Crude Oil $100 के पार, RTP फ्रीज करने का दबाव बढ़ा; इन ऑयल कंपनियों पर हो सकता है असर, स्टॉक रखें फोकस में
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. इसके बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है. अब रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (RTP) में बदलाव की चर्चा है, जिसका असर MRPL और CPCL जैसी रिफाइनरी कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है.
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारत की तेल कंपनियों के सामने नया दबाव बनता दिख रहा है. खबर है कि सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) पेट्रोल और डीजल की बिक्री से हो रहे नुकसान को कम करने के लिए रिफाइनरियों को कम कीमत देने पर विचार कर रही हैं. अगर ऐसा फैसला लागू होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनका खुद का रिटेल नेटवर्क कम है. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक एमआरपीएल (MRPL) और चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CPCL) जैसी कंपनियों के शेयरों पर इसका असर दिखाई दे सकता है.
क्यों बढ़ रहा है दबाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. युद्ध से पहले जहां क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ऐसे में तेल मार्केटिंग कंपनियों को महंगे कच्चे तेल के बावजूद पुराने रेट पर ईंधन बेचने के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है.
क्या है RTP और क्यों हो रहा बदलाव
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, OMCs अब एक विकल्प पर विचार कर रही हैं, जिसके तहत Refinery Transfer Price (RTP) को फ्रीज किया जा सकता है या उस पर डिस्काउंट तय किया जा सकता है. RTP वह आंतरिक कीमत होती है जिस पर रिफाइनरियां पेट्रोल और डीजल को मार्केटिंग कंपनियों को बेचती हैं.
अगर यह कीमत कम कर दी जाती है तो रिफाइनरियों को वैश्विक कीमतों का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा और उन्हें लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन करना पड़ेगा.
इन कंपनियों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से सबसे ज्यादा असर उन रिफाइनरियों पर पड़ेगा जिनका खुद का पेट्रोल पंप नेटवर्क नहीं है और जो अपना ज्यादातर ईंधन OMCs को बेचती हैं. इनमें मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL), चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CPCL) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL) शामिल हैं.
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MRPL के शेयर फिलहाल करीब ₹178 के आसपास ट्रेड कर रहे हैं. पिछले एक सप्ताह में इसमें 14 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट देखने को मिली है, जबकि पिछले पांच वर्षों में इसने करीब 323 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. वहीं CPCL का शेयर करीब ₹918 के आसपास है. बीते एक सप्ताह में इसमें करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई है, हालांकि पिछले पांच वर्षों में इस स्टॉक ने 714 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है.
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगर RTP को फ्रीज करने या उस पर डिस्काउंट देने का फैसला लागू होता है तो इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है.
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