Explained: CAS लागू होने के बाद BSE में कम कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड हुए, फिर भी प्रीमियम बढ़ा 75%

CAS लागू होने के बाद BSE पर डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट की संख्या 30.6% घट गई, लेकिन प्रति कॉन्ट्रैक्ट प्रीमियम 74.8% बढ़ा. इससे BSE का रोजाना औसत प्रीमियम टर्नओवर 21.3% बढ़कर 23,500 करोड़ रुपये हो गया और मार्केट शेयर भी बढ़ा.

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एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज BSE पर क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद पहले हफ्ते में डेरिवेटिव्स के कारोबार में बड़ा बदलाव देखने को मिला. BSE पर ट्रेड होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या में काफी गिरावट आई, लेकिन हर कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाला प्रीमियम तेजी से बढ़ गया. इससे BSE का कुल प्रीमियम टर्नओवर और मार्केट शेयर दोनों बढ़े हैं.

Nuvama Institutional Equities की रिपोर्ट के मुताबिक, CAS लागू होने के पहले हफ्ते में बाजार में आखिरी समय में होने वाली तेज उतार-चढ़ाव पर कुछ हद तक रोक लगी. इसका असर यह हुआ कि निवेशकों का रुझान ऐसे ऑप्शंस की तरफ बढ़ा, जो मौजूदा कीमत से काफी दूर थे.

BSE पर कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या 30.6% घटी

CAS लागू होने के बाद BSE पर रोजाना औसतन ट्रेड होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या 30.6% घटकर करीब 9 करोड़ रह गई. वहीं, पूरे इंडस्ट्री में कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या में 20.4% की गिरावट आई. जुलाई 2026 में BSE पर रोजाना औसतन करीब 15 करोड़ कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड हुए थे. FY27 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा करीब 15.6 करोड़ था. हालांकि कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या कम हुई, लेकिन हर कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाला प्रीमियम काफी बढ़ गया.

प्रति कॉन्ट्रैक्ट प्रीमियम 74.8% बढ़ा

Nuvama के मुताबिक, BSE पर प्रति कॉन्ट्रैक्ट मिलने वाला औसत प्रीमियम हफ्ते-दर-हफ्ते 74.8% बढ़कर 2,605 रुपये हो गया. इससे पहले जुलाई 2026 में यह करीब 1,688 रुपये और FY27 की पहली तिमाही में 1,902 रुपये था. प्रीमियम में इस तेज बढ़ोतरी का सीधा फायदा BSE के रोजाना औसत प्रीमियम टर्नओवर को मिला.

BSE का प्रीमियम टर्नओवर 21.3% बढ़ा

कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या घटने के बावजूद BSE का रोजाना औसत प्रीमियम टर्नओवर 21.3% बढ़कर करीब 23,500 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, पूरे इंडस्ट्री का प्रीमियम टर्नओवर 9.5% बढ़ा. BSE का यह आंकड़ा Nuvama के FY27 के बाकी समय के अनुमान 21,800 करोड़ रुपये से भी ज्यादा रहा. इसके चलते प्रीमियम टर्नओवर के मामले में BSE का मार्केट शेयर 362 बेसिस पॉइंट बढ़कर 37.1% हो गया. FY27 में अब तक BSE का रोजाना औसत प्रीमियम टर्नओवर करीब 28,200 करोड़ रुपये है और इसका मार्केट शेयर लगभग 35.2% है.

क्या है Closing Auction Session यानी CAS?

CAS एक नया सिस्टम है, जिसे बाजार नियामक SEBI और NSE ने चुनिंदा Futures & Options (F&O) शेयरों के लिए शुरू किया है. यह व्यवस्था 3 अगस्त 2026 से लागू हुई. इसका सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब चुनिंदा F&O शेयरों की क्लोजिंग कीमत ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट में हुए सौदों के आधार पर तय नहीं होगी. इसके बजाय ट्रेडिंग खत्म होने के बाद एक खास ऑक्शन के जरिए क्लोजिंग प्राइस तय किया जाएगा.

आसान भाषा में कहें तो CAS एक 20 मिनट की ऑक्शन प्रक्रिया है, जिसमें खरीदने और बेचने के सभी ऑर्डर एक साथ इकट्ठे किए जाते हैं और उन्हें एक समान कीमत पर मैच किया जाता है. यही कीमत शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस बनती है.

3:15 बजे से शुरू होता है पूरा प्रोसेस

दोपहर 3 बजे से 3:15 बजे तक एक्सचेंज योग्य शेयरों में हुए सौदों का Volume Weighted Average Price (VWAP) निकालते हैं. इसके बाद 3:15 बजे लगातार चलने वाली ट्रेडिंग बंद हो जाती है और CAS शुरू होता है. 3:15 से 3:20 बजे तक कोई नया ऑर्डर नहीं डाला जा सकता. इसके बाद 3:20 से 3:25 बजे तक निवेशक मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर डाल सकते हैं.

3:25 से 3:30 बजे तक केवल लिमिट ऑर्डर डाले जा सकते हैं. आखिरी समय में अचानक बहुत ज्यादा ऑर्डर आने से रोकने के लिए ऑर्डर डालने की प्रक्रिया 3:28 से 3:30 बजे के बीच किसी भी समय अचानक बंद हो सकती है.

इसके बाद 3:30 से 3:35 बजे तक खरीद और बिक्री के ऑर्डर मैच किए जाते हैं. जिन सौदों का मिलान हो जाता है, वे एक समान कीमत पर पूरे होते हैं और यही कीमत शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस बनती है.

CAS लाने का मकसद क्या है?

CAS का मकसद ऐसी क्लोजिंग प्राइस तय करना है, जो बाजार की वास्तविक मांग और सप्लाई को बेहतर तरीके से दिखाए. इससे बड़े ऑर्डर को ज्यादा आसानी से पूरा करने, लिक्विडिटी बढ़ाने और क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है.

इसके अलावा, नई व्यवस्था का उद्देश्य यह भी है कि ट्रेडिंग के आखिरी कुछ मिनटों में किए गए बड़े सौदों से शेयर या इंडेक्स की क्लोजिंग कीमत पर जरूरत से ज्यादा असर न पड़े.

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