ITR Filing 2026: शेयरों से हुई कमाई पर कैसे लगेगा टैक्स? जानें डिविडेंड, बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट की किस फॉर्म में होगी रिपोर्टिंग
ITR फाइलिंग 2026 के दौरान शेयर बाजार निवेशकों के लिए डिविडेंड इनकम, बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट से जुड़े टैक्स नियमों को समझना जरूरी है. डिविडेंड इनकम पर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है, जबकि बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट पर टैक्स तब लागू होता है जब निवेशक शेयरों की बिक्री करता है.

ITR Filing 2026: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है और ऐसे में शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के मन में एक अहम सवाल है कि डिविडेंड इनकम, बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट से जुड़े लाभों को ITR में कैसे दिखाया जाए. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिन निवेशकों को कंपनियों से डिविडेंड मिला, बोनस शेयर आवंटित हुए या फिर उनके पोर्टफोलियो में मौजूद शेयरों का स्टॉक स्प्लिट हुआ, उनके लिए इनकी टैक्स देनदारी और रिपोर्टिंग के नियम समझना बेहद जरूरी है. गलत जानकारी देने पर भविष्य में नोटिस या टैक्स संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
डिविडेंड इनकम पर लगता है सीधा टैक्स
डिविडेंड इनकम को आयकर विभाग सामान्य आय की तरह मानता है. जिस तरह वेतन या ब्याज से होने वाली आय को कुल आय में जोड़ा जाता है, उसी तरह डिविडेंड इनकम भी करदाता की कुल आय में शामिल की जाती है. इसका मतलब है कि निवेशक को प्राप्त डिविडेंड उसकी लागू टैक्स स्लैब रेट के अनुसार कर योग्य होगा.
यदि डिविडेंड पर किसी कंपनी ने टीडीएस काटा है, तो उसकी जानकारी फॉर्म 26एएस और एआईएस में दिखाई देती है और करदाता उस टीडीएस का क्रेडिट दावा कर सकता है. डिविडेंड इनकम को ITR-1 या ITR-2 में “इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज” के तहत रिपोर्ट करना होता है.
बोनस शेयर मिलने पर तुरंत नहीं लगता टैक्स
यदि किसी कंपनी ने निवेशकों को बोनस शेयर जारी किए हैं, तो केवल शेयरों की संख्या बढ़ती है, निवेशक के खाते में कोई नकद राशि नहीं आती. इसलिए बोनस शेयर मिलने के समय कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती. हालांकि, जब निवेशक इन बोनस शेयरों को बेचता है, तब उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है.
महत्वपूर्ण बात यह है कि बोनस शेयरों की कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन शून्य मानी जाती है. इसका अर्थ है कि बिक्री से प्राप्त लगभग पूरी राशि कैपिटल गेन मानी जाएगी और उसी के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा. बोनस शेयरों के लिए होल्डिंग पीरियड उनकी अलॉटमेंट डेट से गिनी जाती है.
स्टॉक स्प्लिट के नियम हैं अलग
स्टॉक स्प्लिट के दौरान किसी निवेशक की कुल संपत्ति में कोई बदलाव नहीं होता. केवल शेयरों की संख्या बढ़ जाती है और प्रति शेयर कीमत उसी अनुपात में कम हो जाती है. इसलिए स्टॉक स्प्लिट होने के समय भी कोई टैक्स नहीं लगता. टैक्स की देनदारी तब होती है, जब निवेशक उन शेयरों को बेचता है.
ऐसे मामलों में शेयरों की खरीद लागत को नए शेयरों में अनुपातिक रूप से बांटा जाता है. स्टॉक स्प्लिट से प्राप्त शेयरों के लिए होल्डिंग पीरियड मूल खरीद तारीख से गिनी जाती है, जो कैपिटल गेन्स की गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
ITR में कैसे करें रिपोर्टिंग
डिविडेंड इनकम को “इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज” के तहत ITR-1 या ITR-2 में दिखाया जा सकता है. वहीं बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट के बाद शेयर बेचने पर होने वाले कैपिटल गेन्स को “शेड्यूल सीजी” में रिपोर्ट करना अनिवार्य होता है. यदि निवेशक ने बोनस शेयर या स्प्लिट शेयर बेचकर लाभ कमाया है, तो सामान्यतः उसे ITR-2 दाखिल करना पड़ सकता है. लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन की गणना होल्डिंग पीरियड के आधार पर की जाती है.
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