फ्लैट खरीदा है तो ये खबर आपके लिए, सोसाइटी हर सुविधा का अलग पैसा नहीं ले सकती!

हाउसिंग सोसाइटी में मेंटेनेंस फीस के अलावा जिम, स्विमिंग पूल या क्लब हाउस के लिए अलग शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उपनियम, सदस्यों की मंजूरी और राज्य के कानूनों का पालन जरूरी है. मनमानी वसूली पर निवासी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं.

हाउसिंग सोसाइटी Image Credit:

आजकल बड़े शहरों की हाउसिंग सोसाइटियों में जिम, स्विमिंग पूल, क्लब हाउस, इंडोर गेम्स और कम्युनिटी हॉल जैसी सुविधाएं आम हो गई हैं. हालांकि, कई फ्लैट मालिकों की शिकायत रहती है कि हर महीने मेंटेनेंस फीस देने के बावजूद इन सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए उनसे अलग से शुल्क लिया जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हाउसिंग सोसाइटी ऐसा कर सकती है? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इसका जवाब पूरी तरह सोसाइटी के नियमों, राज्य के कानूनों और फ्लैट खरीदते समय किए गए समझौते पर निर्भर करता है.

क्या कहता है कानून?

विशेषज्ञों के मुताबिक, हाउसिंग सोसाइटी या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) कुछ सुविधाओं के लिए अलग यूजर चार्ज ले सकती है. खासतौर पर उन सुविधाओं के लिए, जिनके संचालन और रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च आता है, जैसे स्विमिंग पूल, जिम या क्लब हाउस. हालांकि, यह शुल्क मनमाने तरीके से नहीं लगाया जा सकता.

इसके लिए सोसाइटी के उपनियम (By-laws), सदस्यों की आम बैठक (General Body Meeting) में लिया गया फैसला और संबंधित राज्य के सहकारी समिति कानूनों का पालन करना जरूरी होता है. अगर शुल्क तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है, तो निवासी इस पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं.

बिल्डर के वादे भी निभाने होंगे

यदि बिल्डर ने फ्लैट बेचते समय जिम, स्विमिंग पूल या अन्य सुविधाओं को परियोजना का हिस्सा बताते हुए सभी खरीदारों को उनका उपयोग करने का अधिकार दिया था, तो बाद में इन सुविधाओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने या किसी वर्ग के लोगों की पहुंच सीमित करने पर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है.

ऐसे मामलों में फ्लैट खरीदते समय किए गए एग्रीमेंट, बिक्री ब्रोशर और अन्य दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अगर इन दस्तावेजों में सुविधाओं को बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराने का वादा किया गया है, तो निवासी कानूनी राहत की मांग कर सकते हैं.

निवासी क्या कर सकते हैं?

अगर किसी सोसाइटी द्वारा बिना नियमों का पालन किए अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, तो निवासी सबसे पहले सोसाइटी के उपनियम और मेंटेनेंस से जुड़े नियमों की जानकारी लें. इसके बाद वे सोसाइटी की आम बैठक में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं.

यदि मामला नहीं सुलझता, तो संबंधित राज्य के सहकारी विभाग, रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटी या सक्षम न्यायिक प्राधिकरण के सामने शिकायत की जा सकती है. कानूनी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी विवाद की स्थिति में फ्लैट खरीद से जुड़े दस्तावेज और सोसाइटी के नियमों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए.

हर मामले में नियम अलग हो सकते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि सभी राज्यों में हाउसिंग सोसाइटियों से जुड़े कानून और उपनियम एक जैसे नहीं हैं. इसलिए किसी भी अतिरिक्त शुल्क की वैधता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित राज्य का कानून क्या कहता है, सोसाइटी के उपनियम क्या हैं और सदस्यों की मंजूरी किस प्रक्रिया से ली गई है. ऐसे में किसी भी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने या उसका विरोध करने से पहले नियमों की पूरी जानकारी लेना सबसे बेहतर कदम माना जाता है.