PF में ज्यादा पैसा जमा करते हैं? ब्याज पर लग सकता है टैक्स, जानें ₹2.5 लाख वाला नियम

अधिकांश कर्मचारी मानते हैं कि EPF पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं है. अगर एक वित्त वर्ष में EPF और VPF में कुल योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो अतिरिक्त राशि पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ जाता है.

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EPF Interest Tax Rule: अगर आप नौकरी करते हैं तो हर महीने आपकी सैलरी से Employees’ Provident Fund (EPF) के लिए पैसा कटता होगा. इसके साथ ही नियोक्ता भी बराबर का योगदान करता है. टैक्स छूट और चक्रवृद्धि का फायदा मिलने की वजह से EPF को रिटायरमेंट के लिए सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है.

इसी वजह से ज्यादातर लोगों को लगता है कि EPF पर मिलने वाला ब्याज हमेशा टैक्स फ्री होता है. लेकिन ऐसा हर मामले में नहीं है. अगर आप EPF के साथ Voluntary Provident Fund (VPF) में भी ज्यादा योगदान करते हैं, तो ब्याज पर टैक्स देना पड़ सकता है.

क्या होता है VPF?

Voluntary Provident Fund (VPF), EPF का ही एक वैकल्पिक विस्तार है. इसमें कर्मचारी अपनी अनिवार्य EPF कटौती के अलावा अपनी इच्छा से अतिरिक्त पैसा जमा कर सकता है. यह अतिरिक्त रकम भी EPF खाते में ही जमा होती है, लेकिन इस पर नियोक्ता को बराबर का योगदान देना जरूरी नहीं होता.

पहले VPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) का लाभ मिलता था. यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स फ्री होती थीं, बशर्ते EPF के नियमों का पालन किया जाए.

कब टैक्सेबल हो जाता है PF का ब्याज?

सरकार ने 2022 से एक नया नियम लागू किया है. इसके तहत अगर किसी वित्त वर्ष में EPF और VPF में आपका कुल योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो 2.5 लाख रुपये से अधिक योगदान पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल हो जाता है. इस अतिरिक्त राशि पर मिलने वाले ब्याज को आपकी टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और उस पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा.

VPF पर कौन-कौन से टैक्स फायदे मिलते हैं?

VPF में निवेश करने वालों को अब भी कुछ टैक्स लाभ मिलते हैं.

  • VPF में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर Section 80C के तहत टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है.
  • अगर VPF की राशि 5 साल बाद निकाली जाती है, तो उस पर मिलने वाली रकम टैक्स फ्री रहती है.
  • लेकिन 5 साल से पहले आंशिक या पूरी निकासी करने पर यह राशि टैक्स के दायरे में आ सकती है.

EPF में अनिवार्य योगदान कितना होता है?

मौजूदा EPF नियमों के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों वेतन का 12 फीसदी EPF में जमा करते हैं. हालांकि यह अनिवार्य योगदान 15000 रुपये मासिक वेतन सीमा के आधार पर तय होता है. यानी कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के लिए अनिवार्य EPF योगदान अधिकतम 1800 रुपये प्रति माह (₹15,000 का 12%) तक सीमित रहता है.

EPF Scheme 2026 में क्या बदलाव हुआ?

EPF Scheme 2026 के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी का मासिक वेतन तय वेतन सीमा से अधिक है, तो सामान्य तौर पर कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अनिवार्य योगदान उसी वेतन सीमा तक सीमित रहेगा. अगर इससे अधिक वेतन पर योगदान किया जाता है, तो उसे योगदान माना जाएगा, जब तक कि नियमों में अलग से अनुमति न दी गई हो.

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