टैक्स दिए उठा रहे थे.

बजट 2026 ने इसी लूपहोल को बंद कर दिया है. सरकार का मानना है कि टैक्स छूट का इनाम सिर्फ उसे मिलना चाहिए जिसने शुरुआत में सरकार के गोल्ड प्रोग्राम को फंड किया था, न कि उसे जो सिर्फ टैक्स बचाने के लिए बाद में बाजार से पेपर खरीद रहा है.

आपके पोर्टफोलियो पर क्या होगा असर?

अगर आपने बैंक, ब्रोकर या पोस्ट ऑफिस के जरिए सीधे सरकारी विंडो से SGB खरीदा था और वह अब भी आपके पास है, तो आपके लिए कुछ नहीं बदला. मैच्योरिटी पर आपका पूरा मुनाफा पहले की तरह 12.5% टैक्स-फ्री रहेगा. अधिकांश रिटेल निवेशक इसी कैटेगरी में आते हैं.

अगर आपने किसी और से एक्सचेंज पर SGB खरीदा था, तो 1 अप्रैल 2026 के बाद मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स लगेगा. अगर बॉन्ड 12 महीने से ज्यादा वक्त तक आपके पास रहा है, तो लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के तहत 12.5% टैक्स देना होगा. इससे कम समय होने पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से शॉर्ट-टर्म टैक्स लगेगा.

ध्यान दें, बॉन्ड पर मिलने वाला 2.5% का सालाना ब्याज पहले भी टैक्स के दायरे में था और आज भी है. साथ ही, मैच्योरिटी से पहले एक्सचेंज पर बॉन्ड बेचने पर लगने वाला टैक्स नियम भी नहीं बदला है.

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अब निवेशक क्या करें?

सबसे पहले अपना SGB होल्डिंग स्टेटमेंट निकालें और चेक करें कि कौन सा बॉन्ड कहां से आया है. अगर सब ओरिजिनल इश्यू वाले हैं, तो आराम से बैठिए. लेकिन अगर कोई बॉन्ड सेकेंडरी मार्केट से लिया है, तो अपने मुनाफे में से 12.5% टैक्स का हिस्सा घटाकर नया कैलकुलेशन करें. अब चूंकि पुराने बॉन्ड को ओरिजिनल में बदलने का कोई तरीका नहीं है, इसलिए आपको यह तय करना होगा कि टैक्स कटने के बाद भी इसे मैच्योरिटी तक रखना फायदेमंद है या बाजार में अभी बेच देना बेहतर है.

SGB आज भी सोना खरीदने का एक सुरक्षित और बेहतरीन जरिया माना जाता है, बस सेकेंडरी मार्केट वालों के लिए अब यह एक साधारण निवेश बन चुका है.