BSE vs NCLAT Case Explained: शेयर फ्रीज पर बड़ा फैसला, NCLAT ने BSE को क्यों लगाई फटकार?

National Company Law Appellate Tribunal ने Bombay Stock Exchange (BSE) को एक अहम मामले में फटकार लगाते हुए साफ कर दिया कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान शेयर फ्रीज करने का अधिकार सीमित है. यह मामला उस समय सामने आया जब BSE ने Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत चल रही CIRP प्रक्रिया में कंपनी के डिमैट खातों को फ्रीज करने की दलील दी थी, जिसे NCLAT ने खारिज कर दिया.

ट्रिब्यूनल ने कहा कि IBC का सेक्शन 238 दूसरी सभी कानूनों पर हावी होता है यानी अगर कोई टकराव होता है तो IBC को प्राथमिकता मिलेगी. इसका सीधा मतलब है कि CIRP के दौरान कंपनियां अपने एसेट्स, जिसमें शेयर भी शामिल हैं, बेचकर कर्ज चुकाने की प्रक्रिया जारी रख सकती हैं. इस फैसले से निवेशकों और लेनदारों को राहत मिल सकती है क्योंकि अब रिकवरी प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है. साथ ही यह निर्णय भारत के इनसॉल्वेंसी फ्रेमवर्क को और मजबूत बनाता है.

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