क्या अगले 2 महीने में बाजार में आने वाली है बड़ी गिरावट, दिग्गज ब्रोकरेज ने घटाया Nifty50 का टारगेट
ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने दिसंबर 2026 के लिए निफ्टी 50 का टारगेट 26000 से घटाकर 25000 कर दिया है. निफ्टी में करीब 8 फीसदी की तेजी की गुंजाइश है. हालिया गिरावट के बाद निफ्टी का फॉरवर्ड पीई रेश्यो छह साल के निचले स्तर 16.6 गुना पर आ गया है. इसके बावजूद भारतीय शेयर मार्केट वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे महंगा मार्केट बना हुआ है. कंपनियों की कमाई में सुधार मार्केट की अगली तेजी के लिए अहम होगा.

शेयर मार्केट में हालिया गिरावट के बाद वैल्यूएशन में नरमी आई है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय शेयर मार्केट दुनिया के दूसरे मार्केटों के मुकाबले महंगा बना हुआ है. ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने दिसंबर 2026 के लिए निफ्टी 50 का टारगेट घटाकर 25000 कर दिया है. पहले यह टारगेट 26000 था. हालांकि, नए टारगेट के हिसाब से निफ्टी में मौजूदा स्तर से करीब 8 फीसदी की तेजी की गुंजाइश है. ब्रोकरेज का मानना है कि मार्केट में हालिया गिरावट के बाद रिकवरी आ सकती है, लेकिन इसे कमाई में तेज सुधार की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी.
छह साल के निचले स्तर पर पहुंचा निफ्टी का वैल्यूएशन
Bernstein के मुताबिक, निफ्टी का 12 महीने का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग यानी पीई रेश्यो घटकर 16.6 गुना रह गया है. यह करीब छह साल का निचला स्तर है. जून 2022 के बाद पहली बार निफ्टी 17 गुना से नीचे फॉरवर्ड अर्निंग पर कारोबार कर रहा है. इससे पहले वैल्यूएशन का ऐसा स्तर कोविड के दौरान मार्केट में आई गिरावट और 2022 की बिकवाली के समय देखने को मिला था.
हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि वैल्यूएशन में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि भारतीय शेयर मार्केट अब सस्ता हो गया है. वैश्विक मार्केटों से तुलना करें तो भारत अब भी तीसरा सबसे महंगा इक्विटी मार्केट है. एशिया के कुछ मार्केटों में मध्यम अवधि की ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर होने के बावजूद उनका वैल्यूएशन भारत से कम है.
पैसे से मार्केट को मिल रहा सपोर्ट
भारतीय शेयर मार्केट में घरेलू संस्थागत निवेशकों का निवेश वैल्यूएशन को ज्यादा गिरने से बचा रहा है. म्यूचुअल फंड और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए लगातार आ रहा पैसा मार्केट को सपोर्ट दे रहा है. Bernstein ने घरेलू निवेशकों की इस खरीदारी को अभूतपूर्व बताया है.
इस साल लंबे समय तक विदेशी निवेशक भारतीय मार्केट में बिकवाली करते रहे, लेकिन घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने मार्केट को सहारा दिया. हालांकि, इसी वजह से वैल्यूएशन में इतनी गिरावट भी नहीं आई कि भारतीय शेयर दूसरे मार्केटों के मुकाबले आकर्षक हो जाएं.
कंपनियों की कमाई में सुधार का इंतजार
Bernstein के मुताबिक, मार्केट में टिकाऊ तेजी के लिए कंपनियों की कमाई में सुधार जरूरी है. वित्त वर्ष 2026-27 यानी FY27 के लिए अर्निंग अनुमान अभी सकारात्मक रुख नहीं दिखा रहे हैं. पिछले तीन महीनों में अनुमानों में केवल मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि कई सेक्टर में अब भी कटौती की जा रही है.
इसके अलावा महंगा कच्चा तेल, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर सीमित स्पष्टता और कमजोर मानसून तथा जलाशयों की स्थिति भी मार्केट के लिए जोखिम बने हुए हैं. ब्रोकरेज को पिछली तिमाही में दर्ज मजबूत ग्रोथ के दोहराए जाने को लेकर भी संदेह है.
4 से 5 फीसदी की गुंजाइश
Bernstein का मानना है कि भारतीय मार्केट में मौजूदा स्तर से 4 से 5 फीसदी की अतिरिक्त तेजी आने पर वैल्यूएशन फिर असहज स्तर पर पहुंच सकता है. इससे निफ्टी का फॉरवर्ड पीई रेश्यो हाल के औसत 18.2 गुना के करीब जा सकता है. ऐसे में केवल वैल्यूएशन के आधार पर मार्केट में बड़ी तेजी की गुंजाइश सीमित है.
ब्रोकरेज के मुताबिक, मार्केट में मजबूत और टिकाऊ तेजी के लिए कंपनियों की कमाई में स्पष्ट सुधार या भारतीय मार्केट के वैल्यूएशन प्रीमियम में कमी जरूरी होगी. फिलहाल भारतीय शेयर मार्केट पहले के मुकाबले सस्ता जरूर हुआ है, लेकिन वैश्विक मार्केटों की तुलना में महंगा है. ऐसे में निवेशकों के लिए मार्केट की आगे की दिशा तय करने में कंपनियों की कमाई और आर्थिक परिस्थितियां अहम भूमिका निभाएंगी.