महंगाई ने बढ़ाई RBI की टेंशन! रेपो रेट में 0.25% बढ़ोतरी की उम्मीद, आम आदमी पर क्या होगा असर?

RBI अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 0.25% बढ़ा सकता है. PTI के 16 अर्थशास्त्रियों और बैंकरों के पोल में ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. महंगाई, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल और वेस्ट एशिया संकट चिंता बढ़ा रहे हैं. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स को RBI के स्टेटस क्वो रखने की उम्मीद है.

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Highlights

  • RBI अक्टूबर की MPC बैठक में Repo Rate 0.25% बढ़ा सकता है.
  • महंगाई, Crude Oil और West Asia Crisis के बीच एक्सपर्ट्स ने क्या अनुमान लगाया है.
  • हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स को RBI के स्टेटस क्वो रखने की उम्मीद है.

RBI Repo Rate: महंगाई का दबाव बढ़ने, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वेस्ट एशिया संकट फिर बढ़ने से RBI के सामने ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है. 16 इकोनॉमिस्ट और बैंकरों द्वारा PTI की रिपोर्ट में अक्टूबर की पॉलिसी में 0.25 फीसदी रेपो रेट बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है.

RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है. अर्थशास्त्रियों और बैंकरों के मुताबिक, वेस्ट एशिया संकट के फिर बढ़ने, महंगाई के दबाव और दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंकों की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बीच RBI पर भी दर बढ़ाने का दबाव बढ़ा है. अगर RBI अक्टूबर की पॉलिसी में रेपो रेट बढ़ाता है, तो यह उसकी ब्याज दर नीति में बड़ा बदलाव होगा. RBI ने 2025 में दरों में कटौती शुरू की थी और उसके बाद लंबे समय तक दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया.

फिलहाल RBI की पॉलिसी रेपो रेट 5.25% है. इससे पहले आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया गया था. तब RBI ने इसे 0.25% बढ़ाकर 6.50% किया था.

एक्सपर्ट्स को क्यों दिख रहा है रेट हाइक का खतरा?

Union Bank of India की Chief Economic Advisor कनिका पसरीचा के मुताबिक, दुनिया के केंद्रीय बैंकों की दर बढ़ाने की प्रक्रिया, बढ़ता महंगाई जोखिम और मजबूत आर्थिक ग्रोथ RBI को दर बढ़ाने की गुंजाइश दे रहे हैं. वहीं, Crisil की Principal Economist दीप्ति देशपांडे का कहना है कि पिछली पॉलिसी के बाद से महंगाई का दबाव और बढ़ा है. इसकी मुख्य वजह वेस्ट एशिया संकट का फिर बढ़ना और एनर्जी व कमोडिटी कीमतों पर दबाव है. अगर ये दबाव बना रहता है तो आगे भी रेपो रेट बढ़ाया जा सकता है.

कितनी बार बढ़ सकता है रेपो रेट?

PTI के 16 अर्थशास्त्रियों और बैंकरों के पोल में ज्यादातर लोगों को आगामी पॉलिसी में रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, इस बात पर राय बंटी हुई है कि RBI अपनी पॉलिसी स्टांस में बदलाव करेगा या नहीं. FY27 में रेपो रेट बढ़ोतरी की संख्या को लेकर एक्सपर्ट्स को कम से कम 2 बढ़ोतरी की उम्मीद है. वहीं, कई एक्सपर्ट्स पूरे वित्त वर्ष में 2 से 3 बढ़ोतरी की संभावना देख रहे हैं.

हालांकि, Larsen & Toubro के Group Chief Economist सच्चिदानंद शुक्ला को लगता है कि RBI इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा. उनका कहना है कि अभी अर्थव्यवस्था में मांग से जुड़ी महंगाई या ओवरहीटिंग के साफ संकेत नहीं हैं, इसलिए RBI दर बढ़ाने से पहले इंतजार कर सकता है.

RBI के सामने महंगाई सबसे बड़ी चिंता

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जैसे-जैसे महंगाई बढ़ रही है, RBI को अपनी मौद्रिक नीति को धीरे-धीरे सामान्य करने की जरूरत पड़ सकती है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली तिमाहियों में वास्तविक ब्याज दरें निगेटिव न हो जाएं. IDFC First Bank की Economist गौरा सेनगुप्ता ने कहा कि हेडलाइन महंगाई बढ़ने के बीच पॉलिसी को धीरे-धीरे सामान्य करने की जरूरत है. आने वाली तिमाहियों में रियल रेट निगेटिव न हो, इसके लिए रेपो रेट बढ़ाना जरूरी हो सकता है.

पॉलिसी स्टांस को लेकर एक्सपर्ट्स की राय ‘कोई बदलाव नहीं’ और ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ के बीच बंटी हुई है. कुछ एक्सपर्ट्स ‘विदड्रॉल ऑफ एकॉमोडेशन’ के पक्ष में भी हैं. हालांकि, पॉलिसी के टोन को लेकर ज्यादातर एक्सपर्ट्स हॉकिश रुख की उम्मीद कर रहे हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI महंगाई और वैश्विक ब्याज दरों को देखते हुए सावधानी वाला रुख अपना सकता है.

महंगाई का अनुमान भी बढ़ सकता है

एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि RBI FY27 के CPI महंगाई अनुमान में बढ़ोतरी कर सकता है. इसकी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, खाद्य महंगाई का जोखिम और दूसरी चीजों की कीमतों में बढ़ता दबाव है. ICRA की Chief Economist और Head-Research and Outreach अदिति नायर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंची है. इससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का दबाव और व्यापक हो सकता है. ऐसे में CPI महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है.

Shriram Group के Chief Economist अपूर्वा जावड़ेकर को FY27 की तीसरी और चौथी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान में 0.10% की मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद है. उनके मुताबिक, भविष्य की महंगाई में ऊपर की ओर बदलाव रेपो रेट बढ़ाने की लगभग जरूरी शर्त है. CareEdge Ratings की Chief Economist राजानी सिन्हा के मुताबिक, महंगाई का दबाव अब ज्यादा व्यापक हो रहा है. अगस्त में CPI बास्केट की 358 चीजों में से करीब 19% में महंगाई 6% से ज्यादा रही, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 13% था.

अगस्त में 4.82% पहुंची Retail Inflation

भारत की खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई, जो 8 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. जुलाई में CPI महंगाई 4.45% थी. CPI महंगाई लगातार तीन महीने से RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. यह मई में 3.93%, जून में 4.38% और जुलाई में 4.45% रही थी.

अगस्त का आंकड़ा नई CPI सीरीज के तहत अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. इस नई सीरीज में 2024 को बेस ईयर बनाया गया है.

RBI ने FY27 Inflation का क्या अनुमान दिया था?

अगस्त की मौद्रिक नीति में RBI ने FY27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5.0% रखा था.

  • Q2 FY27: 4.7%
  • Q3 FY27: 5.9%
  • Q4 FY27: 5.5%
  • Q1 FY28: 5.3%
  • FY27 Core Inflation: 4.3%

GDP Growth अनुमान भी बढ़ सकता है

महंगाई के साथ ग्रोथ को लेकर भी एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि RBI FY27 के GDP ग्रोथ अनुमान में बढ़ोतरी कर सकता है. इसकी वजह वित्त वर्ष की पहली छमाही में उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधियां हैं. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स को इसमें कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है. DBS Bank की Senior Economist और Executive Director राधिका राव को FY27 के ग्रोथ अनुमान में मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद है और यह 7% से ऊपर जा सकता है.

अगस्त की पॉलिसी में RBI ने FY27 के लिए Real GDP Growth का अनुमान 6.7% रखा था.

  • Q1 FY27: 7.0%
  • Q2 FY27: 6.4%
  • Q3 FY27: 6.5%
  • Q4 FY27: 6.8%
  • Q1 FY28: 7.3%

लिक्विडिटी पर भी RBI की नजर

बैंकों के सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए RBI आगे भी Variable Rate Reverse Repo (VRRR), Open Market Operations (OMOs) और Foreign Exchange Swap Operations का इस्तेमाल कर सकता है. इन उपायों के जरिए RBI बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी को सोखने की कोशिश कर सकता है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?

अगर RBI रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी करता है, तो इसका असर बैंकिंग सिस्टम की ब्याज दरों पर पड़ सकता है. खासकर होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, अंतिम असर बैंकों और दूसरे कर्जदाताओं की ओर से दरों में किए जाने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा.

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