ITR फाइल कर दिया? अब 30 दिन के भीतर ऐसे करें ई-वेरिफिकेशन, नहीं तो रिटर्न होगा अमान्य; जानें वेरिफाई करने के 5 तरीके
ITR दाखिल करने के बाद 30 दिन के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी है. ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग रिटर्न को अमान्य मान सकता है. ऐसे में टैक्सपेयर आधार OTP, बैंक खाते से EVC, डिमैट खाते से EVC, नेट बैंकिंग और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के जरिए ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं.
ITR E-Verification: वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की 31 जुलाई की समयसीमा अब करीब है. अगर आपने अपना ITR दाखिल कर दिया है, तो यह समझना जरूरी है कि केवल रिटर्न भरना ही पर्याप्त नहीं है. ITR दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) भी करना होता है. यदि रिटर्न दाखिल करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया जाता, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को अमान्य मान सकता है.
क्या होता है ITR ई-वेरिफिकेशन?
जब कोई टैक्सपेयर ITR दाखिल करता है, तो आयकर विभाग को उसका रिटर्न प्राप्त हो जाता है, लेकिन उसकी प्रोसेसिंग शुरू नहीं होती. रिटर्न की प्रोसेसिंग तभी शुरू होती है, जब उसका वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है. इसी प्रक्रिया को ITR वेरिफिकेशन कहा जाता है. नए नियम के मुताबिक, ITR दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका वेरिफिकेशन करना जरूरी है. इससे पहले यह समयसीमा 120 दिन थी. यह नया नियम 1 अगस्त 2022 या उसके बाद दाखिल किए गए रिटर्न पर लागू है.
ITR ई-वेरिफिकेशन के 5 आसान तरीके
आयकर विभाग करदाताओं को ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन की सुविधा देता है. इसके लिए पांच ऑप्शन हैं.
- 1. आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर OTP: यदि आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक है, तो उस पर आए OTP के जरिए ITR का ई-वेरिफिकेशन किया जा सकता है.
- 2. प्री-वैलिडेटेड बैंक खाते से EVC: यदि आपका बैंक खाता ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड है, तो Electronic Verification Code (EVC) जनरेट करके ITR वेरिफाई किया जा सकता है.
- 3. प्री-वैलिडेटेड डिमैट खाते से EVC: प्री-वैलिडेटेड डिमैट अकाउंट के जरिए भी EVC जनरेट कर ITR का ई-वेरिफिकेशन किया जा सकता है.
- 4. नेट बैंकिंग: अधिकृत बैंकों की नेट बैंकिंग सुविधा के माध्यम से भी करदाता अपना ITR ई-वेरिफाई कर सकते हैं.
- 5. डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC): टैक्सपेयर Digital Signature Certificate (DSC) के जरिए भी ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं. हालांकि, यदि ITR दाखिल करते समय ‘e-Verify Later’ विकल्प चुना गया है, तो बाद में DSC के जरिए ई-वेरिफिकेशन का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा.
कैसे पता चलेगा कि ई-वेरिफिकेशन पूरा हो गया?
ई-वेरिफिकेशन सफल होने पर स्क्रीन पर सक्सेस मैसेज और Transaction ID दिखाई देगा. इसके अलावा, ई-फाइलिंग पोर्टल पर पंजीकृत ईमेल आईडी पर पुष्टि का ईमेल भी भेजा जाएगा.
ई-वेरिफिकेशन के क्या हैं फायदे?
ई-वेरिफिकेशन करने पर ITR-V की फिजिकल कॉपी CPC, बेंगलुरु भेजने की जरूरत नहीं पड़ती. साथ ही रिटर्न का सत्यापन तुरंत हो जाता है, जिससे प्रोसेसिंग में तेजी आती है और डाक के जरिए दस्तावेज खोने का जोखिम भी नहीं रहता.
क्या ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है?
तो इसका जवाब है नहीं. करदाता के पास दो विकल्प होते हैं. पहला, ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन करना और दूसरा, ITR-V की हस्ताक्षरित फिजिकल कॉपी Centralised Processing Centre (CPC), Bengaluru भेजना. यदि कोई करदाता फिजिकल वेरिफिकेशन का विकल्प चुनता है, तो उसे ITR-V की प्रिंट कॉपी पर हस्ताक्षर करके ITR दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर CPC, बेंगलुरु भेजनी होगी. हालांकि, तेज प्रोसेसिंग और सुविधा के कारण अधिकांश करदाता ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन को ही प्राथमिकता देते हैं.
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