नौकरी छोड़कर बिजनेस या दूसरा करियर शुरू किया? PF और Pension का क्या होगा, पैसा रहेगा या बंद हो जाएगी कमाई?
नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने या EPF लागू नहीं होने वाली नौकरी में जाने पर PF में नया योगदान बंद हो सकता है, लेकिन पुराना PF बैलेंस खत्म नहीं होता. EPFO के FAQ के मुताबिक, उस पर 58 साल की उम्र तक ब्याज क्रेडिट होता रह सकता है. EPS में ब्याज नहीं मिलता. PF निकालने से पहले Tax और Continuous Service के नियम जरूर समझें.

नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने या ऐसी नौकरी में जाने पर जहां EPFO के तहत PF की सुविधा नहीं है, कर्मचारियों का EPF Contribution रुक सकता है. ऐसी स्थिति में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से EPF और EPS में नया योगदान बंद हो जाता है. हालांकि, पहले से EPF खाते में जमा पैसा खत्म नहीं होता. जमा रकम खाते में बनी रहती है और तय नियमों के तहत उस पर ब्याज मिलता रह सकता है.
Contribution बंद होने पर PF का पैसा खत्म नहीं होता
EPF में आम तौर पर कर्मचारी अपने Basic Wages और Dearness Allowance का 12% योगदान करता है. नियोक्ता भी 12% योगदान करता है. नियोक्ता के योगदान में से आम तौर पर 8.33% EPS यानी Employees’ Pension Scheme में जाता है और बाकी रकम कर्मचारी के EPF खाते में जाती है.
जब कोई व्यक्ति नौकरी छोड़कर सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट शुरू करता है, पूरी तरह काम करना बंद करता है या ऐसी नौकरी में चला जाता है जहां EPF लागू नहीं है, तो EPF में नियमित योगदान रुक जाता है. कर्मचारी खुद से नियोक्ता वाला योगदान जारी नहीं रख सकता.
हालांकि, पुराना PF बैलेंस खत्म नहीं होता. खाते में जमा रकम बनी रहती है और उस पर नियमों के मुताबिक ब्याज मिलता रह सकता है.
नौकरी छोड़ने के बाद भी PF पर ब्याज मिलता है
EPFO के FAQ के मुताबिक, नौकरी छोड़ने या काम बंद करने के बाद भी EPF खाते में ब्याज तब तक क्रेडिट होता रहता है जब तक सदस्य 58 साल की उम्र तक नहीं पहुंच जाता.
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मौजूदा EPF Interest Rate 8.25% सालाना है. यह ब्याज साल में एक बार सदस्य के खाते में क्रेडिट किया जाता है.
दूसरी तरफ, EPS एक Pension Scheme है, इसलिए इसमें ब्याज नहीं मिलता. Pension की गणना सेवा के अंतिम वर्ष के औसत मासिक वेतन, सेवा के वर्षों और निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर की जाती है.
बिजनेस शुरू किया तो आगे की Retirement Planning कैसे करें?
अगर कोई व्यक्ति स्थायी रूप से नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करता है या काम करना पूरी तरह बंद कर देता है, तो भविष्य की Retirement Savings के लिए दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है.
PPF, NPS, SCSS या लक्ष्य और जोखिम के अनुसार दूसरे निवेश विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, किसी भी योजना में निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि व्यक्ति उसके लिए पात्र है या नहीं.
साथ ही EPF Passbook को समय-समय पर चेक करना चाहिए. इससे यह पता चलता रहेगा कि खाते में पुराने योगदान और ब्याज की जानकारी सही दर्ज है या नहीं.
Contribution में गैप से Retirement Corpus पर असर
अगर EPF में नया योगदान बंद हो जाता है तो भविष्य में खाते में जमा होने वाली नई रकम रुक जाती है. इससे Compounding के लिए उपलब्ध रकम धीरे-धीरे बढ़ती है और लंबे समय में Retirement Corpus पर असर पड़ सकता है.
इसलिए नौकरी छोड़ने या करियर बदलने के बाद सिर्फ पुराने PF बैलेंस को छोड़ देना ही पर्याप्त नहीं है. भविष्य के लिए Retirement Savings की अलग योजना बनाना भी जरूरी है.
5 साल से पहले PF निकाला तो टैक्स लग सकता है
अगर कोई कर्मचारी 5 साल की Continuous Service पूरी करने से पहले EPF से पैसा निकालता है, तो सामान्य तौर पर यह रकम Taxable मानी जा सकती है. हालांकि, EPFO और Income Tax Rules के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट मिल सकती है.
इनमें खराब स्वास्थ्य के कारण नौकरी खत्म होना, नियोक्ता का कारोबार बंद होना या कर्मचारी के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों में नौकरी खत्म होना जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं.
अगर पुराने और नए नियोक्ता के बीच PF बैलेंस Transfer कर दिया गया है और निकासी नहीं की गई है, तो पुराने नियोक्ता की सेवा अवधि भी Continuous Service में शामिल हो सकती है. ऐसी स्थिति में न्यूनतम Continuous Service की शर्त पूरी होने पर निकासी पर टैक्स नहीं लग सकता.
100% PF कब निकाल सकते हैं?
सदस्य के रिटायर होने या नौकरी से इस्तीफा देने के बाद अगर वह लगातार कम से कम दो महीने यानी 60 दिनों तक बेरोजगार रहता है, तो वह 100% PF Funds Withdrawal के लिए पात्र हो सकता है, दिए गए नियमों और शर्तों के अधीन.
इसलिए नौकरी बदलते समय जल्दबाजी में PF निकालने के बजाय उसे ट्रांसफर करने पर भी विचार करना चाहिए, खासकर जब नई नौकरी में EPF की सुविधा उपलब्ध हो.