Corporate FD पर 9.1% तक ब्याज! क्या Bank FD छोड़कर इसमें निवेश करना होगा फायदे का सौदा?
Corporate FD पर 9.1 फीसदी तक ब्याज का ऑफर निवेशकों को आकर्षित कर रहा है, लेकिन क्या यह Bank FD से बेहतर विकल्प है? जानिए Corporate FD और Bank FD के बीच क्या अंतर है, किसे कितना ब्याज मिल रहा है, CRISIL, ICRA और AAA Rating का क्या महत्व है, DICGC सुरक्षा क्यों जरूरी है और किन निवेशकों के लिए Corporate FD सही विकल्प हो सकता है.

Corporate FD vs Bank FD: फिक्स्ड इनकम निवेश के लिए FD आज भी भारतीय निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कॉर्पोरेट FD ने भी निवेशकों का ध्यान तेजी से खींचा है. इसकी सबसे बड़ी वजह बैंकों की तुलना में मिलने वाली अधिक ब्याज दर है. कई कंपनियां अपने कॉर्पोरेट FD पर 9.1 फीसदी तक सालाना ब्याज दे रही हैं, जो पारंपरिक बैंक FD से काफी अधिक है. लेकिन क्या केवल ज्यादा ब्याज के लिए कॉर्पोरेट FD चुन लेना सही फैसला होगा? निवेश से पहले इसके फायदे और जोखिम, दोनों को समझना जरूरी है.
क्या होता है कॉर्पोरेट FD
कॉर्पोरेट FD किसी बैंक की ओर से नहीं, बल्कि NBFC, HFC और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा जारी किया जाता है. इसमें निवेशक एक निश्चित अवधि के लिए एकमुश्त राशि जमा करते हैं और बदले में तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न प्राप्त करते हैं. इसकी अवधि कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों तक हो सकती है. इन FD का सबसे बड़ा आकर्षण इनकी ऊंची ब्याज दर है. कई मामलों में कॉर्पोरेट FD, बैंक FD की तुलना में 1 से 3 फीसदी तक अधिक ब्याज देते हैं.
किन कंपनियों के कॉर्पोरेट FD पर मिल रहा ज्यादा ब्याज
इस समय कई बड़ी वित्तीय कंपनियां आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर रही हैं. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक-
- बजाज फाइनेंस – 6.95 फीसदी
- महिंद्रा फाइनेंस – 7.00 फीसदी
- पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस – 6.90 फीसदी
- एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस – 6.90 फीसदी
- HUDCO – 7.25 फीसदी
- सुंदरम फाइनेंस – 7.00 फीसदी
- मुथूट कैपिटल – 9.10 फीसदी
इनमें से अधिकांश कंपनियों को CRISIL या ICRA की ओर से AAA या उसके समकक्ष Credit Rating मिली हुई है, जिसे निवेश के लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है.
किन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार, कॉर्पोरेट FD उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, जिनके वित्तीय लक्ष्य शॉर्ट टर्म या मीडियम टर्म के हों. उदाहरण के तौर पर विदेश यात्रा की योजना, किसी बड़े खर्च के लिए बचत या कुछ वर्षों के लिए अतिरिक्त धन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इसमें निवेश किया जा सकता है. ऐसे निवेशक, जो शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहना चाहते हैं, लेकिन बैंक FD से अधिक रिटर्न की तलाश में हैं, उनके लिए भी यह विकल्प उपयोगी साबित हो सकता है.
ज्यादा ब्याज के साथ ज्यादा जोखिम भी
हालांकि, अधिक ब्याज के साथ जोखिम भी बढ़ जाता है. यही कारण है कि कॉर्पोरेट FD में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और Credit Rating की जांच करना बेहद जरूरी माना जाता है. सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि कॉर्पोरेट FD को DICGC का सुरक्षा कवच नहीं मिलता.
दूसरी ओर, बैंक FD में प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक की जमा राशि DICGC के तहत सुरक्षित रहती है. यदि कोई कंपनी वित्तीय संकट में फंस जाती है, तो निवेशकों की पूंजी पर जोखिम बढ़ सकता है. इसलिए विशेषज्ञ केवल AAA Rating वाली कंपनियों के कॉर्पोरेट FD में निवेश की सलाह देते हैं.
कॉर्पोरेट FD के अन्य फायदे
ऊंचे ब्याज के अलावा कॉर्पोरेट FD में कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं. अधिकांश कंपनियां निवेशकों को मंथली, क्वार्टरली, एनुअली या मैच्योरिटी पर ब्याज प्राप्त करने का विकल्प देती हैं. इसके अलावा, कई कॉर्पोरेट FD पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध होती है. जरूरत पड़ने पर निवेशक अपनी जमा राशि का करीब 75 फीसदी तक लोन ले सकते हैं. कुछ कंपनियां बैंक FD की तुलना में कम लॉक-इन पीरियड भी उपलब्ध कराती हैं.
क्या बैंक FD का विकल्प बन सकता है
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट FD को पूरी तरह बैंक FD का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. हालांकि, यदि निवेशक थोड़ा अतिरिक्त जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं और केवल हाई Credit Rating वाली कंपनियों का चयन करते हैं, तो कॉर्पोरेट FD उनके फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो का एक अच्छा हिस्सा बन सकता है. ऐसे में निवेश का फैसला केवल ब्याज दर देखकर नहीं, बल्कि कंपनी की वित्तीय स्थिति, Credit Rating, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए.
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