Section 87A से टैक्स जीरो है, फिर भी क्या ITR भरना जरूरी है? जानिए नियम

अगर सेक्शन 87A के तहत आपका टैक्स शून्य हो जाता है, तब भी हर व्यक्ति को ITR दाखिल करने से छूट नहीं मिलती. रिटर्न भरना आपकी ग्रॉस टोटल इनकम और लागू नियमों पर निर्भर करता है. नई टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल आय पर रिबेट मिल सकता है.

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ITR Filing 2026: अगर सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट मिलने के बाद आपकी टैक्स देनदारी शून्य हो जाती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको इनकम टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है. ITR फाइल करने का नियम आपकी कुल आय और चुने गए टैक्स रिजीम पर निर्भर करता है. कई मामलों में टैक्स जीरो होने के बावजूद रिटर्न भरना अनिवार्य होता है. इसके अलावा ITR भविष्य में लोन, वीजा और टैक्स रिफंड जैसे कामों में भी काम आता है. इसलिए केवल टैक्स नहीं बनने के आधार पर रिटर्न फाइल करने से बचना सही फैसला नहीं होगा.

किन लोगों के लिए ITR भरना जरूरी

अगर किसी व्यक्ति की कुल आय सरकार की तय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से ज्यादा है तो उसे ITR दाखिल करना होगा. नई टैक्स रिजीम में यह सीमा 4 लाख रुपये है. पुरानी टैक्स रिजीम में 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए यह सीमा 2.50 लाख रुपये है. 60 से 80 साल के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 3 लाख रुपये और 80 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 5 लाख रुपये की सीमा तय है. सेक्शन 87A का लाभ तभी मिलेगा जब आप ITR दाखिल करेंगे.

ग्रॉस टोटल इनकम देखी जाती है

ITR भरने की अनिवार्यता तय करते समय आपकी ग्रॉस टोटल इनकम देखी जाती है. इसमें सेक्शन 80C 80D 80CCD 80G 80TTA और 80TTB जैसी कटौतियों को घटाया नहीं जाता. यानी पहले आपकी कुल आय देखी जाएगी और उसके बाद यह तय होगा कि आपको रिटर्न भरना जरूरी है या नहीं. इसी तरह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर मिलने वाली कुछ छूट को भी इस गणना में शामिल नहीं किया जाता.

क्या है सेक्शन 87A का फायदा

वित्त वर्ष 2025 26 यानी असेसमेंट ईयर 2026 27 के लिए नई टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम पर सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट मिलता है. इससे टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है. वेतनभोगी कर्मचारी नई टैक्स रिजीम में 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी ले सकते हैं. इस तरह 12.75 लाख रुपये तक की ग्रॉस सैलरी वाले कई कर्मचारियों का टैक्स जीरो हो सकता है यदि वे सभी शर्तें पूरी करते हैं.

ITR नहीं भरने पर क्या होगा

अगर ITR भरना जरूरी होने के बावजूद कोई व्यक्ति समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करता है तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है. 5 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं के लिए यह जुर्माना 1000 रुपये है. वहीं 5 लाख रुपये से अधिक आय होने पर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. हालांकि यदि आपकी आय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है तो सामान्य स्थिति में लेट फीस नहीं लगती, लेकिन कुछ विशेष मामलों जैसे विदेशी संपत्ति रखने पर ITR दाखिल करना फिर भी जरूरी हो सकता है.

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ITR भरने के अन्य फायदे

भले ही आपका टैक्स जीरो हो लेकिन ITR दाखिल करने से कई फायदे मिलते हैं. इससे टैक्स रिफंड का दावा किया जा सकता है. भविष्य के लिए कुछ नुकसान को कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है. साथ ही बैंक लोन, होम लोन, वीजा और अन्य वित्तीय जरूरतों के समय ITR आय के आधिकारिक प्रमाण के रूप में काम आता है. इसलिए पात्र होने पर समय पर ITR दाखिल करना बेहतर माना जाता है.