32 की उम्र में ₹9 करोड़ की संपत्ति! न कोई बेस्ट म्यूचुअल फंड, न मार्केट टाइमिंग; ऐसे बनाया करोड़ों का पैसा

32 साल के सुधीर दंडोतिया ने करीब 9 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है. उनकी म्यूचुअल फंड होल्डिंग करीब 2.56 करोड़ रुपये है और वह हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये SIP में लगाते हैं. उनकी कहानी में लगातार निवेश, बढ़ती सैलरी के बावजूद खर्च पर कंट्रोल, बाजार में गिरावट के दौरान SIP जारी रखना और आय को संपत्ति में बदलना सबसे अहम सबक हैं.

म्यूचुअल फंड

Highlights

  • पुणे के 32 वर्षीय सुधीर दंडोतिया ने करीब ₹9 करोड़ की संपत्ति बनाई है.
  • उनकी वित्तीय संपत्ति करीब ₹4.3 करोड़ और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो करीब ₹2.56 करोड़ का है.
  • कहानी बताती है कि संपत्ति बनाने में सिर्फ ज्यादा रिटर्न ही नहीं, बल्कि लगातार निवेश, आय बढ़ाना और खर्च को काबू में रखना भी अहम है

अक्सर निवेशक इस सवाल में उलझे रहते हैं कि कौन सा म्यूचुअल फंड सबसे अच्छा है, किस फंड ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया और बाजार में कब पैसा लगाना चाहिए. लेकिन पुणे के 32 वर्षीय सुधीर दंडोतिया की कहानी इससे कुछ अलग है. सुधीर ने करीब 9 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है. उनकी वित्तीय संपत्ति करीब 4.3 करोड़ रुपये है, जिसमें उनका म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो करीब 2.56 करोड़ रुपये का है. इसके अलावा पुणे में उनकी एक प्रॉपर्टी है, जिसकी मौजूदा कीमत उनके अनुमान के मुताबिक 4.5 से 4.7 करोड़ रुपये है.

सुधीर खुद भी यह दावा नहीं करते कि उन्होंने कोई शानदार निवेश रणनीति अपनाई. उनका कहना है कि खुद के निवेश को हटाने पर उनके रिटर्न काफी सामान्य हैं. असली फर्क लगातार ज्यादा पैसा निवेश करने से पड़ा. आइए जानते हैं कैसे.

1. सिर्फ रिटर्न के पीछे भागने के बजाय निवेश बढ़ाया

पर्सनल फाइनेंस में अक्सर लोग सबसे अच्छे म्यूचुअल फंड की तलाश में रहते हैं. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सुधीर भी पहले म्यूचुअल फंड रैंकिंग देखते थे और नंबर-1 या नंबर-2 फंड चुनने की कोशिश करते थे. बाद में उन्होंने रैंकिंग को ज्यादा महत्व देना बंद कर दिया. उनका सबसे बड़ा हथियार ज्यादा पैसा निवेश करना बना. वह फिलहाल हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये SIP के जरिए निवेश करते हैं यानी सिर्फ एक साल में करीब 18 लाख रुपये म्यूचुअल फंड में जाता है, इसमें बाजार से मिलने वाला रिटर्न शामिल नहीं है.

इसे एक उदाहरण से समझें. अगर आपके पास 5 लाख रुपये का पोर्टफोलियो है और आपको 2% अतिरिक्त रिटर्न मिल जाता है तो साल में 10,000 रुपये ज्यादा मिलेंगे. लेकिन अगर आप हर महीने 10,000 रुपये अतिरिक्त निवेश करते हैं तो एक साल में 1.2 लाख रुपये अतिरिक्त पैसा निवेश हो जाता है. यही अंतर समय के साथ बड़ा हो सकता है.

2. सैलरी बढ़ी तो निवेश भी बढ़ाया

सुधीर की कमाई में भी तेजी से इजाफा हुआ. उन्होंने 2017 में करीब 4.5 लाख रुपये के पैकेज के साथ करियर शुरू किया था. 2020 तक यह बढ़कर करीब 18 लाख रुपये हो गया. 2022 में पुणे आने के बाद उनका पैकेज करीब 40 लाख रुपये था. आज उनका पैकेज करीब 52 लाख रुपये है यानी करीब नौ साल में उनकी कमाई 4.5 लाख रुपये से बढ़कर 52 लाख रुपये हो गई.

लेकिन यहां सिर्फ सैलरी बढ़ना ही कहानी नहीं है. उनकी आमदनी बढ़ी, लेकिन खर्च उसी रफ्तार से नहीं बढ़ा. पिछले चार साल में उनके मासिक खर्च करीब 2 लाख रुपये रहे हैं. उनकी पत्नी भी सीनियर IT भूमिका में हैं और घर के खर्च में अहम योगदान देती हैं. अतिरिक्त आमदनी का बड़ा हिस्सा निवेश और होम लोन में गया.

3. हर सैलरी बढ़ोतरी के साथ खर्च नहीं बढ़ाया

आम तौर पर सैलरी बढ़ने के साथ लाइफस्टाइल भी महंगी होती जाती है. बड़ा घर, महंगी कार, महंगी छुट्टियां, बाहर खाना और खरीदारी का खर्च बढ़ता जाता है. सुधीर ने इस बढ़ती आमदनी को उसी रफ्तार से खर्च करने के बजाय अतिरिक्त रकम का बड़ा हिस्सा निवेश में लगाया यानी सैलरी बढ़ी, लेकिन खर्च उसी अनुपात में नहीं बढ़ा. यही अंतर निवेश के लिए उपलब्ध रकम में बदल गया. सीधी बात है कि सिर्फ बड़ा CTC आपको अमीर नहीं बनाता. आमदनी का कितना हिस्सा संपत्ति बनाने में लगाया जा रहा है, यह ज्यादा मायने रखता है.

4. बाजार गिरा तो भी SIP नहीं रोकी

सुधीर ने मार्च 2020 के बाजार क्रैश के दौरान भी अपनी SIP जारी रखी. 2022 के कमजोर बाजार में भी निवेश बंद नहीं किया. उन्होंने अपने म्यूचुअल फंड से आज तक एक बार भी पैसा नहीं निकाला. उनका निवेश का नजरिया 15 से 20 साल का है. इसलिए उनका मानना है कि अगले 15 साल के लिए लगाए गए पैसे के फैसले सिर्फ छह महीने की बाजार गिरावट देखकर नहीं बदलने चाहिए. इससे बार-बार बाजार में प्रवेश और बाहर निकलने का फैसला लेने की जरूरत भी कम होती है.

5. साधारण पोर्टफोलियो और ज्यादा निवेश

सुधीर के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में 11 फंड हैं और ये कई कैटेगरी में फैले हुए हैं. इसे कोई जरूरत से ज्यादा डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो भी कह सकता है और कुछ फंडों में ओवरलैप भी हो सकता है. फिर भी उनका म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो करीब 2.56 करोड़ रुपये तक पहुंचा. इसकी बड़ी वजह लगातार पैसा निवेश करते रहना है.

इसका मतलब यह नहीं है कि फंड का चुनाव या एसेट एलोकेशन मायने नहीं रखता. लेकिन जब निवेश की रकम छोटी होती है, तब हर महीने 5,000 रुपये, 10,000 रुपये या 20,000 रुपये ज्यादा निवेश करना कई बार 1% अतिरिक्त रिटर्न खोजने से ज्यादा असर डाल सकता है.

6. कमाई को संपत्ति में बदलना सबसे जरूरी

सुधीर की बैलेंस शीट में उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा अलग-अलग संपत्तियों में बदला गया है. उनके पास करीब 2.56 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड, करीब 64 लाख रुपये का सोना, जिसमें SGB और फिजिकल गोल्ड शामिल हैं, करीब 57 लाख रुपये की FD और बैंक बैलेंस, करीब 23 लाख रुपये के शेयर और करीब 24 लाख रुपये PPF और EPF में हैं.

इसके अलावा पुणे की प्रॉपर्टी की अनुमानित कीमत 4.5 से 4.7 करोड़ रुपये है. उन्होंने 2021 में यह अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट करीब 2.5 करोड़ रुपये में खरीदा था. इसमें करीब 50 लाख रुपये उन्होंने खुद और परिवार की मदद से लगाए और करीब 2 करोड़ रुपये का कर्ज लिया. हालांकि, प्रॉपर्टी की कीमत में हुई तेजी को भविष्य में दोहराया जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा. यही बात बाजार रिटर्न और सैलरी ग्रोथ पर भी लागू होती है.

7. Financial Freedom का मतलब सिर्फ नौकरी छोड़ना नहीं

सुधीर 40 साल की उम्र तक करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने का लक्ष्य रखते हैं. लेकिन उनका मकसद रिटायर होना नहीं है. वह भविष्य में खुद का काम शुरू करना चाहते हैं. उनके लिए Financial Freedom का मतलब यह है कि पैसा उन्हें विकल्प दे. यानी ऐसी नौकरी छोड़ने का विकल्प जो पसंद नहीं है, अपना काम शुरू करने का विकल्प या कुछ समय के लिए करियर ब्रेक लेने का विकल्प.

इस कहानी का सबसे बड़ा सबक क्या है?

सुधीर की कहानी से सबसे बड़ा सबक यह निकलता है कि संपत्ति बनाने के लिए हर बार सबसे अच्छा म्यूचुअल फंड चुनना या बाजार का सही समय पकड़ना जरूरी नहीं है. उनकी आमदनी तेजी से बढ़ी, लेकिन उन्होंने लाइफस्टाइल को उसी रफ्तार से नहीं बढ़ाया. उन्होंने अतिरिक्त रकम को निवेश में लगाया और निवेश करने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखा यानी फॉर्मूला काफी सीधा है कमाई बढ़ाएं, हर सैलरी बढ़ोतरी को खर्च में न बदलें, ज्यादा रकम निवेश करें और निवेश को समय दें.

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