होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ग्लोबल मार्केट में हलचल! कच्चा तेल उछला, एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली
जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के बाद एशियाई शेयर बाजारों में दबाव देखने को मिला. MSCI एशिया पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत गिर गया और पिछले छह कारोबारी सत्रों में यह पांचवीं गिरावट की ओर बढ़ता दिखा. टेक शेयरों में बिकवाली और तेज रही.

ग्लोबल मार्केट में गुरुवार को भारी उतार-चढाव देखने को मिला. अमेरिका द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान में सैन्य हमले किए जाने और उसके जवाब में ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई. इसका असर कच्चे तेल, शेयर बाजार, बॉन्ड और करेंसी मार्केट पर साफ दिखाई दिया. इस जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के बाद MSCI एशिया पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत गिर गया और पिछले छह कारोबारी सत्रों में यह पांचवीं गिरावट की ओर बढ़ता दिखा. अगर दबाव ऐसे ही बढ़ता रहा तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है.
तेल की कीमतों में तेज उछाल
ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर करीब 95.20 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. बाजार को चिंता है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है. ईरान ने घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट को सभी जहाजों, तेल टैंकरों और कारोबारी पोतों के लिए बंद कर दिया गया है. साथ ही चेतावनी दी गई कि वहां से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज पर कार्रवाई की जाएगी.
एशियाई शेयर बाजारों में बिकवाली
जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के बाद एशियाई शेयर बाजारों में दबाव देखने को मिला. MSCI एशिया पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत गिर गया और पिछले छह कारोबारी सत्रों में यह पांचवीं गिरावट की ओर बढ़ता दिखा. टेक शेयरों में बिकवाली तेज रही. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला.
वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स भी कमजोर
अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई. इससे पहले वॉल स्ट्रीट में नैस्डैक-100 इंडेक्स 2 प्रतिशत लुढक गया था. बड़ी टेक कंपनियों में लगातार बिकवाली के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है. चिप सेक्टर में भी दबाव रहा. एनवीडिया के शेयर 3.7 प्रतिशत, ब्रॉडकॉम के शेयर 5.1 प्रतिशत और सुपर माइक्रो कंप्यूटर के शेयर 28 प्रतिशत तक टूट गए. कंपनी द्वारा 7 अरब डॉलर के इक्विटी फंड जुटाने की योजना घोषित किए जाने के बाद यह गिरावट आई.
सोना और डॉलर
तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते सोने में भी कमजोरी देखने को मिली. सोना करीब 4,050 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया. अमेरिकी ट्रेजरी फ्यूचर्स में भी गिरावट आई क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि बढ़ती एनर्जी प्राइस केंद्रीय बैंकों को लंबे समय तक सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर सकती हैं.
महंगाई के आंकड़ों से राहत, लेकिन चिंता बरकरार
अमेरिका में जारी ताजा महंगाई के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे. खाद्य और एनर्जी प्राइस को छोड़कर कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अप्रैल की तुलना में 0.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बाजार को 0.3 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद थी. इसके बावजूद बॉन्ड बाजार के निवेशक अब भी मान रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. ब्याज दरों से जुड़े स्वैप बाजार में दिसंबर तक एक और दर वृद्धि की पूरी संभावना दिखाई दे रही है.
आगे इस बात की है टेंशन
बाजार की नजर अब ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और तेल की कीमतों पर रहेगी. यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल में और तेजी आ सकती है, जिससे वैश्विक महंगाई तथा ब्याज दरों पर दबाव बढ़ेगा. ऐसे माहौल में शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है.
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