वरिष्ठ नागरिकों की हाउसिंग डिमांड में आएगी बड़ी तेजी, 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचेगा मार्केट
भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में करीब 18,000 करोड़ रुपये का यह मार्केट 2026 में 30,000 करोड़ और 2028 में करीब 70,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. वरिष्ठ नागरिकों की हाउसिंग डिमांड 2030 तक करीब 30 लाख यूनिट रहने का अनुमान है.

Senior Living Market India: 2024 में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवासीय बाजार का साइज करीब 18,000 करोड़ रुपये था. Colliers के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के लिए इसका अनुमान करीब 30,000 करोड़ रुपये है, जबकि 2028 तक मार्केट साइज करीब 70,000 करोड़ रुपये पहुंचने का फोरकास्ट है. 2030 तक इसके 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है. ये आंकड़े ओवरऑल इन्वेंटरी के सप्लाई साइड के आधार पर एस्टिमेटेड और फोरकास्टेड हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, सीनियर-फोकस्ड हाउसिंग की ऑर्गनाइज्ड सप्लाई फिलहाल करीब 25,000 यूनिट्स है, जो 2030 तक बढ़कर करीब 1 लाख यूनिट्स हो सकती है. इसी अवधि में सेगमेंट की पेनिट्रेशन रेट भी मौजूदा 1% से अधिक के स्तर से बढ़कर करीब 4% होने का अनुमान है.
Tier II और III सिटीज में 30-40% नए प्रोजेक्ट्स
सीनियर लिविंग मार्केट का अगला बड़ा ग्रोथ ड्राइवर Tier II और Tier III सिटीज हो सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स में डेवलपर्स और इन्वेस्टर्स की ओर से 130 अरब रुपये से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट किए जाने की उम्मीद है. इसमें अनुमानित नए प्रोजेक्ट लॉन्चेज का 30-40% हिस्सा Tier II और Tier III सिटीज तथा स्पिरिचुअल हब्स में हो सकता है.
फिलहाल देश के ऑर्गनाइज्ड सीनियर लिविंग स्टॉक में Tier I सिटीज की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. हालांकि, अब यह मार्केट धीरे-धीरे छोटे शहरों और स्पिरिचुअल हब्स की ओर भी बढ़ रहा है. Coimbatore, Puducherry, Dehradun और Vadodara जैसे शहरों के साथ Tirupati, Vrindavan और Ayodhya जैसे स्पिरिचुअल हब्स को सीनियर हाउसिंग के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन के रूप में देखा जा रहा है.
हेल्थकेयर और वेलनेस पर बढ़ेगा फोकस
रिपोर्ट के मुताबिक, सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स का स्वरूप भी बदल रहा है. डेवलपर्स अब स्टैंडअलोन प्रोजेक्ट्स के बजाय इंटीग्रेटेड लिविंग और केयर इकोसिस्टम की ओर बढ़ सकते हैं. इंडिपेंडेंट और असिस्टेड लिविंग दोनों फॉर्मेट्स में 1, 2 और 3 BHK यूनिट्स की मांग बनी रहने की उम्मीद है. इसके अलावा विलाज, लार्ज मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट्स और इंटीग्रेटेड टाउनशिप्स में सीनियर लिविंग क्लस्टर्स को शामिल करने का ट्रेंड बढ़ सकता है.
आने वाले समय में डेवलपर्स डिमेंशिया केयर, इमरजेंसी सपोर्ट, रिहैबिलिटेशन और वेलनेस सर्विसेज जैसी सुविधाओं पर भी ज्यादा फोकस कर सकते हैं. वहीं, ऑपरेटर-लेड मॉडल्स में भी तेजी आ सकती है, जहां रियल एस्टेट डेवलपर्स लोकल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के साथ पार्टनरशिप कर सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स विकसित करेंगे.
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मजबूत होने की उम्मीद
Colliers की रिपोर्ट में सीनियर लिविंग सेगमेंट के लिए रेगुलेटरी एनवायरनमेंट मजबूत होने की भी उम्मीद जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स के लिए मॉडल गाइडलाइंस को मजबूत करने पर जोर बढ़ रहा है. ये गाइडलाइंस स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज को अपने स्तर पर सीनियर हाउसिंग के लिए फ्रेमवर्क तैयार करने में मदद कर सकती हैं.
इसके साथ ही RERA कंप्लायंस रिक्वायरमेंट्स से सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स में स्टैंडर्डाइजेशन, ट्रांसपेरेंसी, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और अकाउंटेबिलिटी बढ़ने की उम्मीद है. Haryana और Maharashtra जैसे कुछ स्टेट्स पहले ही सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स के लिए डेडिकेटेड गाइडलाइंस या पॉलिसीज की दिशा में कदम उठा चुके हैं.
कुल मिलाकर, भारत का सीनियर लिविंग मार्केट आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट और हेल्थकेयर दोनों सेक्टर्स के लिए बड़ा अवसर बन सकता है. हालांकि, मार्केट की ग्रोथ डेमोग्राफिक डिमांड के साथ-साथ नए प्रोजेक्ट्स की सप्लाई, हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और डेवलपर्स तथा हेल्थकेयर ऑपरेटर्स के बीच कोलैबोरेशन पर निर्भर करेगी.
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