FIIs ने क्यों बदली रणनीति? अब ब्लू-चिप छोड़ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर बड़ा दांव; सामने आई बड़ी वजह
पिछले कुछ सालों में भारत में मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी से विस्तार हुआ है. इसी वजह से विदेशी निवेशक अब सिर्फ कुछ बड़े शेयरों पर निर्भर रहने के बजाय ज्यादा कंपनियों में निवेश कर रहे हैं. विदेशी निवेशक अब ऐसे सेक्टरों में पैसा लगा रहे हैं जहां आने वाले समय में तेजी से ग्रोथ की उम्मीद है.
FIIs Shifting Money: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों यानी FIIs की रणनीति तेजी से बदल रही है. पहले जहां विदेशी निवेशक सिर्फ बड़ी और भरोसेमंद ब्लू-चिप कंपनियों में पैसा लगाते थे, वहीं अब उनका रुख मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तरफ बढ़ता दिख रहा है. भारत की तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था, नए सेक्टरों में ग्रोथ और सरकार की नीतियों ने निवेशकों को नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया है.
पिछले कुछ सालों में भारत में मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी से विस्तार हुआ है. इसी वजह से विदेशी निवेशक अब सिर्फ कुछ बड़े शेयरों पर निर्भर रहने के बजाय ज्यादा कंपनियों में निवेश कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले चार सालों में FIIs ने भारतीय बाजार में जिन कंपनियों में हिस्सेदारी रखी है, उनकी संख्या करीब 900 से बढ़कर 1,300 तक पहुंच गई है.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तरफ बढ़ा रुझान
- विदेशी निवेशक अब ऐसे सेक्टरों में पैसा लगा रहे हैं जहां आने वाले समय में तेजी से ग्रोथ की उम्मीद है.
- इसमें कैपिटल गुड्स, डिफेंस, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और नई टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं.
- इन सेक्टरों में ज्यादातर कंपनियां मिडकैप और स्मॉलकैप कैटेगरी में आती हैं.
- पहले विदेशी निवेशक इन कंपनियों को ज्यादा महत्व नहीं देते थे, लेकिन अब इन्हें बड़े मौके के रूप में देखा जा रहा है.
IPO Boom और सरकारी योजनाओं का असर
- 2023 से 2025 के बीच भारत में IPO मार्केट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली.
- इस दौरान 259 नई कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट हुईं.
- इनमें Ather Energy, Pine Labs, PhysicsWallah और Meesho जैसी नई टेक कंपनियां शामिल रहीं.
- इसके अलावा सरकार की PLI स्कीम और China Plus One रणनीति का फायदा भी भारतीय कंपनियों को मिला है.
- इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, स्पेशलिटी केमिकल और पावर इक्विपमेंट सेक्टर में कई नई मिडकैप कंपनियां तेजी से आगे बढ़ी हैं.
डॉलर और ग्लोबल मार्केट का भी असर
एक तरफ FIIs भारत में नए सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ बड़े शेयरों से पैसा निकाल भी रहे हैं. विदेशी निवेश का एक हिस्सा अब ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देशों की तरफ जा रहा है, जहां AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके अलावा रुपये की कमजोरी ने भी विदेशी निवेशकों का रिटर्न घटाया है. मार्च 2022 से मई 2026 के बीच निफ्टी 50 करीब 35 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन रुपये में गिरावट के कारण डॉलर में मिलने वाला रिटर्न काफी कम हो गया.
बड़े शेयरों में भारी बिकवाली
बैंकिंग सेक्टर में FIIs ने सबसे ज्यादा बिकवाली की है. HDFC Bank में विदेशी निवेशकों ने करीब 41 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इसके बाद Kotak Mahindra Bank और ICICI Bank में भी भारी बिकवाली देखने को मिली. IT सेक्टर में भी दबाव रहा. Infosys और Tata Consultancy Services जैसे बड़े शेयरों में विदेशी निवेशकों ने हिस्सेदारी घटाई. वहीं Reliance Industries, Bharti Airtel और Maruti Suzuki India जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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