ऑटो कंपोनेंट से एयरोस्पेस तक, इन 3 कंपनियों ने खोज लिया नया रास्ता; शेयर पर रखें नजर
ऑटो कंपोनेंट उद्योग की कई प्रमुख कंपनियां अब पारंपरिक ऑटो कारोबार से आगे बढ़कर एयरोस्पेस, डिफेंस, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-मार्जिन सेक्टर में तेजी से विस्तार कर रही हैं. एनआरबी बियरिंग्स, संसेरा इंजीनियरिंग और क्राफ्ट्समैन ऑटोमेशन नए कारोबार के जरिए भविष्य की ग्रोथ पर दांव लगा रही हैं.

Auto Component Stocks: भारत का ऑटो कंपोनेंट उद्योग लंबे समय तक वाहन उद्योग की मांग पर ही निर्भर रहा. जब ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी आती थी, तब कंपनियों के ऑर्डर और मुनाफे बढ़ते थे, जबकि मांग कमजोर पड़ने पर कारोबार पर दबाव आ जाता था. लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है. देश की कई प्रमुख ऑटो कंपोनेंट कंपनियां अपने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर एयरोस्पेस, डिफेंस, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, सेमीकंडक्टर और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन जैसे हाई-मार्जिन वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर रही हैं. इससे न केवल उनकी आय के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं, बल्कि ऑटो सेक्टर पर उनकी निर्भरता भी कम होती जा रही है. इस बदलाव की अगुवाई तीन कंपनियां कर रही हैं.
एयरोस्पेस सेक्टर में NRB Bearings की एंट्री
NRB Bearings भारत की सबसे बड़ी स्वतंत्र बियरिंग निर्माता कंपनियों में से एक है. कंपनी ने जनवरी 2026 में बेंगलुरु स्थित महंत टूल रूम का 27.5 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया. यह कंपनी एयरक्राफ्ट इंजन और फ्यूल सिस्टम के लिए हाई-प्रिसिजन कंपोनेंट्स बनाती है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को सप्लाई करती है. इस अधिग्रहण से NRB Bearings को एयरोस्पेस सेक्टर में सीधे प्रवेश मिल गया. आमतौर पर इस उद्योग में जरूरी सर्टिफिकेशन और अप्रूवल हासिल करने में 3 से 4 साल लग जाते हैं, लेकिन महंत टूल रूम के अधिग्रहण से कंपनी को तैयार मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, ग्राहक और ऑर्डर बुक मिल गई.
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 1,335 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन बढ़कर 17.4 फीसदी हो गया. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक 2,500 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करना है. एयरोस्पेस कारोबार में कंपनी को 30 फीसदी तक का ऑपरेटिंग मार्जिन मिलने की उम्मीद है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 3.35 फीसदी गिरकर 423 रुपये पर बंद हुआ.
Sansera Engineering का तेजी से बढ़ता डिफेंस कारोबार
Sansera Engineering पहले से ही प्रिसिजन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मजबूत पहचान रखती है. कंपनी बोइंग की टियर-1 सप्लायर और एयरबस की टियर-2 सप्लायर है. पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने एयरोस्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर कारोबार पर विशेष फोकस किया है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू 14 फीसदी बढ़कर 3,098 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट बढ़कर 298 करोड़ रुपये हो गया.
सबसे तेज ग्रोथ एयरोस्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर (एडीएस) कारोबार में देखने को मिली, जहां रेवेन्यू 155 फीसदी बढ़कर 315 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 में एडीएस कारोबार से 550 से 600 करोड़ रुपये की आय हासिल करना है. मैनेजमेंट का लक्ष्य दशक के अंत तक 10,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू तक पहुंचना है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.98 फीसदी बढ़कर 3,251 रुपये पर बंद हुआ.
इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग पर Craftsman Automation का फोकस
Craftsman Automation ने एयरोस्पेस की बजाय इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कैपेक्स पर दांव लगाया है. कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित डेटा सेंटर, स्टेशनरी इंजन और एल्युमिनियम कारोबार उसकी ग्रोथ के प्रमुख इंजन बनेंगे. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू 42 फीसदी बढ़कर 8,069 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट लगभग दोगुना होकर 384 करोड़ रुपये हो गया.
कंपनी का अनुमान है कि केवल स्टेशनरी इंजन कारोबार से वित्त वर्ष 2029-30 तक करीब 100 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू प्राप्त हो सकता है. वहीं, एल्युमिनियम कारोबार को अगले कुछ वर्षों में 1 बिलियन डॉलर के बिजनेस में बदलने की योजना है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 1.69 फीसदी गिरकर 9,119 रुपये पर बंद हुआ.
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