रूसी तेल पर अमेरिका ने दी बड़ी राहत, 30 दिन बढ़ी छूट, भारत ने भी दिया बड़ा बयान; ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के नीचे आया
यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने रूसी तेल कार्गो के लिए यह अस्थायी राहत बढ़ाई है. इससे पहले दी गई छूट 16 मई को खत्म हो गई थी. अमेरिका ने पहली बार मार्च में समुद्र में मौजूद रूसी तेल कार्गो पर प्रतिबंधों में राहत दी थी, ताकि सप्लाई चेन पर दबाव कम किया जा सके.
ईरान युद्ध के बीच लगातार बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है. रूस के तेल से जुड़े प्रतिबंधों में दी गई राहत को 30 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है. इस फैसले का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट के साथ-साथ भारत जैसे बड़े तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने सोमवार को कहा कि समुद्र में फंसे रूसी तेल कार्गो के लिए जारी अस्थायी छूट को आगे बढ़ाया जा रहा है.
30 दिन की अस्थायी राहत क्यों बढ़ाई गई?
अमेरिका के मुताबिक, यह फैसला उन देशों को राहत देने के लिए लिया गया है जो ऊर्जा के मामले में ज्यादा संवेदनशील हैं और फिलहाल तेल सप्लाई संकट का सामना कर रहे हैं. यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने रूसी तेल कार्गो के लिए यह अस्थायी राहत बढ़ाई है. इससे पहले दी गई छूट 16 मई को खत्म हो गई थी. अमेरिका ने पहली बार मार्च में समुद्र में मौजूद रूसी तेल कार्गो पर प्रतिबंधों में राहत दी थी, ताकि सप्लाई चेन पर दबाव कम किया जा सके.
ईरान युद्ध से बढ़ा ग्लोबल ऑयल संकट
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल आया है और दुनियाभर के उपभोक्ताओं पर महंगे ईंधन का दबाव बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन की कीमतें युद्ध शुरू होने के मुकाबले 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी हैं. हालांकि सोमवार को कुछ राहत देखने को मिली और Brent Crude करीब 2.5 प्रतिशत गिरकर 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता दिखा.
भारत ने कहा- रूसी तेल खरीद पर असर नहीं
भारत सरकार ने साफ किया है कि रूस से कच्चा तेल खरीदने का फैसला अमेरिकी छूट पर निर्भर नहीं करता. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत पहले भी रूस से तेल खरीद रहा था, छूट के दौरान भी खरीद जारी रही और आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि भारत का फैसला पूरी तरह व्यावसायिक आधार पर होता है और देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है. सरकार के मुताबिक, पर्याप्त मात्रा में क्रूड ऑयल की व्यवस्था पहले से की जा चुकी है और अमेरिकी छूट बढ़े या खत्म हो, उससे भारत की खरीद रणनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
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