TV9 NETWORK
User
Sign In

By signing in or creating an account, you agree with Associated Broadcasting Company's Terms & Conditions and Privacy Policy.

₹15.15 लाख करोड़ की हेराफेरी, फंसेगा LIC का पैसा? केनरा बैंक की बढ़ी आफत, शेयर बाजार में क्यों मचा हड़कंप

SEBI के अंतरिम आदेश ने Rajesh Exports को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. इस कार्रवाई के बाद कंपनी के शेयर लोअर सर्किट में पहुंच गए, जबकि बड़ा हिस्सेदारी रखने वाली LIC और ₹509 करोड़ के एक्सपोजर वाले Canara Bank की चिंता बढ़ गई है.

राजेश एक्सपोर्ट मामला Image Credit: Money9 Live

मार्केट रेगुलेटर SEBI के एक बड़े फैसले ने भारतीय शेयर बाजार में कई दिग्गज शेयरों में तूफान ला दिया है. देश की दिग्गज गोल्ड रिफाइनर कंपनी ‘राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड’ (REL) और इसके प्रमोटर व सीईओ राजेश मेहता पर वित्तीय हेराफेरी, रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और जांच में सहयोग न करने के गंभीर आरोपों के बाद SEBI ने बुधवार को अंतरिम आदेश जारी कर दिया. इस आदेश के तहत राजेश मेहता के कंपनी के सिक्योरिटीज में ट्रेड करने पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है.

बुधवार को आए इस फैसले के बाद बाजार को इस गिरावट का अंदाजा होने लगा था. यही वजह रही कि आज सुबह LIC के शेयर 400 रुपये पर खुलने के बाद करीब 1 फीसदी गिरकर 397 रुपये पर ट्रेड करने लगे. वहीं दूसरी तरफ, राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी बिकवाली के चलते 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया.

आइए समझते हैं कि 15.15 लाख करोड़ रुपये की इस हेराफेरी, केनरा बैंक की माथापच्ची और LIC के मेगा स्टेक का पूरा मामला क्या है.

राजेश मेहता पर SEBI का हंटर

बाजार नियामक SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और इसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ जो अंतरिम आदेश जारी किया है, उसमें वित्तीय हेराफेरी के चौंकाने वाले दावे किए गए हैं. SEBI का आरोप है कि कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच अपनी कुल कंसोलिडेटेड कमाई में करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए. यह रकम कंपनी के कुल रेवेन्यू का 99.80 फीसदी हिस्सा है.

जांच में सामने आया कि कंपनी की कमाई का 97 से 99 फीसदी हिस्सा उसकी विदेशी सहायक कंपनी ‘वालकाम्बी एसे’ (Valcambi SA) से आता दिखाया गया. लेकिन जब वालकाम्बी के वित्तीय दस्तावेजों की जांच हुई, तो वहां इस कमाई का एक छोटा सा हिस्सा ही मिला. कंपनी में विदेशी निवेशकों ने 14 फीसदी तक हिस्सेदारी ले रखी है.

SEBI के मुताबिक, कंपनी ने रिफाइनिंग या प्रोसेसिंग से होने वाली असली इनकम दिखाने के बजाय, सोने के कुल ट्रांजैक्शन की ग्रॉस वैल्यू को अपनी कमाई बता दिया. इसके लिए कंपनी कोई पक्का रिकॉर्ड, इनवॉइस या ग्राहकों की जानकारी भी नहीं दे पाई. SEBI ने अब इस मामले को ऑडिटर्स की भूमिका की जांच के लिए NFRA (नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी) को भेज दिया है.

LIC का ‘मेगा स्टेक’ और लुढ़कता शेयर

इस पूरे फर्जीवाड़े का राजेश एक्सपोर्ट के बाद सबसे बड़ा असर LIC पर पड़ा है. मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के मुताबिक, LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स की करीब 10.80 फीसदी हिस्सेदारी (Stake) है. सितंबर 2023 के बाद से LIC ने इस कंपनी में न तो कोई शेयर खरीदा है और न ही बेचा है.

चिंता की बात यह है कि LIC देश के करोड़ों आम लोगों और पॉलिसीधारकों के भरोसे पर चलती है. LIC जो निवेश करती है, वह उसका अपना पैसा नहीं बल्कि देश के मध्यम वर्ग की बचत और प्रीमियम का पैसा होता है.

राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में लोअर सर्किट लगने और कंपनी पर लगे इन गंभीर आरोपों के बाद LIC के इस बड़े निवेश पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे आज बाजार खुलते ही LIC के शेयरों में भी दबाव देखा गया.

यह भी पढ़ें: बाजार गिरकर खुला, सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा टूटा, निफ्टी 23300 के नीचे; Rajesh Exports में लगा लोअर सर्किट

केनरा बैंक की ₹509 करोड़ के लिए माथापच्ची

इस कहानी में सिर्फ LIC ही नहीं, बल्कि PSU Canara Bank भी फंसा हुआ है. राजेश एक्सपोर्ट्स ने केनरा बैंक का लोन चुकाने में डिफॉल्ट किया है, जिसके बाद बैंक ने इस लोन को ‘स्ट्रेस्ड लोन’ यानी फंसे हुए कर्ज की कैटेगरी में डाल दिया है.

कंपनी पर केनरा बैंक का कुल 509 करोड़ रुपये का बकाया है. अब बैंक इस झंझट से पूरी तरह बाहर निकलना चाहता है. बैंक ने फैसला किया है कि वह इस 509 करोड़ रुपये के फंसे हुए कर्ज को एक ओपन ऑक्शन के जरिए किसी और को बेच देगा, ताकि उसका पैसा वापस आ सके और वह इस मामले से पूरी तरह एग्जिट कर सके.

राजेश एक्सपोर्ट्स के इस फर्जीवाड़े और SEBI के बुधवार के बैन ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.