कैंसर की जांच वाली टेक्नोलॉजी अब खेतों में करेगी कमाल, ये सेंसर बदलेगा खेती का तरीका
जर्मनी की एग्रीटेक कंपनी Stenon ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जो खेत में करीब 20 सेकंड में मिट्टी की जांच कर सकती है. सेंसर नाइट्रोजन, नमी और ऑर्गेनिक मैटर की जानकारी देकर खाद के इस्तेमाल को ज्यादा सटीक बनाने में मदद करता है.
Highlights
- Stenon सेंसर 20 सेकंड में मिट्टी की जांच करता है
- तकनीक नाइट्रोजन और नमी की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराती है
- किसानों को खाद का सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी
जर्मनी की एग्रीटेक कंपनी Stenon खेती में मिट्टी की जांच को तेज और आसान बनाने की कोशिश कर रही है. कंपनी ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो खेत में ही मिट्टी के अंदर मौजूद नाइट्रोजन समेत कई जरूरी तत्वों की जानकारी कुछ सेकंड में दे सकती है. कंपनी ने हाल ही में 1.8 करोड़ यूरो यानी करीब 18 मिलियन यूरो की फंडिंग जुटाई है. अब इसका इस्तेमाल अपनी तकनीक को दुनियाभर के किसानों तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा.
कैंसर की रिसर्च से शुरू हुई कहानी
Stenon के संस्थापक और CEO Niels Grabbert ने इस तकनीक की शुरुआत कृषि से नहीं की थी. अपने पिता को कैंसर होने के बाद उन्होंने ऐसे ब्लड सेंसर पर काम किया था, जो इलाज में मदद के लिए शरीर में मौजूद बायोमार्कर्स की पहचान कर सके. इसी रिसर्च के दौरान विकसित हुई स्पेक्ट्रोस्कोपिक तकनीक को बाद में मिट्टी की जांच के लिए इस्तेमाल किया गया.
Grabbert के मुताबिक, खून और मिट्टी दोनों ही जटिल वातावरण हैं, जिनमें कई तरह के केमिकल और बायोलॉजिकल संकेत मौजूद होते हैं. इसी तकनीक को आगे विकसित करके कंपनी ने मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा मापने पर फोकस किया.
20 सेकंड में मिलेगी मिट्टी की जानकारी
Stenon का FarmLab एक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सिस्टम है. इसे खेत की मिट्टी में डाला जाता है. इसमें लगे ऑप्टिकल और इलेक्ट्रिकल सेंसर मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, ऑर्गेनिक मैटर, तापमान और नमी जैसी जानकारी जुटाते हैं.
इसके बाद सॉफ्टवेयर और AI इन आंकड़ों को समझकर किसानों को बताते हैं कि खेत के किस हिस्से में कितनी खाद की जरूरत हो सकती है. कंपनी के मुताबिक, सेंसर करीब 20 सेकंड में रिजल्ट दे सकता है. अलग-अलग जगहों पर जांच करने से पूरे खेत का एक मैप भी तैयार किया जा सकता है.
खाद की खपत कम करने का दावा
कंपनी ने गेहूं, मक्का, कपास, कॉफी, सलाद और दूसरी सब्जियों की फसलों में अपनी तकनीक का परीक्षण किया है. Stenon का दावा है कि इसके इस्तेमाल से किसानों की प्रति हेक्टेयर कमाई में 65 से 120 डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है. साथ ही पैदावार में 2 से 8 प्रतिशत तक सुधार और खाद के इस्तेमाल में 40 प्रतिशत तक कमी देखी गई है.
हालांकि, ये आंकड़े कंपनी द्वारा बताए गए परीक्षणों और अनुभवों पर आधारित हैं. अलग-अलग फसलों, मिट्टी और खेती की परिस्थितियों में परिणाम अलग हो सकते हैं.
लैब रिपोर्ट का इंतजार नहीं
पारंपरिक तरीके में मिट्टी के नमूने लैब भेजने पड़ते हैं और रिपोर्ट आने में कई दिन या कभी-कभी हफ्ते लग सकते हैं. Stenon का लक्ष्य इस प्रक्रिया को खेत में ही पूरा करना है. कंपनी के अनुसार, ब्राजील जैसे देशों में जहां खेती का चक्र तेज है, वहां तुरंत मिट्टी की जानकारी किसानों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है.
अब ऑटोमेशन पर कंपनी का फोकस
Stenon के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े खेतों में पर्याप्त संख्या में मिट्टी के नमूने जुटाना है. कंपनी इसके लिए पार्टनर्स के जरिए माप और मैपिंग सेवाएं दे रही है. अब कंपनी एक नया प्रोडक्ट भी लाने की तैयारी कर रही है, जिससे मिट्टी का डेटा जुटाने की प्रक्रिया ज्यादा ऑटोमेटेड हो सके.
कंपनी का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे किसान मिट्टी की सही स्थिति के आधार पर खाद का इस्तेमाल कर सकें और खेती की लागत, पैदावार तथा मिट्टी की सेहत के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके.
यह भी पढ़ें- भारत में बदल रहा दूध का बाजार! डेयरी कंपनियों के सामने नई चुनौती
Latest Stories
भारत में बदल रहा दूध का बाजार! डेयरी कंपनियों के सामने नई चुनौती
खरीफ सीजन में धान की बुवाई 4 फीसदी घटी, कर्नाटक और तेलंगाना में सबसे ज्यादा कमी
धान की बुआई 3.71 फीसदी घटी, कर्नाटक और तेलंगाना में सबसे ज्यादा गिरावट; दालों का रकबा बढ़ा
