PF निकाल लिया, लेकिन Pension का क्या? EPS सर्विस ट्रांसफर नहीं किया तो हो सकती है दिक्कत, ऐसे करें ट्रांसफर

PF बैलेंस निकालने और EPS सर्विस खत्म होने को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए. EPF का पैसा निकाल लेने के बाद भी पुरानी नौकरी की EPS सर्विस आपके लिए महत्वपूर्ण रहती है. इसलिए नौकरी बदलने के बाद अपनी EPS सर्विस हिस्ट्री जरूर चेक करें और जरूरत होने पर Form 13 के जरिए इसे नए रिकॉर्ड से लिंक कराएं.

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कई कर्मचारी नौकरी बदलने के बाद अपना PF निकाल लेते हैं और मान लेते हैं कि पुराना हिसाब खत्म हो गया. लेकिन EPS की सर्विस हिस्ट्री अलग होती है. इसे नई नौकरी के PF अकाउंट से लिंक कराना जरूरी है, क्योंकि पेंशन की पात्रता आपकी कुल योग्य सर्विस पर निर्भर करती है.

PF निकालने के बाद भी EPS Service क्यों जरूरी?

नौकरी बदलने के बाद कर्मचारी अक्सर पुराने EPF अकाउंट से अपना PF बैलेंस निकाल लेते हैं. इसके बाद उन्हें लगता है कि पुराने अकाउंट से जुड़ा कोई काम बाकी नहीं है. लेकिन ऐसा नहीं है. EPS यानी Employees’ Pension Scheme की सर्विस हिस्ट्री अलग से ट्रैक होती है.

EPF का इस्तेमाल रिटायरमेंट के लिए फंड बनाने के साथ कुछ खास परिस्थितियों में आर्थिक जरूरत पूरी करने के लिए भी किया जा सकता है. वहीं EPS का मुख्य काम कर्मचारी की पेंशन योग्य सर्विस को रिकॉर्ड करना है. आम तौर पर जितनी ज्यादा योग्य सर्विस होती है, पेंशन का लाभ भी उतना ज्यादा हो सकता है.

PF निकाल लिया तो EPS Service अपने आप Transfer नहीं होगी

अगर किसी कर्मचारी ने अपना पूरा EPF बैलेंस निकाल लिया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी EPS सर्विस भी ट्रांसफर हो गई. नौकरी बदलने के बाद पिछली नौकरी की पेंशन योग्य सर्विस को नए EPF अकाउंट से जोड़ना जरूरी है.

EPS में मासिक पेंशन के लिए आम तौर पर कम से कम 10 साल की योग्य सर्विस जरूरी होती है. ऐसे में अगर पुरानी नौकरी की सर्विस हिस्ट्री नई नौकरी के रिकॉर्ड से ठीक तरह लिंक नहीं है, तो कर्मचारी की कुल सर्विस अधूरी दिखाई दे सकती है.

EPS में कर्मचारी की जेब से नहीं कटता पैसा

EPS में योगदान की दर 8.33% है. यह पैसा कर्मचारी की सैलरी से अलग से नहीं काटा जाता. यह नियोक्ता के कुल 12 फीसदी योगदान में से EPS में जाता है यानी कर्मचारी को EPS के लिए अलग से योगदान नहीं करना पड़ता.

PF निकाल चुके हैं तो भी बाद में करा सकते हैं EPS Transfer

अगर किसी कर्मचारी ने PF का पूरा पैसा निकाल लिया है और बाद में पता चलता है कि EPS की सर्विस हिस्ट्री ट्रांसफर नहीं हुई, तो भी रास्ता बंद नहीं होता. कर्मचारी EPFO Member Portal के जरिए Form 13 जमा करके अपनी पिछली EPS सर्विस को बाद में ट्रांसफर करा सकता है.

EPS Transfer में इन गलतियों से बचें

EPS सर्विस ट्रांसफर में कई बार व्यक्तिगत जानकारी, UAN या KYC से जुड़ी गलतियों के कारण दिक्कत आती है. इसके अलावा पुराने नियोक्ता के रिकॉर्ड में Date of Exit गलत या अपडेट नहीं होने पर भी ट्रांसफर प्रक्रिया अटक सकती है. इसलिए Form 13 जमा करने से पहले कर्मचारी को यह जांच लेना चाहिए कि उसका नाम, व्यक्तिगत जानकारी, UAN, KYC और नौकरी से जुड़ी जानकारी सही और अपडेट है.

Date of Exit गलत है तो पहले इसे ठीक करें

अगर पुरानी कंपनी के रिकॉर्ड में Date of Exit अपडेट नहीं है, तो कर्मचारी पहले अपने पुराने नियोक्ता से इसे ठीक कराने के लिए कह सकता है. अगर नियोक्ता रिकॉर्ड अपडेट नहीं करता है, तो EPFO पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा के जरिए कर्मचारी खुद भी इसे अपडेट कर सकता है.

EPFO Portal पर Date of Exit कैसे अपडेट करें?

स्टेप 1: EPFO Member Portal पर अपने UAN और पासवर्ड से लॉगिन करें.

स्टेप 2: होम पेज पर मैनेज टैब में जाएं और मार्क एग्जिट विकल्प पर क्लिक करें.

स्टेप 3: संबंधित पुरानी नौकरी को चुनें और नौकरी छोड़ने का सही कारण चुनें.

स्टेप 4: आधिकारिक रिकॉर्ड और आखिरी PF योगदान वाले महीने के हिसाब से सही डेट ऑफ एग्जिट दर्ज करें.

स्टेप 5: जरूरी जानकारी भरने के बाद आधार आधारित OTP वेरिफिकेशन पूरा करें और रिक्वेस्ट सबमिट कर दें.

इस प्रक्रिया के लिए कर्मचारी का मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए और OTP प्राप्त करने के लिए मोबाइल उसके पास होना जरूरी है. अगर ऑनलाइन सुविधा से डेट ऑफ एग्जिट में सुधार नहीं हो पा रहा है, तो कर्मचारी अपने पुराने नियोक्ता से संपर्क कर सकता है. अगर नियोक्ता कई दिनों या हफ्तों तक जवाब नहीं देता है, तो EPFO की शिकायत व्यवस्था के जरिए शिकायत भी दर्ज की जा सकती है.

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