होर्मुज में 50% जहाज ट्रैफिक डाटा से ‘गायब’! अंडरकवर एजेंट ने किया खुलासा, अब खुलने से तेल सप्लाई पर क्या असर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले करीब 50% जहाज ट्रैकिंग सिस्टम में नजर नहीं आते, एक नई रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. ऐसे में जब यह अहम समुद्री रास्ता फिर खुल गया है, ग्लोबल तेल सप्लाई और बाजार के अनुमान पर नए सवाल खड़े हो गए हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया का तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है, वहां को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. अमेरिकी रिसर्च फर्म Citrini Research की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाले करीब आधे जहाज ट्रैकिंग सिस्टम में दिखते ही नहीं हैं. यानी जिस डाटा के भरोसे दुनिया तेल सप्लाई का अंदाजा लगा रही है, वह अधूरा हो सकता है. ऐसे वक्त में जब होर्मुज दोबारा खुलने की खबर आई है, यह जानकारी और भी अहम हो जाती है.
आधे जहाज ट्रैकिंग सिस्टम से गायब!
Citrini Research की रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले करीब 50% जहाजों की गतिविधि ट्रैकिंग सिस्टम में दिखती ही नहीं. यह दावा उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग पर आधारित है, जहां एक अंडरग्राउंड एजेंट ने खुद इस रूट का अध्ययन किया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर निवेशक और ट्रेडर AIS (Automatic Identification System) डाटा पर भरोसा करते हैं, लेकिन यह सिस्टम अधूरी तस्वीर दिखा सकता है. कई जहाज जानबूझकर अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं या गलत जानकारी देते हैं, ताकि उनकी असली मूवमेंट छिपी रहे.
बाजार के लिए क्यों अहम है यह खुलासा?
यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी डाटा के आधार पर तेल सप्लाई, कीमतों और महंगाई का अनुमान लगाया जाता है. अगर डाटा अधूरा है, तो बाजार के अनुमान भी गलत हो सकते हैं.
ब्रोकरेज फर्म XTB Group ने भी Citrini Research के हवाले से कहा है कि यह “ब्लाइंड स्पॉट” वैश्विक बाजारों के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है.
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भारत के लिए राहत की खबर
इसी बीच, भारत के लिए राहत भरी खबर भी सामने आई है. Green Sanvi और Green Asha नाम के दो भारतीय LPG कैरियर्स हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं और जल्द भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि अब होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है.
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