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Gold ETF का ट्रेंड पलटा, मई में निवेशकों ने निकाले करोड़ों डॉलर, जानें क्यों हुआ ऐसा?

यूरोप एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जहां Gold ETFs में निवेश बढ़ा. इस क्षेत्र में 334 मिलियन डॉलर का नेट इंवेस्टमेंट आया. ब्रिटेन और जर्मनी में राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों ने सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चुना. वहीं बॉन्ड यील्ड में नरमी ने भी गोल्ड ETFs को सपोर्ट दिया.

Gold ETFs Image Credit: ai generated

भारत में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) से मई 2026 में एक साल बाद पहली बार निवेशकों ने पैसा निकाला. World Gold Council (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में भारतीय Gold ETFs से 61 मिलियन डॉलर की शुद्ध निकासी दर्ज की गई. इससे पहले मई 2025 के बाद से लगातार इन फंड्स में निवेश आ रहा था. अप्रैल 2026 में Gold ETFs में 297.2 मिलियन डॉलर का नेट इंवेस्टेमेंट आया था, लेकिन मई में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला रहा, जिससे घरेलू बाजार में सोने की कीमतें बढ़ गईं और निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी.

सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर

मई में Gold ETFs से निकासी ऐसे समय में हुई जब सोने की कीमतों में लगातार तीसरे महीने गिरावट दर्ज की गई. मार्च में सोने की कीमतों में 11.6 फीसदी की बड़ी गिरावट आई थी, जबकि अप्रैल में 1.1 फीसदी और मई में 1.7 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली. बढ़ी हुई कीमतों और बाजार की अस्थिरता के बीच कई निवेशकों ने अपने निवेश पर मुनाफा बुक करना बेहतर समझा.

किन फंड्स से सबसे ज्यादा पैसा निकला?

मई में सबसे ज्यादा निकासी Nippon India ETF Gold BeES से हुई. इस फंड से करीब 110 मिलियन डॉलर बाहर निकले.

इसके अलावा:

  • Tata Gold Exchange Traded Fund से 28.24 मिलियन डॉलर की निकासी हुई.
  • Kotak Gold ETF से 9.2 मिलियन डॉलर निकले.
  • अन्य गोल्ड ETFs से भी 1 से 6 मिलियन डॉलर के बीच निकासी दर्ज की गई.

हालांकि, कुछ फंड्स में निवेश जारी रहा.

  • HSBC Gold ETF में 61.5 मिलियन डॉलर का सबसे बड़ा निवेश आया.
  • ICICI Prudential Gold iWIN ETF और DSP Gold ETF में 11-11 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया.
  • ग्लोबल लेवल पर भी Gold ETFs से निकला पैसा

WGC के अनुसार, निवेशकों का रुझान फिर से जोखिम वाले एसेट्स, खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों की ओर बढ़ा है. इसके बावजूद 2026 में अब तक वैश्विक Gold ETFs में कुल मिलाकर करीब 17 अरब डॉलर का नेट इंवेस्टमेंट बना हुआ है. मई के अंत तक वैश्विक Gold ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2 फीसदी घटकर 604 अरब डॉलर रह गया, जबकि कुल होल्डिंग्स 4,121 टन पर पहुंच गईं.

अमेरिका में भी निवेशकों ने बनाई दूरी

उत्तरी अमेरिका में Gold ETFs से 1.1 अरब डॉलर की निकासी दर्ज हुई. डॉलर की मजबूती, ऊंची ब्याज दरें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने सोने की मांग पर दबाव बनाया. इसके साथ ही निवेशकों का पैसा टेक्नोलॉजी सेक्टर की ओर जाता दिखाई दिया.

यूरोप रहा अपवाद

यूरोप एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जहां Gold ETFs में निवेश बढ़ा. इस क्षेत्र में 334 मिलियन डॉलर का नेट इंवेस्टमेंट आया. ब्रिटेन और जर्मनी में राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों ने सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चुना. वहीं बॉन्ड यील्ड में नरमी ने भी गोल्ड ETFs को सपोर्ट दिया.

एशिया में चीन ने बढ़ाया दबाव

एशियाई Gold ETFs से मई में 1.2 अरब डॉलर की निकासी हुई, जो अगस्त 2025 के बाद पहली मंथली निकासी रही. इसका सबसे बड़ा कारण चीन रहा, जहां स्थानीय सोने की कीमतों में कमजोरी, मजबूत होती युआन मुद्रा और घरेलू शेयर बाजारों में बढ़ती तेजी के चलते निवेशकों ने Gold ETFs से पैसा निकालकर इक्विटी बाजारों का रुख किया.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.